बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता धूम सिंह नेगी को जमना लाल बजाज पुरस्कार: जरूर पढ़ें निट्ठला चिंतन

देहरादू...
टिहरी के सर्वोदयी, गांधीवादी नेता, बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता 75 वर्षीय धूम सिंह नेगी को जमनालाल बजाज पुरस्कार का दिया जाना न केवल एक अच्छी खबर है, बल्कि हताशा में डूब रहे उत्तराखंड को एक रास्ता भी दिखाती है। धूम सिंह नेगी के साथ एक अच्छी बात यह भी रही है कि वह सर्वोदय और गांधीवादी नेता तो हैं ही, लेकिन टिहरी बांध के विरुद्ध संघर्ष में जिस प्रकार की संघर्ष धारा का चयन उन्होंने किया, वह उन्हें सर्वोदय आंदोलन से थोड़ा आगे करता है। धूम सिंह नगी क्षेत्र में अनेकानेक जन आंदोलनकारियों के आदर्श भी हैं ।

थोड़ा देरी से मिले इस ख्यातिलब्ध पुरस्कार से जनसरोकारों का उत्तराखंड गौरवान्वित महसूस करता है। निर्माण के 18 साल बाद कथित कागजी विकास से उपजी हताशा के सागर में जब उत्तराखंड गोते खा रहा हो, तब उत्तराखंड के विकास के लिए एक दूरगामी जन विकास नीति की आवश्यकता बड़ी शिद्दत से महसूस की जा रही है। जो उत्तराखंड, खासकर पर्वतीय क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखकर बनाई गई विकास नीति हो, जो उत्तराखंड के गांव में, जंगलों में फिर से एक विश्वास और खुशहाली ला सके जन विकास नीति का यह ड्राफ्ट उत्तराखंड के सब संसाधनों को शामिल कर आगामी 20 सालों में उत्तराखंड के विकास की क्या वास्तविक जरूरत है, विकास की क्या सही जन नीति है, उस पर आधारित होनी चाहिए। ऐसा विकास माड़ल जो स्वतः स्फूर्त हो, यह माडल जमीनी विशेषज्ञों की राय के बाद निर्धारित हो और जनता उसे इस प्रकार स्वीकार कर ले कि सरकारें भले ही बदल जाएं, लेकिन विकास का वह खाका ना बदले। उससे विमुख होकर उत्तराखंड को प्रयोगशाला बनाए जाने का साहस कथित सरकारों में ना हो...।

ऐसी टिकाऊ विकास नी सस्टेंनबल विकास नीति कहा जाता है। इस नीति को तैयार करना आज के उत्तराखंड की सबसे बड़ी जरूरत है। नौकरशाहों और नाबार्ड द्वारा निर्धारित विकास की नीति, उत्तराखंड के लिए कारगर नहीं हो सकती। उत्तराखंड के लिए कारगर नीति का एक मॉडल पड़ोसी हिमाचल में यशवंत परमार की मेहनत का मॉडल हो सकता है या इसकी प्रेरणा कश्मीर में जैन-उल-आब्दीन का वह मॉडल हो सकता है, जिसमें उसने अपने राज्य के काश्तकारों को हस्तशिल्पी में परिवर्तित कर, विदशों से ट्रेनिंग देकर, पेपर मैशे और शाॅल को कश्मीरी अर्थव्यवस्था की पहचान बना दिया...।

स्थाई जन विकास नीति -2040 को तैयार करने का समय आ गया है। जमीनी विशेषज्ञों की सहायता से इसे तैयार किया जाना है...। कृषि और बागवानी पर डा. महेंद्र कुंवर आदि, शिक्षा पर अनिल सदगोपन एकलब्य, समेकित विकास पर केरल का अनुभव, उर्जा, पर्यटन, गांव समाज सब को साथ लेकर, बड़ा रिसर्च वर्क कर, पहाड़ो में मुस्कान वापस लाने का सपना भी सच कर दिखाना है...। इस मौके पर डा. चन्द्रेश शास्त्री को बहुत मिस करते हंै। टीम पलायन एक चिंतन और रतन सिंह असवाल की कोशिश भी इस दिशा में महत्वपूर्ण है।
 
...निट्ठला चिन्तन
                                                                                    ...पी.के शाह
बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता धूम सिंह नेगी को जमना लाल बजाज पुरस्कार: जरूर पढ़ें निट्ठला चिंतन बीज बचाओ आंदोलन के प्रणेता धूम सिंह नेगी को जमना लाल बजाज पुरस्कार: जरूर पढ़ें निट्ठला चिंतन Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, November 17, 2018 Rating: 5

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