दृष्टिहीनों पर लोक सेवा आयोग की मार, परीक्षा में नहीं किया शामिल

देहरादून: उत्तराखंड लोक सेवा आयोग अपनी मानमानी और नाकामी छुपाने के लिए दृष्टिहीनों पर दोष मढ़ रहा है। आयोग ने ना केवल संविधान के समानता के अधिकार का हनन किया, बल्कि दृष्टिहीनों से रोजगार का अधिकार भी छीन लिया। 

दरअसल, आज लोक सेवा आयोग की ओर से संचालित प्रवक्ता पदों की परीक्षा का आयोजन कराया गया। लेकिन, आयोग ने इस परीक्षा में दृष्टिहीनों को शामिल होने से रोक दिया। आयोग का तर्क था कि नियमानुसार दृष्टिहीनों को परीक्षा से 10 दिन पहले श्रुत लेखक यानि स्क्राइवर रखने की अनुमति आयोग से लेनी आवश्यक है। 

राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ उत्तराखंड के महासचिव पीतांबर सिंह चैहान ने बताया कि आयोग को श्रुत लेखक की अनुमति और परीक्षा के नियमों की किसी भी तरह जानकारी दृष्टिहीन अभ्यर्थियों को नहीं दी। इसकी जानकारी ना तो आयोग की ओर से जारी की गई विज्ञप्ति में थी और ना अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र में ही इस संबंध में कुछ बताया गया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लेती है, तो यह तय है कि दृष्टिहीन संघ को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। 

इस तरह से एक बात तो साफ है कि अगर सरकार ने आयोग की मनमानी का कोई हल नहीं निकाला तो, एक और परीक्षा कानूनी पचड़े में फंसकर रह जाएगी। जिसका सीधा नुकसान प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को होगा। उन युवाओं की उम्मीदों को झटका लगेगा, जो लंबे समय से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे थे। राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ उत्तराखंड के सचिव खेम सिंह रावत ने कहा कि आयोग मनमानी कर रहा है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आयोग सीधेतौर पर संविधान से मिले अधिकारों को हनन कर रहा है। यह कोई साधारण बात नहीं है।

दृष्टिहीनों पर लोक सेवा आयोग की मार, परीक्षा में नहीं किया शामिल दृष्टिहीनों पर लोक सेवा आयोग की मार, परीक्षा में नहीं किया शामिल Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, December 29, 2018 Rating: 5

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