टिहरी कोटी काॅलोनी की सी-टाइप और डी-टाइप काॅलोनी

...सतेंद्र डंडरियाल जी की कहानी
...टिहरी बांध परियोजना की साइट से कुछ दूरी पर कर्मचारियों के लिए बनाई गई अस्थाई कॉलोनी। जिसे कोटी कॉलोनी नाम दिया गया था, दो भागों में बटी थी सी- टाइप और डी-टाइप जिसमें, पांच हजार के आसपास फ्लैट बनाए गए थे। ज्यादातर टू रूम सेट थे, जिनमें बांध परियोजना में कार्य करने वाले अधिकारी व कर्मचारी रहते थे। सी टाइप में दुकानें बनाकर छोटा सा बाजार भी बनाया गया था। दो स्कूल थे सरस्वती शिशु मंदिर और श्री सत्य साईं स्कूल। सी-टाइप में हमारा मोहल्ला सबसे बड़ा था, जिसमें लगभग 84 परिवार रहते थे। दुमंजिले फ्लैट एक दूसरे के आमने-सामने थे। 


ऊपरी मंजिल के फ्लैट के दरवाजे आमने-सामने खुलते थे। तब इन घरों में ज्यादातर के पास लैंडलाइन फोन नहीं था, यहां तक कि दोपहिया वाहन भी बड़ी बात थी। एक आम जिंदगी थी, जिसमें बच्चों के मनोरंजन का साधन सिर्फ खेलकूद था, टेलीविजन चैनलों के नाम पर सिर्फ दूरदर्शन के ही दर्शन होते थे। यहां सर्दियों के मौसम में सुबह की धूप सकते हुए जिंदगी शुरू होती और गर्मियों के मौसम में देर रात तक मोहल्ले में गपबाजी का दौर चलता। जिसमें सबके अपने किस्से-कहानियां होती।

मोहल्ले का एक लड़का जिसका नाम था बड़का जिसकी नैतिक जिम्मेदारी थी होली के दौरान झाड़ियां और लकड़ी इकट्ठा करके दहन के लिए होलीका तैयार करना। वह इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता था। उसका छोटा भाई इसमें पूरी से सहभागिता निभाता। झाड़ियां एकत्र करने के अभियान को बड़का ही लीड करता था। तब डीजे नहीं हुआ करता था। बड़े स्पीकर वाला स्टीरियो ही लगाना पड़ता था। गाना-बजाना शुरू होता और सबको इंतजार रहता अनूप और मुकेश भटनागर के डांस कंपटीशन का। मुकेश भटनागर के डांस का तो हर मोहल्ले की होली में इंतजार होता था, वरना वहां गीत तो बजते थे, लेकिन महफ़िल तो भटनागर जी ही जमाते थे। सफेद रंग की पेंट कमीज और सफेद जूते पहनकर होली के दिन सज धज कर भटनागर घर से सात बजे बाद ही बाहर निकलते। 

उस दौरान गोविंदा काफी हिट चल रहे थे। अनूप का पसंदीदा गीत 'आंखें दो क्या करूं' और मुकेश भटनागर का फेवरिट सॉन्ग 'मैं से ना मीना से ना साकी से दिल बहलता है मेरा आपके आ जाने से। डांस कंपटीशन में उनके अगल-बगल कोई नहीं ठहरता था, शागिर्द के तौर पर तब गौतम तरफदार डब्लू जॉर्ज से डांस सीख रहा था। जॉर्ज के साथ गौतम डांस में उनके जोड़ीदार की भूमिका निभाता। सबसे शरीफ दिखने वाले मोहन बाबू की पोल होली के दिन दोपहर बाद ही खुलती थी। मोहल्ले में ही श्री बालकृष्ण गुप्ता जी के सुपुत्र दीपेश गुप्ता पढ़ाई के साथ ही डांस की अहमियत समझने लगे थे। उन्होंने भी इस कंपटीशन में भाग लेना शुरू किया। अब होली के दिन रात को होलिका दहन तक कंपटीशन में डांस होता। एक से बढ़कर एक करतब दिखाए जाते। दोपहर तक जमकर होली का हुल्लड़ और नहाने धोने के बाद शाम को दिन भर के किस्से।
                                                                                                                                                  ...जारी 
टिहरी कोटी काॅलोनी की सी-टाइप और डी-टाइप काॅलोनी टिहरी कोटी काॅलोनी की सी-टाइप और डी-टाइप काॅलोनी Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, December 05, 2018 Rating: 5

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