इस साल नहीं दिया जाएगा साहित्य का नोबल पुरस्कार, पुरस्कारों की घोषण शुरू

-कैंसर थेरेपी की खोज के लिए संयुक्त रूप से जेम्स एलिसन और तासुकू हॉन्जो को नोबल

नई दिल्ली: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार नोबल की घोषणाओं का दौर शुरू हो गया है. इस वर्ष यानि 2018 के लिए मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है. नोबेल पुरस्कार नेगेटिव इम्यून रेग्यूलेशन के इनहिबिशन के जरिये कैंसर थेरेपी की खोज के लिए संयुक्त रूप से जेम्स एलिसन तथा तासुकू हॉन्जो को दिया गया. दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार यह माना जाता है. हालांकि इस बार साहित्य का नोबल पुरस्कार किसी को न देने का फैसला हुआ है. 

दरअसल, सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े ज्यां-क्लाउड अर्नोल्ट के यौन उत्पीड़न के आरोप में फंसने पर उपजे विवाद को देखते हुए नोबल पुरस्कार बांटने वाली एकेडमी ने इस बार साहित्य का पुरस्कार न देने का फैसला किया है. आज चिकित्सा के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा के साथ इस प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह की शुरुआत हो गई है. हालांकि, इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिए जाने का फैसला किया गया है. 

पिछले 70 साल में पहली बार ऐसा है कि साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाएगा.हालांकि हर बार की तरह इस बार भी चिकित्सा, भौतिकी, रसायन, शांति और अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पात्रों को दिया जाएगा. मेडिसिन के नोबल पुरस्कार की घोषणा के बाद शांति के नोबल पुरस्कार पर लोगों की निगाह टिकी है.शांति के नोबल की घोषणा ओस्लो में होगी. बता दें कि डायनामाइट के आविष्कारक एल्फ्रेड नोबेल की याद में हर वर्ष नोबेल पुरस्कार अवॉर्ड दिया जाता है.

स्वीडिश अकादमी की एक पूर्व सदस्या के पति फ्रांसीसी फोटोग्राफर ज्यां क्लाउड अर्नाल्ट पर कथित यौन-दुराचार का आरोप है. इसको देखते हुए अकादमी ने इस साल साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं देने की घोषणा की है. अकादमी ने कहा है कि वो 2018 के विजेताओं की घोषणा 2019 के विजेता के साथ ही करेगी. साल 1901 से दिए जा रहे इन पुरस्कारों में अभी तक का ये सबसे बड़ा मामला है. अकादमी के कुछ सदस्यों की दलील है कि परंपरा को बनाए रखने के लिए पुरस्कार दिए जाने चाहिए, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि अकादमी इस स्थिति में नहीं है कि वो अवॉर्ड का फैसला ले सके.

ये है मामला
पिछले साल नवंबर में रुडमज्वव कैंपेन से प्रेरित होकर 18 महिलाओं ने अर्नाल्ट पर यौन-शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगाया था. हालांकि अर्नाल्ट ने इन सभी आरोपों से साफ इनकार किया है. उस वक्त संस्था ने अर्नाल्ट की पत्नी लेखिका कटरीना फ्रोसटेंसन को निकाले जाने के खिलाफ वोट किया था. लाभ के पद का फायदा उठाने के आरोप और नोबेल पुरस्कारों के विजेताओं के नामों के लीक हो जाने की बात पर अकादमी बंट गई. इसके बाद इस्तीफों का दौर शुरू हुआ. जिसमें फ्रोस्टेंशन और अकादमी की प्रमुख प्रोफेसर सारा डेनियस का नाम भी शामिल है. अब इसमें सिर्फ 11 सदस्य ही बने हुए हैं. जिनमें से केरस्टिन एकमैन 1989 से निष्क्रिय हैं.

2019 मे होगा फैसला
अकादमी के अनुसार अब साल 2019 में अकादमी पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी. हालांकि ये पहली बार नहीं है. इससे पहले 1936 में भी पुरस्कार नहीं दिए गए थे लेकिन उस साल का पुरस्कार एक साल बाद इयुगेन ओश्नील को दिया गया. इससे पहले अकादमी ने एक बयान जारी करते हुए कहा था कि नोबेल पुरस्कारों के सम्मान को इससे गहरा आघात पहुंचा है. उन्होंने वादा किया कि ये सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है अकादमी में लोगों का भरोसा बना रहे.
इस साल नहीं दिया जाएगा साहित्य का नोबल पुरस्कार, पुरस्कारों की घोषण शुरू इस साल नहीं दिया जाएगा साहित्य का नोबल पुरस्कार, पुरस्कारों की घोषण शुरू Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, October 01, 2018 Rating: 5

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