बात- बात में इतना आधी रात का तेल क्यों जलता है

चुनावी नतीजों की तैयारी के सिलसिले में कुछ एंकरों के ट्विट पर नज़र पड़ी। उनमें देर रात तक हाड़तोड़ मेहनत के लिए burning midnight oil का इस्तमाल हुआ था। दो तीन अलग अलग लोगों ने इस वाक्यांश का प्रयोग किया तो बात दिमाग़ में अटक गई। अंग्रेज़ी भाषी क्या आधी रात का तेल जलाए अपनी मेहनत को व्यक्त ही नहीं कर सकते? रात को मेहनत की कई परिस्थितियाँ होती होंगी लेकिन हर बात को burning midnight oil के सहारे ही क्यों कहते है? कोई बल्ब जलाए रखता होगा, कोई एसी चलाए रखता होगा, कोई रसोई का सारा चीनी खा जाता होगा,कोई फ्रिज में रखा सारा चॉकलेट खा जाता होगा, यह सब सधाते हुए, हज़म करते हुए भी तो हम देर रात की मेहनत को या रतजगा को व्यक्त कर सकते हैं?
बार बार जाकर पढ़ा। लगा कि किसी ने उन्हें रात को भाषा के उस कमरे में बंद कर दिया है जहाँ आधी रात के बाद का तेल जलता है। जैसे आधी रात से पहले का तेल जलता ही नहीं। जलता है तो उसका संबंध मेहनत से नहीं है। हम सभी में ऐसे भाषाई विकार होते हैं। कोई हम सबकी लिखावट से भी इस तरह का उदाहरण आसानी से निकाल सकता है। फिर भी भाई तू एकाध काम तो आधी रात का तेल जलाए बग़ैर करके दिखा। हिन्दी वाले भी आधी रात के बाद मेहनत करते होंगे, लिखते होंगे तो वे क्या जलाते हैं? घूरा ? अलाव ? लेकिन उससे तो ठिठुरने और आलस्य करने का भाव आता है।
फिर मैं उसी ट्वीटर पर गया। गूगल पर गया। सर्च किया कि ये burning midnight oil कब से शुरू हुआ है? कोई ठोस जवाब नहीं मिला। उस अमरीका में भी लोग ख़ूब इस्तमाल करते हैं जहाँ कई दशकों पहले मिट्टी का तेल मिट गया। बिजली आ गई। जब बिजली आ गई तो आधी रात के बाद तेल क्यों जला रहे हो बे। पका दिया है। बिजली नहीं है तो आधी रात के बाद इंवर्टर जलाओ। कुल मिलाकर इस मुहावरे से चट गया। लगता है मास्टर ने पहले सीखा दिया कि देख तू जब भी रातों को जाग कर दफ्तर या किसी का काम करेगा, काम करे या न करे मगर लिखेगा वही जो सीखा रिया हूँ। 
बात- बात में इतना आधी रात का तेल क्यों जलता है  बात- बात में इतना आधी रात का तेल क्यों जलता है Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, December 13, 2018 Rating: 5

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