कोई झांपू कहे या सुस्त, पीएम मोदी और शाह ने कप्तान को पास किया

चंद्रशेखर पैन्यूली...
उत्तराखंड निकाय चुनाव परिणामों के बाद प्रदेश के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पीठ थपथपाकर पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक संदेश दिया है कि फिलहाल त्रिवेंद्र ही मुखिया बने रहेंगे और जिस तरह निकायों में त्रिवेन्द्र रावत ने अपने चहेतों को टिकट बांटा कुछ न कुछ झलक 2019 में लोकसभा चुनावों में प्रत्याशी चयन पर सीएम की राय पार्टी सुप्रीमो के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सीएम भले ही डोईवाला न जीत सके लेकिनए 5 मेयर समेत सर्वाधिक पालिका, नगर अध्य्क्षों की जीत का श्रेय जरूर उन्हें ही जाता है। कोई उन्हें सुस्त कहे या झांपु, लेकिन पार्टी सुप्रीमो से लेकर जनादेश फिलहाल उन्ही के साथ खड़ा है।

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पीएम मोदी और अमित शाह की नजर में जहां बीजेपी के मैन ऑफ द सीरीज बने हैं, तो उहीं के मंत्री प्रकाश पन्त और सुबोध उनियाल निकाय चुनाव में बीजेपी के मैन ऑफ द मैच रहे हैं, तो मंत्री मदन कौशिक, अरविंद पांडेय, डॉ हरक सिंह रावत का निराशाजनक प्रदर्शन कहीं न कहीं उनके राजनितिक कौशल पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है। वही, बीजेपी के तमाम विधायक जिनमें गणेश जोशी, ऋतू खंडूड़ी, विजय पंवार, धनसिंह नेगी, गोपाल रावत, शक्ति लाल, दलीप रावत आदि का प्रदर्शन निकाय चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन रहा। ये अपने क्षेत्रांे के निकायों में तमाम कोशिशों के बावजूद कमल नहीं खिला सके। 

वहीं, कांग्रेस में भी नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश से लेकर कई बड़े नेता चुनाव में हाथ को आगे नहीं बढ़ा सके। इन निकाय चुनाव में कोटद्वार से अपनी पत्नी हेमलता नेगी को मेयर बनाकर चुनाव जीते पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी कांग्रेस में एक बड़े चेहरे के रूप में अपने को प्रस्तुत करने में सफल रहे। जानकारों की माने तो सुरेंद्र नेगी कांग्रेस की तरफ से 2019 में गढ़वाल लोकसभा से एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में अपनी दावेदारी करेंगे। नेताओं के  भारी दल बदलने से कांग्रेस के पास वैसे भी खांटी नेताओ का टोटा है। ऐसे में यदि सुरेंद्र नेगी प्रत्याशी बनते हैं, तो बीजेपी के मजबूत गढ़ गढ़वाल लोकसभा में वे बीजेपी को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। ये वहीं सुरेन्द्र नेगी हैं, जिन्होंने 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी को हराकर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने का रास्ता साफ किया था। हालांकि 2017 में वे डॉ. हरक सिंह रावत से विधानसभा चुनाव हार गए थे। 
सुरेंद्र सिंह नेगी को 2019 में कांग्रेस से टिकट वॉकओवर मिले इसके आसार कम ही हैं। क्योंकि बीकेटीसी के अध्य्क्ष और श्रीनगर, थलीसैण के पूर्व विधायक गणेश गोदियाल भी लोकसभ का टिकट चाहते हैं। 2002 में थलीसैण से पूर्व सीएम एवं तत्कालीन मंत्री और बीजेपी के दिग्गज  रमेश पोखरियाल निशंक को हराकर प्रदेश में सुर्खियां बटोरी थी। वहीं, बद्रीनाथ, नंदप्रयाग के पूर्व विधायक, मंत्री राजेन्द्र भंडारी भी कांग्रेस से सांसदी का टिकट चाहते हैं। अब सांसदी का टिकट किसे मिलता है ये तो समय बताएगा लेकिन, कोटद्वार में अपने कार्यकाल में किये विकास कार्यों और लोगों के बीच सुलभता ने सुरेन्द्र नेगी की लोकप्रियता जरूर बढ़ी है। 

इस निकाय चुनाव में बीजेपी में कई विधायकों के खराब प्रदर्शन का पार्टी को जरूर गहरा मंथन करना होगा,साथ ही कांग्रेस को भी जनता के बीच खोये विश्वास को हासिल करने हेतु आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। बीजेपी जहां अपने ओवरऑल प्रदर्शन से खुश है, तो कांग्रेस भी कई सभासदों और कुछ अध्य्क्ष की कुर्सी पाकर अपनी पीठ थपथपा रही है। इन निकाय चुनावों ने क्षेत्रीय दल यूकेडी के लिए एक बड़ी चिंता जरूर पैदा की हैै। क्षेत्रीय पार्टी का निराशाजनक प्रदर्शन उनके केन्द्रीय नेतृत्व पर भी प्रश्रचिन्ह खड़ा करता है कि तमाम हार के वावजूद यूकेडी में एक नयी धार क्यों नही आ रही है, क्यों यूकेडी कमजोर होती जा रही हैै

सपा, बसपा, आप को भी जनता ने प्रदेश में कोई खास तवज्जो नहीं दी। बीजेपी प्रदेश अध्य्क्ष अजय भट्ट की बात करें तो जहां अजय भट्ट 2019 में नैनीताल से लोकसभा जाने को तैयार हैं। वहीं, रानीखेत ने निकाय में भी पार्टी की हार ने उनको झटका दिया है। अजय भट्ट वो नेता हैं जो मोदी लहर के बावजूद 2017 में रानीखेत से विधानसभा का चुनाव हार गए थे। यदि अजय भट्ट उस वक्त चुनाव जीत जाते तो शायद सीएम के लिए भी उनके नाम पर विचार विमर्श हाईकमान जरूर करती। अब लोकसभा 2019 से पहले निकाय में फिर से रानीखेत से मिला झटका उनके लिए कैसा रहेगा ये वक्त ही तय करेगा। निकाय चुनाव राजनितिक दलों और कई नेताओं के लिए कड़वे अनुभव लेकर आये तो सीएम त्रिवेंद्र रावत समेत प्रदेश के कुछ नेताओं के कद को जरूर बड़ा कर गये।
कोई झांपू कहे या सुस्त, पीएम मोदी और शाह ने कप्तान को पास किया कोई झांपू कहे या सुस्त, पीएम मोदी और शाह ने कप्तान को पास किया Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, November 22, 2018 Rating: 5

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