पहाड़ समाचार.com : आओ रवांई को जानें भाग-9- देवता अर त्यूंकि मान्यता

प्रदीप रावत (रवांल्‍टा)
तण त सैयदा उत्तराखंड लि बोलुं देवभूमि, पर आमर रवांई की छुंई किछी ओठाइ। जेख तांई रवांई की छुईं सि एणंगी कि आमर रवांई एक हिसाब किनी बोता बड़ु बि अर ना बि, पर आमरी संस्कृति, रति-रिवाज, सामाजिक जीवन अर धार्मिक मान्यता सैयदा उत्तराखंड किनी छांटड़ी आर बडडी बि। ज आम रवांई क बंटवार क हिसाब किनी हेरुं त, दस-दस फलागिंयों फांडी बदले पाणी अर वाणी। रीति-रिवाज भी तंण्या बदलियुं, पर सि एई गांव अर तेइ गां क मिलद-जुलद रौं। 

जण-जणीं जाग बदले, तणंग्या त्युं जागु क देवता भी छांटड़। एक बात सबतंणी एका अनारी सि, पंडौं कु ओतार। बस कंणीक पूजा-पाट छांटड़ु र बस। भौं कोइज गां नौउ, गां पौंछदु-पौंछदु कुजाण कति मेसी क देवताऊं क चोखट्या अर मंदिर देखियुं। डोखरु-डोखरु फुंड रौं रथ देवता, हंत्याऊं क मंदिर अर मांड्या। सबु गां क सबु जंगलु फुंड कोई ना कोई देवता कु मंदिर जरूर मिललु। जति खाव, गडार, जति बण, जति डांड-कांठ तति देवता आमर रवांई मां। 
देवताऊं कु पांणी, देवता कु डोखरु, देवता कु बुट (पेड़), देवता कु डाक, देवता कु कुड़ु, देवता कु कोठार, देवता कु खऊ। येंणु ना कि युंक बस नऊं हल धरीं। युंकि पूजा बि करुं लोक। सबु लौड-बड़ु गां कु कोई ना कोई देवता जरूर आपड़ु। कोई देवता येंणु, जु 12 अर 20 गांवों कु र साजु। जति गां कु देवता तति जातरा अर त्यार-बार बि बणुं। देवतौं की मान्यता बि तंण्या। लोक होयकाण्यां मानुं आपड़ देवताऊं। 

मुई एक बार पैली बि लेखि तु कि आमर तिरा ज कतरईं कोई दुख-असूक ह त अस्पताल पाछा नऊं, अगणी देवता बिड़ी नऊं पुछाण लि। जु आमर लोकदेवता सु आफुई छांण आपुलि माली या पासवा तैलि ओतारिया बि बोलुं। लोक अपड़ा कुल देवताऊं बिड़ सुंणाऊं आपड़ी दुख-विपदा। त्युं मां लाऊं खरी। देवता क बोलि किनी ज परचु मिल, त लोक देवता की पूजा दियुं करी। दोष-दाव र ज कोईकु त देवता तेइ बि दे बताई। सि आमरी आस्था आपड़ देवताऊं फांडी। 

जेख तांई देवताऊं की छुंई त, आमर रवांई घाटी मां तीन विकास खंड नौगांव, पुरोला अर मोरी। तिनु विकास खंडु मां माहसु देवता की सबसे बोतड़ी मान्यता, पंडौं की सराद सबु जागा दिए। किछी रथ, वीर-बेताल अर हंत्याऊं कि पूजा बि ह। आपड़ गां क आपड़-आपड़ ईष्ट देवता अर लोकर आपड़-आपड़ कुलदेवता बि रौं। एतरा जमानु बदलिनी त, श्रद्धा अर आस्था बि बदलिनी। नया जमान क छोरा युं बिसरण क सात आपड़ी सस्कृति बि बिसरण लगीं। कालिकि युं देवताऊं किनी आमरी आस्था अर संस्कृति बि बचीं। तेइकु सबसे कड़ु कारण यु कि देवताऊं क बान आमर गां फुंड मेल-थौल बाजुं। त्युं किनी आमर रीति-रिवाज अर औठा चिजा बि। 

पहाड़ समाचार.com : आओ रवांई को जानें भाग-9- देवता अर त्यूंकि मान्यता पहाड़ समाचार.com : आओ रवांई को जानें भाग-9- देवता अर त्यूंकि  मान्यता Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, October 04, 2018 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.