सुनो सरकार...बेरोजगारी अब जानलेवा होने लगी

पहाड़ समाचार
ये कोई सामान्य खबर नहीं है। एक युवा के सपनों के मरने की खबर है। एक युवक के परिवार के अरमानों की मौत की खबर है। उनके सपनों के चकनाचूर हो जाने की खबर है। ये खबर बेरोजगारी से परेशान होकर मौत को गले लगाने वाले युवा की खबर है। देहरादून में ही प्रदेश के लगभग हर जिले से लाखों युवा रोजगार की उम्मीदें पाले तैयारी में जुटे हैं। नौकरी का इंतजार करते-करते उन पर तनाव इस कदर हावी होने लगा है कि वो उसका भार सह नहीं पा रहे हैं। नतीजा सामने है। त्यूणी क्षेत्र के हटाड़ के 25 साल के आनंद सिंह ने बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या कर दी। रोजगार के साधन सरकार को उपलब्ध कराने हैं, लेकिन सरकार को क्या फर्क पड़ता है कि बेरोजगारी मौत बन जाए या जानलेवा हो जाए। 

पुलिस जब भी किसी की मौत होती है। प्रैस नोट जारी करती है। जब भी कोई फांसी लगाकर जान देता है। उसकी लाइनें हमेशा एक सी रहती हैं। उस प्रैस नोट में तारीखें बदलती हैं। नाम बदलते हैं। जगह बदल जाती है। कारण भी थोड़े बहुत बदलते रहते हैं। असल कारण को जांच के भरोसे छोड़ दिया जाता है। लेकिन, इस बार पुलिस ने असल कारण को जांच के भरोसे नहीं छोड़ा, बिल्क सीधे-सीधे कह दिया है कि युवक की जान बेरोजगारी ने ली है। ...वैल्डन पुलिस। 

बेरोजगारी उत्तराखंड के साथ पूरे देश की भी परेशानी है। रोजगार नहीं मिलने से परेशान होकर मौत को गले लगाने की खबरें भी सामने आती रहती हैं। पिछले दिनों हरियाणा के जिंद में तीन दोस्तों ने ट्रेन के आगे कूदकर मौत को गले लगा दिया था। आगरा में भी ऐसा ही मामला सामने आया। युवक ने बेरोजगारी से परेशान होकर अपने भाई को फोन किया और ट्रेन के आगे कूद गया। ऐसे ही कई मामले सामने आते रहते हैं। लेकिन, सवाल इस बात का है कि विभिन्न विभागों में पद खाली होने के बावजूद भर्ती क्यों नहीं निकाली जा रही...? 

आनंद की मौत एक मामला हो सकता है। पिछले दिनों बेरोजगारों ने प्रदर्शन किया। सरकार ने उन पर लाठियां भांजी। सरकार के मंत्रियों की चैखट पर गए। मंत्री ने कहा मैं तुम्हारा नौकर नहीं। इन दिनों बेरोजगार युवा विभिन्न विभागों में लंबित भर्ती प्रक्रिया को शुरू कराने की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। उनका कोई सुध लेवा नहीं है। युवा अगर मौत को गले ना लगाएं...उठें और संघर्ष करें, तो 2019 का लोकसभा चुनाव सबक सिखाने का मौका है। उत्तराखंड में तीसरे विकल्प की भी जरूरत है। क्यों ना संघर्ष की राह अपनाएं और सत्ता का विकल्प बनने की ओर बढ़ चलें। आपके दो कदमों के साथ दो कदम हमारे भी होंगे...।
                                                                      ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
सुनो सरकार...बेरोजगारी अब जानलेवा होने लगी सुनो सरकार...बेरोजगारी अब जानलेवा होने लगी Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, December 17, 2018 Rating: 5

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