हिंसक होता मनोरंजन...कितना सही...डॉ.मनोज तंवर

...डॉ.मनोज तंवर, हरिद्वार...
..आपको याद होगा सन 2011 में अंग्रेजी टीवी चैनल HBO एक टीवी सीरीज लेकर आया था 'गेम्स ऑफ थ्रोन्स' जिसने पहले सीजन से ही न केवल विश्वभर में अपितु भारत मे भी करोड़ों दर्शक और प्रशंसक बटोरे । इसकी लोकप्रियता ने जिन नई ऊचाइयों को छुआ उसके सामने सिने जगत की चमक फीकी पड़ गयी। इस सीरीज को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया था कि हॉलीवुड या बॉलीवुड जैसे मनोरंजन जगत पर टीवी और इंटरनेट जगत और हावी हो गया...

लेकिन मनोरंजन और रोमांच से छलकते इस सीरियल में एक और चीज बड़े भर भर कर परोसी गयी थी जो दर्शकों में रोमांच का नया पर्याय बन गयी और वो थी हिंसा! कटते हुए फटते हुए शरीर हाथ पैर , बिखरता हुआ मांस, फव्वारे छोड़ता हुआ रक्त, हथियार आदि आदि । यह दृश्य कुछ इस प्रकार के थे कि इस से पहले इस प्रकार के विभत्स दृश्य केवल IS के आतंकियों द्वारा मासूम और निरीह लोगों की गर्दन काटते हुए उन्हें टैंक से कुचलते हुए उन्ही के द्वारा जारी वीडियोज में मिलते थे और लोगों ने उन्हें देख भी खूब ! नैसर्गिक सत्य है की मनुष्य मन रोमांच अथवा साहस और डर का मिश्रित रूप की और बड़ी तेजी से दौड़ता है बस उसमे नयापन हो ! 

HBO ने मनुष्य मन की उसी कमजोरी का व्यापर करते हुए मनोरंजन के रूप में सामने रख दिया और लोगों ने उसे स्वीकार भी हाथ उठा उठा कर किया !! HBO की मात्र इस एक सीरीज ने टीवी जगत को मनोरंजन का सिरमौर बना दिया और ये सिरियल यहीं नही रुका बल्कि इसकी लोकप्रियता का आलम ये था कि प्रत्येक वर्ष इसका एक नया सीजन आता रहा और इसके लेखक जॉर्ज आर आर मार्टिन जिनका ये उपन्यास 'ए सॉन्ग ऑफ़ आइस एंड फायर' के नाम से था उन्हें HBO ने अनुबंधित कर लिया ! अब इसके आठवें और अन्तिम सीजन का लोग बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं जो 2018 में आना था पर किसी कारणवश 2019 में आ पायेगा !! प्रत्येक वर्ष इसके सीरियल की न केवल लोकप्रियता बढ़ती गयी बल्कि इसमें हिंसा का स्तर भी आसमान छूता गया । यदि आपने इसका कोई भी एपिसोड देखा है तो आपको निश्चित ही हिंसा का दृश्य देखकर IS के आतंकियों के वीडियोज का ध्यान स्वतः आया होगा! अब प्रश्न ये है कि क्या अंतर रह गया है वही हिंसा एक और IS वास्तविकता में दिखा रहा है डर फैलाने को और वही हिंसा मानोरंजन जगत हमे दे रहा है हिंसा की सस्ती लोकप्रियता का व्यापार करके पर हिंसा का लोकप्रिय होना समाज के लिए सदैव ही घातक रहा है और रहेगा।

इस सीरीज को लाखों बार नेट से डाऊनलोड करके लोगों ने देखा है इस हिंसा के व्यापार की लोकप्रियता से धनलोलुप मानोरंजन जगत ने इसका भरपूर उपयोग करने का मन बनाया लेकिन भारत जैसे देश मे उन्हें स्वीकृति नही मिल सकती! दूसरी और भारतीय माफिया जगत का सिनेमा प्रस्तुतिकरण यहां की जनसंख्या के लिए हमशा से लोकप्रिय रहा है सत्या, कम्पनी, वास्तव, वन्स अपोन जैसी लोकप्रिय फिल्में इसका उदाहरण हैं। इस हिंसक व्यापार का एक नया रास्ता मानोरंजन जगत ने निकाला इंटरनेट के रूप में और वृहत स्तर पर अवतरण हुआ नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम आदि का और भारत मे इनका पदार्पण होता है हिंसा के उसी प्रस्तुतिकरण के रुप में 'सेक्रेड गेम्स' और 'मिर्जापुर' जैसी वेब सिरीज़ के रूप में जो उसी गेम ऑफ थ्रोन्स के फैलते खून, कटते, गलते, जलते  हाथ पैर मांस के लोथड़ों की लगातार याद दिलाता है इन दोनों ही वेब सीरीज में भारत के बड़े बड़े कलाकारों जैसे सैफ अली खान, नवाजुदीन सिद्दीकी, पंकज त्रिपाठी आदि ने काम किया है सेक्रेड गेम्स के पहले एपिसोड के पहले दृश्य से खून और हिंसा बरस गयी थी जब एक लड़की खून से लथपथ रेंग रही थी और गालियां देते हुए उसके साथी ने उसे गोली मार दी इसी प्रकार की अमानवीय हिंसा को मिर्जापुर के पहले दृश्य में दिखाया गया जब एक बारात में एक दूल्हे को शहर के गुंडे मजाक मजाक में आंख में गोली मारकर मार देते हैं

ठीक गेम ऑफ थ्रोन्स की ही परंपरा को आगे ले जाते हुए इनमें हिंसा गालियां अश्लीलता पैकेज के रुप में परोसा गया है और लोकप्रियता का आलम भी कम न रहा भारत मे बड़े बड़े दिलों से लोगों ने इस वहशी मानोरंजन का स्वागत किया ये शुरुआत है ये सिलसिला अब और बढ़ेगा और अब भारतीय समाज मे छोटे छोटे बच्चे वीभत्स हिंसा का नंगा नाच मानोरंजन के रूप में देखकर तालियां बाजाएँगे सोचिए क्या संदेश जा रहा है और कैसा मन विकसित कर रहे हैं हम बच्चों का। यहां छोटा सा बच्चा हाथ मे ब्रेसलेट सलमान खान को कॉपी करने के लिए पहनता है कपड़े, बनियान, अण्डरवेर, हेयर स्टाइल, जूते, बाइक सब मानोरंजन जगत द्वारा सुझाये जाते है और हम भी वही उपयोग करते हैं तो क्या मानोरंजन जगत द्वारा सुझाई गयी इस हिंसा को हम केवल मानोरंजन तक सीमित रखेंगे.
                                              (...डॉ.मनोज तंवर, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार)
हिंसक होता मनोरंजन...कितना सही...डॉ.मनोज तंवर हिंसक होता मनोरंजन...कितना सही...डॉ.मनोज तंवर Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, December 05, 2018 Rating: 5

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