...तो क्या अब अनिवार्य नहीं रहा ट्रांसफर एक्ट?

देहरादून...
ये उत्तराखंड है। यहां सरकारों की नहीं चलती। नौकरशाहों का राज है। नौकरशाह जैसा कहेंगे, सरकार और सरकार के मंत्री उसी चाल चलेंगे। ठीक वैसे ही इस प्रदेश में नियम और कानून नहीं चलते, जुगाड़ चलते हैं। पहुंच वालों की चलती है। आम और सामान्य लोगों की कोई सुनने वाला नहीं है। ट्रांसफर एक्ट का भी वही हाल है। मान लिया जाए कि कुछ विभाग ऐसे होते हैं, जहां एक्ट ज्यादा प्रभावी नहीं है, लेकिन शिक्षा विभाग ऐसा विभाग है, जो व्यवस्थित ढंग से चलता है। ट्रांसफर एक्ट यहां भी लंगड़ी खा गया। नियम तो था कि प्रत्येक साल जून माह तक अनिवार्य ढंग से ट्रांसफर हो जाएंगे। लेकिन, सरकार के सबसे सीनियर नौकरशाह यानि मुख्य सचिव ही एक्ट के तहत होने वाले विषेश ट्रांसफरों की फाइल पर कुंडली मार गए।


ट्रांसफर एक्ट की बात बाद में की जाएगी। पहले आपको यह बता दें कि एक्ट के तहत सभी के ट्रांसफर किए जाने थे। उनमें शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी भी शामिल थे। पदाधिकारियों के ट्रांसफर भी कर दिए गए थे, लेकिन शिक्षक संगठनों ने उसका जमकर विरोध किया। तब भले ही सरकार ने सख्ती दिखाई, लेकिन अब पिछले दरवाजे से सभी शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों के ट्रांसफर वापस ले लिए। कहने का मतलब ये है कि अगर आपका जुगाड़ है, तो आप लगा लीजिए और कहीं भी अपना ट्रांसफर करवा लीजिए।

दिखावे का ट्रांसफर एक्ट
सरकार ने जिस ट्रांसफर एक्ट को लेकर हल्ला मचाया था, वो एक्ट हवाई और दिखावा साबित हुआ। नियमानुसार हर साल जून माह तक अनिवार्य रूप से ट्रांसफर कर दिए जाने चाहिए थे, लेकिन प्राथमिक वर्ग में जनपद स्तर के स्थानांतरणों को छोड़कर स्थानांतरण किए ही नहीं गए। इससे बुरा हाल माध्यमिक वर्ग का है, जहां जनपद स्तर के स्थानांतरण भी नहीं हुए। इससे पता चलता है कि ट्रांसफर एक्ट को लेकर सरकार और सरकार के अधिकारी कितने असंवेदनशील हैं। 

गंभीर बीमारी वालों पर भी गंभीर नहीं सरकार
सरकार और सरकार के अधिकारी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के प्रति भी गंभीर नहीं है। दरअसल, गंभीर बीमारी से जुड़े मामलों में स्थानांतरण मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव के स्तर से किए जाते हैं। निदेशालय से संबंधित मामलों की फाइल भी करीब पांच माह पहले मुख्य सचिव कार्यालय में पहुंच चुकी है। बावजूद इसके अब तक स्थानांतरण पर निर्णय नहीं हो पाया है। इसी फाइल के साथ पति-पत्नि वाले मामलों के प्रकरण भी मुख्य सचिव कार्यालय में भेजे जा चुके हैं। उनका भी संज्ञान नहीं लिया गया।
...तो क्या अब अनिवार्य नहीं रहा ट्रांसफर एक्ट? ...तो क्या अब अनिवार्य नहीं रहा ट्रांसफर एक्ट? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, December 19, 2018 Rating: 5

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