आओ रवांई को जानें भाग-13...लटकू बाड़ी खाई कतरईं कि ना खाई


...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
...आजकाल एंणी पड़ीं ठंड कि आड़ग बि कीर्तन करनी लगीं। पैली जमान ठंड दिनु क अलग त्यार बणात लोक। एतरा कोई त्यूं त्यारु क नऊं बि ना जांणद। पूष (पौष) क त्यार आमर रवांई की पच्छयाण त। अब आमर साथ क अर आमर बाद क छोराऊं पताई ना कि पुष क मैन कोइज त्यार बंणू। पुष क मैन बोतड़ खाण अर पीण क चिजु की त्यार बणा त लोक। त्यूं मा नि सबसे बोतड़ जेई त्यार मनात तेइक बार मां अब कोई जांणदु बि ना। 
आमर रवांई घाटी मां पच्चीस (25) गति पूष बाटी होंऊं त्यार शुरू। 25 गति पूष कोदाड़ी कु बाड़ी बंणात (मंडुवे के आटे का हलवा)। घे (घी) अर गुणांणी (गुड़ और पानी का घोल) क सात खा त सपोड़ी-सपोड़ी। जति त्यार, तति कथा बि बणीं। छबीस (26) गति पूष भी चुरली बण त येई त्यार मां पोसत, भंगजीर अर दाई भेडयी रोटी बणत अर घे या म (शहद) क सात खा त। 

सताइस (27) गति पूष चैंव का पिदीं की बड़ीं (चावल का आटा) सीड़ अर असक बंणा त। सीड़ू स्वादु बणाण लि त्युं फुंडू भंगजीर, दाव, नरेऊ, मुंफई, गूड़, तील अर पोस्ट भरे। तका खांण कु स्वाद आ। मेरे जिकुड़े। सीड़ अर असक खांण कु जु आनंद घे अर म क सात आ तणंगु आनंद ओठा कथु क साथ ना आंदु। 

किछी गां येंण बि तक जियूं गां फुंड पूष क त्यारु मां बाकर काटियूं। लोक बाकर पैली धार त गाडी़ मोल। उनतीस (29) अर तीस (30) क बाकर काटेत। एतरा भी कोखी-कोखी बाकर काटणै लगी लोक, पर पैली किनी ओस्याड़ रई अब। बाकर काटणं का बाद दारकु-दारकु लग त छोड़ अर पवांड़। जेई मजान हिंयू पड़तु बोता, तेई जमान लोक बाकरु क शिकारी की सुकती भी धर त बंणाई।
आओ रवांई को जानें भाग-13...लटकू बाड़ी खाई कतरईं कि ना खाई आओ रवांई को जानें भाग-13...लटकू बाड़ी खाई कतरईं कि ना खाई Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, January 04, 2019 Rating: 5

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