होम स्टे: लैंड यूज बदलने के बाद आपका "घर", "होम" कहलाने का हक खो देगा

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
होम स्टे का शोर पिछले दो-तीन सालों में खूब सुनाई दिया। हालांकि राज्य में होम स्टे लम्बे समय से होता आ रहा है
लिकिन, इसके जोर पकड़ने के साथ जो शोर हुआ, उसी शोर के बीच सरकार ने भी शोर करना शुरू किया। पर्यटन विभाग ने खुद से तो कुछ नहीं किया, जो लोग पहले से होम स्टे संचालित कर रहे थे। उन्हीं का प्रचार कर खुद की उपलब्धि के साथ जोड़ दिया। सरकार भी पीछे नहीं रही और होम स्टे के लिए योजना बनाने का एलान कर दिया। योजना बनी भी। लोग अभी सरकार की योजना को समझने का प्रयास ही कर रहे थे कि सरकार ने एक और योजना इस पर थोप दी। अब आपको होम स्टे संचालित करने के लिए पहले अपनी भूमि का लैंड यूज बदलकर व्यावसायिक करना होगा। सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया है। सवाल ये है कि लैंड यूज व्यावसयिक होने के बाद क्या आपका घर...घर कहलाने के योग्य हरेगा...? लैंड यूज के बाद आपका घर भी होटल और गेस्ट हाउस ही कहलाएगा। होम स्टे का शोर भी थम जाएगा और होम स्टे का जो कल्चर प्रदेश में पनप रहा था, वह भी पूरी तरह दफन होकर रह जाएगा...। 


अब असल बात पर आते हैं। होम स्टे का मतलब लोग आसानी से समझ सकते हैं। कई लोगों ने अपने घरों के एक हिस्से को होम स्टे में बदल दिया है। उसी घर के दो कमरों में वो खुद रहते हैं और उसी घर के दो कमरों में होम स्टे संचालित कर रहे हैं। अब उनको अपने घर का लैंड यूज बदलवाना पड़ेगा। मतलब साफ है कि आपका घर अब घर नहीं रहेगा। बल्कि होटल हो जाएगा। व्यावसासिक का मतलब तो होटल और गेस्ट हाउस ही होता है ना...आपका घर...घर होने का हक खो देगा। 

सरकार के इस फैसले के पीछे कुछ गड़बड़ भी नजर आ रहा है। ऐसा लगता है कि पर्यटन विभाग ने कुछ गड़बड़ किया है। फैसला लेने से पहले इस फैसले के प्रभाव का अध्ययन भी नहीं किया गया। जारा सोचें कि जो लोग गांव में अपने घर को होम स्टे की तर्ज पर प्रयोग कर रहे हैं। उनको लोन की जरूरत ही नहीं पड़ी। सरकार ने जो पहले से नीति बनाई है, उसके तहत अपने खुद के घर में होम स्टे शुरू करने के लिए सरकार एक से दो लाख तक की मदद तो कर ही रही है। फिर व्यावसायिक यूज कराने की क्या जरूरत है...? कहीं ऐसा तो नहीं कि होम स्टे में भी बड़े होटल व्यवसायी दखल देना चाहते हों...? कुछ जगहों पर पहले से ही बड़ी कंपनियां दस्तक दे चुकी हैं। 

सवाल यह भी है कि लैंड यूज बदलने की जरूरत क्यों पड़ रही है...? वो कौन लोग हैं, जिनको होम स्टे के लिए लाखों, करोड़ों के लोन की जरूरत पड़ रही है...? जबकि सरकार पहले ही होम स्टे को मुद्रा लोन के तहत सुविधा देने की बात कह चुकी है। बैंकों को सरकार ने आदेश भी दिए हैं। फिर लैंड यूज किसके लिए बदलवना पड़ रहा है...? इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि बाहर से बडे़ होटल व्यवसायी आकर आसानी से पहाड़ों में जमीनें खरीद सकें। इससे होगा यह कि गांव के लोगों का एक छोटा सा व्यवसाय भी पूंजिपतियों के हाथ चला जाएगा। लोगों के जो घर अभी बचे हैं। वो घर भी बर्बाद हो जाएंगे। गांव का अपना घर बेचकर लोग शहरों की ओर दौड़ लगाएंगे। इससे जो लोग अभी होम स्टे कर गांव में रुके भी थे, वो लोग पलायन कर जाएंगे। 

सरकार को अपने फैसले पर चिंतन करना चाहिए। सरकार को बड़े पूंजीपतियों की चिंता छोड़कर प्रदेश के लोगों की चिंता करनी चाहिए। उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए, जो प्राइवेट नौकरी छोड़कर वापस उत्तराखंड में आकर होम स्टे शुरू करना चाहते हैं। उनको बैंकों का लोन भी नहीं चाहिए। उनको व्यावसायिक नहीं, किसी घरेलु परिवेश में होम स्टे चलाना है। सरकार को समझना होगा कि होम स्टे व्यावसायिक योजना नहीं है। यह भी समझना चाहिए कि होम स्टे के बहाने रिवर्स माइग्रेशन हो रहा है। होम के होटल बनने से उसके असल मालिक के शहरी होने का खतरा भी बना रहेगा। सरकार को अभी बहुत सारे मसलों पर चिंता करने और सोचने की जरूरत है।
होम स्टे: लैंड यूज बदलने के बाद आपका "घर", "होम" कहलाने का हक खो देगा होम स्टे: लैंड यूज बदलने के बाद आपका "घर", "होम" कहलाने का हक खो देगा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, December 16, 2018 Rating: 5

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