आंखें खोलता...अंधा युग

आंखें खोलता...अंधा युग
अंधा युग उस नाटक का नाम है, जिसे धर्मवीर भारती ने कई साल पहले लिखा, लेकिन नाटक का महत्व आज भी है। बल्कि यूं कहें कि उसकी प्रासंगिकता आज ज्यादा है। नाटक का मंचन रुद्रपुर शैलनेट के साथी बखूबी कर रहे हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है कि रुद्रपुर के साथ रुपेश दा, सुनील पंत, अपर्णा सिंह, मनोज जैसे लोग समाज की सोती चेतना को जगाने का काम कर रहे हैं। लोग नाटक करने वालों को कलाकार मानते हैं, लेकिन ये पूरी टीम मंझे हुए थिएटर के कलाकार तो हैं ही, उससे अधिक चिंतक भी हैं। नाटक के मंचन का महत्व भी इसी कारण अधिक है कि इसका मंचन कलाकार ही नहीं चिंतक भी कर रहे हैं।
जिस शानदार अंदाज में रुपेश कुमार और उनकी टीम के सभी साथी पिछले कई दिनों से लगातार रुद्रपुर में अंधा युग नाटक का मंचन कर रहे हैं, वह सराहनीय है। मुझे उम्मीद है कि, जिस तरह से ये पूरी टीम क्षेत्र और समाज के लोगों को जागरूकर करने का काम कर रहे हैं। वह आजके दौर में बहुत आवश्यक है।
नाटक है तो पुराना, लेकिन आज की वर्तमान परिस्थियों को दर्शाता है। आज राजनीति बिल्कुल उसी तरह से हो रही है या की जा रही है, जैसा महाभारत काल में हुआ था। लोग आंखों से तो देख सकते हैं, लेकिन मानसिक रूप से पूरी तरह से अंधे हो चुके हैं। किसी को कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा। यह नाटक उन लोगों को जगाने के लिए भी जरूरी है, जिनकी आंखें और मानसिकता सबकुछ देख तो पा रही हैं, लेकिन अंधभक्ति में डूबे लोग देखने के बाद भी चीजों को अनदेखा कर रहे हैं।
इस टीम के लिए यह कोई पहला मौका नहीं कि यह इस तरह का आयोजन कर रहे हों। इससे पहले तराई में सामाजिक चेतना यात्रा निकाल चुके हैं। पंचायत में पांचाली नाटक को भी कई मंचों पर मंचित किया। अपनी कड़ी मेहनत और कीतमी समय का कैसे सदुपयोग किया जा सकता है। यह इन सब से सीखा जा सकता है। खास बात यह है कि इन आयोजनों के लिए किसी से आर्थिक मदद नहीं लेते। अपनी छोटी-छोटी बचतों से सहयोग जुटाते हैं और जुट जाते हैं एक नए मिशन पर। मिशन से एक बात और याद आई। इसी टीम और इससे जुड़े दूसरे लोगों ने दिनेशपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई बर्बाद हो चुका तालाबों को भी पुनर्जीवित किया था। उम्मीद करता हूं साथी यूं ही चलते जाएंगे और आगे बढ़ते रहेंगे। 
सभी साथियों को क्रांति के लिए बधाई और सुभकामनाओं के साथ मेरा सलाम...
...प्रदीप रावत (रवांल्टा)






आंखें खोलता...अंधा युग आंखें खोलता...अंधा युग Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, May 15, 2018 Rating: 5

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