अनूप शाह को पद्मश्री एक शानदार विरासत का सम्मान, फोटोग्राफी में 300 से ज्यादा पुरस्कार

नैनीताल : आधुनिक नैनीताल के निर्माताओं में शुमार दशकों  तक नैनीताल की शिक्षा, उद्यम, पर्यटन और पर्वतारोहण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नैनीताल की मोमबत्ती और मौन पालन उद्योग को नई ऊंचाइयां देने वाले स्व. चंद्र लाल साह ठुलघरिया "बुजू " जिन्हें 80 और 90 के दशक में कई बार पद्मश्री से नवाजे जाने की खबरें ताजा होती रहीं  लेकिन, हर बार खबर निराशा में तब्दील होती रही। चंद्र लाल शाह जी का यह मानना था कि अगर मेरे कार्य का समाज निर्माण में योगदान माना जाता है तो क्या मुझे खुद किसी पुरस्कार की मांग करनी चाहिए ? उन्होंने कभी भी अपने नाम का औपचारिक प्रत्यावेदन हस्ताक्षर कर पुरस्कार के लिए आगे नहीं बढ़ायाशायद यही वजह रही कि बार-बार पर्याप्त आधार के बाद भी पद्मश्री तथा अन्य पुरस्कारों से वह वंचित ही रह गए। यह एक सुखद संयोग है कि स्वर्गीय चंद्र लाल शाह को पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने की चर्चाएं तो होती रही लेकिन, पदमश्री पुरस्कार आखिर उनके पुत्र अनूप शाह को मिल ही गया । जन्म 4 अगस्त 1949 मैं नैनीताल में हुआ।


पुलिस अधिकारी प्रमोद शाह बताते हैं कि यह भी एक संयोग ही है कि चंद्र लाल शाह द्वारा स्थापित नैनीताल माउंटेनरिंग क्लब का स्वर्ण जयंती समारोह 28, 29 सितंबर 2018 को मनाया गया, जिसके संचालन का दायित्व मुझे प्राप्त हुआ था। स्वर्ण जयंती कार्यक्रम के मंच से यह बात भी उभर कर आई कि अनूप शाह अपने पिता के अधूरे कार्यों को उसी शिद्दत के साथ आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए पद्मश्री की जो चर्चाएं चंद्र लाल शाह जी के साथ जुड़ी रहती थी, वह अब हकीकत बन जानी चाहिए। मात्र 4 माह में यह बात सच साबित हो गई, इसके लिए चयन समिति का आभार।
  
स्व. चंद्र लाल शाह की तरह अनूप शाह का भी बहुआयामी व्यक्तित्व है वह जहां माउंटेनियर हैं। पर्यावरण प्रेमी हैं। वहीं, एक ख्यातिलब्ध अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर भी। फोटोग्राफी का यह हुनर स्वर्गीय चंद्र लाल शाह जी द्वारा ही अनूप शाह में रोपित किया था। उन्हें कर्नल बक्शी के साथ नेचर फोटोग्राफी सीखने के लिए एक कैमरा सन 1980 के आसपास गिफ्ट किया था। उन दिनों फोटोग्राफी महंगा शौक था। अनूप शाह को जब लगने लगा कि वह एक बेहतर फोटोग्राफ हो गए हैं, तो उन्होंने अखिल भारतीय/एशिया स्तर की एक फोटोग्राफी प्रदर्शनी वर्ष 1986 में नैनीताल मे आयोजित की। लेकिन, यह बड़े आश्चर्य का विषय था कि अनूप शाह और उनके साथी अन्य स्थानीय फोटोग्राफर का कोई भी फोटोग्राफ प्रदर्शनी के लिए नहीं चुना गया। तकनीकी आधार पर उन पर कुछ ना कुछ कमियां रह गई थी। 

इस आयोजन ने उन्हें एक व्यवसायिक फोटोग्राफर के टिप्स सिखा दिए और अपने मजबूत इरादों के साथ वह बहुत जल्दी अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफर के तौर पर स्थापित हो गए। 1994 में इंडिया इंटरनेशनल फोटोग्राफिक काउंसिल IIPC ने उन्हें प्लैटिनम ग्रेड अवार्ड 1997 में और 2002 में डायमंड ग्रेड अवार्ड से नवाजा। साथ ही 1990,1995, 200, 2003 से 2005 तक इंडियास टॉप टेन फोटोग्राफर में शामिल रहे। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के 350 से अधिक पुरस्कार फोटोग्राफी क्षेत्र में उन्हें प्राप्त हो चुके हैं। भारत के विभिन्न संस्थानों /बैंको में उनके फोटोग्राफ्स के कैलेंडर देखे जा सकते हैं

 इसी के साथ इंग्लैंड और अमेरिका के आधिकारिक संस्थानों में भी उनके फोटोग्राफ्स गैलरी/कैलेंडर के लिए चुने गए हैं।  अनूप शाह न केवल फोटोग्राफर हैं, बल्कि एक पेशेवर माउंटेनियर भी हैंवह 1974 में पहले नंदा देवी अभियान दल के सदस्य भी रहे, नंदा खाट, केदार डोम आदि आधा दर्जन चोटियां फतह की और आज नैनीताल माउंटेनिरिंग क्लब के अध्यक्ष हैं। आज भी अपना पूरा समय फोटोग्राफी और पर्वतारोहण के उत्थान को दे रहे हैंउनके समर्पण को सरकार ने मान्यता दी इस वर्ष का पद्मश्री पुरस्कार दिया अनूप शाह को इस पुरस्कार के लिए बधाई कि एक शानदार विरासत का सम्मान हुआ ..।
अनूप शाह को पद्मश्री एक शानदार विरासत का सम्मान, फोटोग्राफी में 300 से ज्यादा पुरस्कार अनूप शाह को पद्मश्री एक शानदार विरासत का सम्मान, फोटोग्राफी में 300 से ज्यादा पुरस्कार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, January 26, 2019 Rating: 5

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