जरूर पढ़ें...बागियों को कुर्सी का एनस्थीसिया : पहाड़ समाचार

 देहरादून...
...इन दिनों नगर निकाय चुनावों का संग्राम अपने चरम की ओर है। चुनावी दंगल में मलयुद्ध कर रहे पहलवानों को दांव-पेच लगाते हुए देखा जा रहा है। तरह-तरह के दांव-पेंच लगाए जा रहे हैं। हर कोई जिताऊ दांव लगाकर कुर्सी अपने नाम कर लेना चाहता है। सियासी दंगल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर का दिख रहा है। इस दंगल में खिलाड़ी भी तगड़े माने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि दोनों में बराबर की टक्कर है। टक्कर को और मजबूत बनाने के लिए जबरदस्त चालों का दौर भी जारी है। कुछ ऐसी चालें चली गई हैं, जिनमें से किसी को 2022 तक की बेहोशी का इंजेक्शन कांग्रेस की और से दिया गया है, तो भाजपा ने चुनाव के बाद राज्य मंत्री के दर्जे का भारी बोझ बंदों के कंधों पर देने का दांव लगाया गया है। इन्हीं दांव-पेंचों पर सीनियर जर्नलिस्ट मनोज लोहनी ने एक शानदार सीधा और टेढ़ा आर्टिकल लिखा है। 

मनोज लोहनी...
नगर निगम चुनाव में बगावत करने वाले पार्टी के लोग अब सपनों की गहरी नींद में है। राज्य मंत्री बनने वाले कुछ महीनों की नींद में हैं। कांग्रेस में वक्त थोड़ा लंबा है, विधानसभा चुनाव 2022 में होंगे। लिहाजा एनस्थीसिया 2022 तक का। भाजपाई बागियों की नींद तब खुलेगी जब सरकार तोहफा देगी, जिसका फिलहाल वह सपना देख रहे हैं। जाहिर है इंजेक्शन तगड़े लगे हैं, तभी तो अब काफी कुछ शांत दिखता है। 
कई ऐसे भी हैं जिन्हें इंजेक्शन का असर नहीं हुआ, वह रण में हैं। इधर पिछले दिनों तक कोहराम जैसा था, भगदड़, यहां से वहां जाने, रण पर उतरने के लिए। मगर अब सब तरफ शांति है। रण उतरने वाले रण छोड़ रहे हैं। कुर्सी का यह एनस्थीसिया पूरे प्रदेश में बागियों को दिया गया है। कई जगह पार्टी के कुशल डॉक्टर बागियों को बेहोशी देने में कामयाब रहे, कई जगह कामयाबी नहीं मिल पाई।

सपनों की नींद में पार्टी के साथ नींद में चल रहे बागी हाथ उठा रहे हैं, नारेबाजी भी है, मगर उनके मन में क्या है यह पता नहीं। इतना जरूर है कि जब उनकी नींद खुलेगी और अगर सपना टूट गया तो फिर 2022  में एक बार फिर बागियों के रथ यहां वहां दौड़ते दिखेंगे, इस बार से ज्यादा तेजी से। नींद में कुछ बड़बड़ा रहे बागी बार-बार अपने मन की बात निकाल रहे हैं, जैसा बेहोशी की हालत में होता है। 

होता यह है कि मन के भीतर की बात सामने नहीं निकलती, मगर सब-कांशियस माइंड में रही बात मुंह से निकल जाती है। ऐसा हो भी रहा है, लिहाजा अब नए लालबत्तीधारियों, भावी विधायकों की एक नई पांत फिर तैयार है। मग फिलवक्त वह मीठी नींद में हैं। इंतजार करें, वक्त का, देखें सपना देखने वालों को...उधर चुनाव जोर पकड़ रहा है, नींद में साथ चलते हुए बागियों के साथ...।

जरूर पढ़ें...बागियों को कुर्सी का एनस्थीसिया : पहाड़ समाचार जरूर पढ़ें...बागियों को कुर्सी का एनस्थीसिया : पहाड़ समाचार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, October 29, 2018 Rating: 5

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