सीएम साहब : 80 हजार करोड़ नहीं, बस 80 हजार इन्वेस्ट कर दीजिए, बच्चों का भविष्य संवर जाएगा

पहाड़ समाचार.com
चंद्रशेखर पैन्यूली...
सरकार का दावा है कि अब तक 80 हजार करोड़ का इन्वेस्टमेंट के एमओयू साइन हो चुके हैं। अच्छी बात है। इससे प्रदेश का ही भला होगा, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि कहीं एमओयू साइन किसी हस्ताक्षर अभियान की तरह केवल हस्ताक्षार तक ही सीमित ना रह जाएं। सरकार जहां एक ओर इन्वेस्टर समिट के लिए पूरा जोर लगाये हैं, वहीं, दूसरी तरफ राज्य की मूलभूत सुविधाओं के लिए राज्य के लोग हर रोह अपना खून-पसीना इन्वेस्ट कर रहे हैं। लोगों को छोटी-छोटी चीजों के लिए जूझना पड़ रहा है। 

सरकारी स्कूल सरकार बन्द कर रही है, सड़कों के गड्ढे सभी को परेशान कर रहे हैं, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है और पहाडों के हालात तो विकटता के अंतिम छोर पर पहुंच चुके हैं। जहां से उनको फिर से उनके मूल में लाने के लिए किसी को भगीरथ बनना होगा, लेकिन जिस तरह से राज्य बनने के बाद हुआ। हर किसी ने खुद के लिए संसाधन जुटाने और हर पांच साल में कमाई में 100 प्रतिशत तक करने के लिए भगीरथ प्रयास किए। राज्य के संसाधानों को लुटाने के लिए भगीरथ प्रयास किए। 

हाल पूरे प्रदेश के बदहाल हैं...फिलहाल आपको घनसाली विधानक्षेत्र के बाल गंगा तहसील के सुदूरवर्ती भीमलेत गांव की ओर लिए चलता हूं। गांव में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन निर्माण न होने और निकट के राइका रगड़ी में शिक्षकों की भारी कमी के बारे में बात बताने जा रहा हूं। 

भिमलेत गांव आरगढ़ पट्टी का दूरस्थ गांव है। यहां ब्राह्मण, राजपूत और अनुसूचित जाति के लोग मिलकर रहते हैं, लेकिन इस गांव में प्राथमिक विद्यालय तक नही है, जो आज की 21वीं सदी में सरकार के लिए एक शर्मनाक बात है। गांव के पूर्व प्रधान लक्ष्मी प्रसाद रतूड़ी जी बताते हैं कि उन्होंने निचले स्तर से लेकर सचिव स्तर तक के  अधिकारियों तक हर जगह ये बात मौखिक और लिखित रूप में रखी है, फिर भी गांव की इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय को भी गांव की इस समस्या से अवगत कराया पर कुछ भी फायदा नही हुआ, जिस कारण गांव के बच्चों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय विधायक समेत कई जन प्रतिनिधियों के सम्मुख भी इस समस्या को वे रख चुके हैं। उन्होंने बताया कि राइंका रगड़ी में प्रवक्ता, सहित सहायक अद्यापक और अन्य स्टाफ के लिए वे शासन प्रसाशन से इस सम्बन्ध में कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन इस समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ।

इस कारण भिमलेत, रगड़ी, म्यार, घंड्योड़ सहित  घैरका के नौनिहालों को निकट के राइंका होने के बावजूद दूर जाना पड़ता है। बताते चलें कि राइका रगड़ी पूर्व विधायक भीमलाल आर्य जी द्वारा हरीश रावत  सरकार में हाई स्कूल से इंटर कॉलेज में तब्दील किया गया, लेकिन न तो यहां शिक्षक पहुंचे और न ही बिल्डिंग बनी, हैरान करने वाली बात ये भी है कि ये स्कूल पूर्व विधायक भीमलाल जी के गांव के पास ही स्थित है और भिमलेत गांव भी पूर्व विधायक के रगड़ी  गांव के ठीक ऊपर है।
सरकार को जरूर इन पहाड़ी स्कूलों, जहां कम से कम अभी लोग मौजूद हैं और स्कूल में बच्चे भी हैं, वहां भवन, स्टाफ की जल्द व्यवस्था करनी चाहिए। सिर्फ स्कूल बंद करने की न सोचें सरकार, लोगों द्वारा उठाई जा रही इन समस्याओं के निराकरण के लिए तत्काल कदम उठायें। 

सामाजिक कार्यकर्ता और  भिमलेत के पूर्व युवा प्रधान लक्ष्मी प्रसाद लगातार इन समस्यओं को उठाते आ रहे हैं, लक्ष्मी प्रसाद ने काफी दौड़ धूप कर अपने  दूरस्थ गांव भिमलेत तक सड़क भी पहुंचाई है। सरकार को जरूर ऐसे लोगों की मांगों का निराकरण करना चाहिए, क्योंकि दूरस्थ क्षेत्रों में पहले ही वीरानी छा चुकी है और ऐसे अलख जगाने वाले लक्ष्मी हर जगह नहीं होते, क्षेत्रीय विधायक शक्ति लाल शाह सहित मुख्यमंत्री महोदय से आग्रह है कि दूरस्थ गांव भिमलेत में स्कूल निर्माण और राइका रगड़ी के शिक्षकों और अन्य स्टॉफ की समस्याओं का जल्द निराकरण करें। लल्द नहीं जोग तो मजबूरन लोगों को पलायन करना पड़ेगा। सवाल यही है कि अगर सरकार अपना थोड़ा सा ही वक्त इन समस्याओं पर इन्वेस्ट कर दे, तो बहुत कुछ हो सकता है। एक और गांव विरान होने से बच सकता है।
सीएम साहब : 80 हजार करोड़ नहीं, बस 80 हजार इन्वेस्ट कर दीजिए, बच्चों का भविष्य संवर जाएगा सीएम साहब : 80 हजार करोड़ नहीं, बस 80 हजार इन्वेस्ट कर दीजिए, बच्चों का भविष्य संवर जाएगा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, October 02, 2018 Rating: 5

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