ब्वाडा की चिट्ठी: ना नौकरी ना रोजगार, 10 प्रतिशत आरक्षण बेकार

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
   खुश हों या दुखी। इधर, सरकार सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की तैयारी कर रही है। भक्त समाज उसके प्रचार में भी जुट गया है। लेकिन, ब्वाडा ने मुझे चिट्टी लिखकर उनकी बात को जनता तक पहुंचाने का फरमान सुनाया है। बोडी ने भी कहा...बेटा जरा बात को जोरदार तरीके से कहना...वरना तेरी खैर नहीं। बहरहाल...सरकार जी...मुझे फिर से बैन मत करवा देना। क्योंकि मैं ब्वाडा-बोडी के आदेशों के क्रम में प्लास्टिक के की-बोर्ड को पीट-पीट कर उनके आदेश का पालन कर रहा हूं। ताकी सनद रहे...। 
अब असल बात पर आते हैं। सुना है कि उत्तराखंड वालों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। आरक्षण मिलते ही नौकरियों में और संस्थानों में आरक्षण नहीं मिलने के कारण पिछड़े युवा अगड़े हो जाएंगे। मुर्झाये चेहरों पर मुस्कान लौट आएगी। डबल इंजन का जंग का चुका इंजन भी तेजी से चलने लगेगा। नौकरियों की गंगा-जमुना बहने लगेगी। ऐसी बाढ़ आएगी कि सारे बेरोजगार उसमें बह जाएंगे और उत्तराखंड बेरोजगार मुक्त हो जाएगा। 

खैर...आपका ध्यान अब मायाबी दुनिया से ब्वाडा-बोडी के आदेश की ओर से लेकर जाता हूं। चेतन हो जाइए। अब तक जो मैं सपने दिखा रहा था। अब उनके टूटने का वक्त आ गया है। दरअसल, मानव विकास (ह्यूमन डेवलपमेंट) रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट की मानें तो देवों की भूमि उत्तराखंड में 17.4 फीसदी शिक्षित युवा बेरोजगार हैं। इनकी संख्या में ठीक उसी तरह इजाफा हो रहा है, जिस तरह पिछले दिनों डाॅलर की कीमतों में हुआ था। बेरोजगार डाॅलर की कीमतों जितनी तेजी से बढ़ रहे हैं। धन्य है 10 प्रतिशत आरक्षण...। 

अव्वल तो ये है कि डबल इंजन के बड़े इंजन यानि केंद्र सरकार की एजेंसी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनामी (सीएमआईई) बोल रही है कि उत्तराखंड में दिसंबर 2018 में बेरोजगारी की रफ्तार 7.5 प्रतिशत की तूफानी गति से बढ़ी है। ये राष्ट्रीय औसत 7.4 से भी आगे है। मान लीजिए कि राष्ट्रीय औसत 7.4 रुपया है और 7.5 उत्तराखंड में बेरोजगारी की दर डाॅलर...।


ब्वाडा की चिट्ठी: ना नौकरी ना रोजगार, 10 प्रतिशत आरक्षण बेकार ब्वाडा की चिट्ठी: ना नौकरी ना रोजगार, 10 प्रतिशत आरक्षण बेकार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, January 17, 2019 Rating: 5

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