बड़ी खबर: राहत-बचाव कार्य में जुटा हेलीकाॅटर दुर्घटनाग्रस्त, तीन लोगों के लापता होने की खबर

देहरादून: मोरी-आराकोट क्षेत्र में राहत सामग्री छोड़कर वापस लौट रहा हेलकाॅप्टर क्रैश हो गया है। बताया जा रहा है कि अस हेलीकाॅप्टर में तीन लोग सवार थे। तीनों ही लापता बताये जा रहे हैं। आराकोट से पांच किलोमीटर दूर माल्तड़ी के पास दपहाड़ी से टकराने को दुर्घटना का कारण बताया जा रहा है। जिसके बाद वो क्रैश हो गया। घटना ती जानकारी मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। पायलट राजपाल, को-पायलट कपटल लाल और स्थानीय व्यक्ति रमेश सवार थे। हेलीकाॅप्टर मोलड़ी से आराकोट आ रहा था।
घटना की जानकारी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को फोन से दी गई। जिस वक्त घटना हुई। सीएम एक कार्यक्रम में मौजूद थे। जानकारी के अनुसार हेलीकाॅप्टर  में 2 पायलेट और एक स्थानीय व्यक्ति सवार था। तीनों लोगों को लापता बताया जा रहा है। रेस्क्यू टीम घटना स्थल के लिए हो गई है।
बड़ी खबर: राहत-बचाव कार्य में जुटा हेलीकाॅटर दुर्घटनाग्रस्त, तीन लोगों के लापता होने की खबर बड़ी खबर: राहत-बचाव कार्य में जुटा हेलीकाॅटर दुर्घटनाग्रस्त, तीन लोगों के लापता होने की खबर Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, August 21, 2019 Rating: 5

देवदूत बनी SDRF, गर्भवती महिला को हेलीकॉप्टर से पहुंचाया देहरादून

देहरादून : आपदा प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें शानदार काम कर रही हैं।एसडीआरएफ लोगों को अपने परिवार के सदस्यों की तरह खाना तो खिला ही रही है। साथ ही गांव में फंसे लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचाने का काम भी कर रही हैं। 

अपनी ड्यूटी के साथ ही मानवता के कामों में भी एसडीआरएफ पूरी तत्परता से जुटी हुई है। ऐसे ही एक मिशाल आज एसडीआरएफ ने पेश की। आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में शामिल माकुड़ी गांव की ललिता देवी गर्भवती है। 

उसे अचानक प्रसव पीड़ा हुई, तो एसडीआरएफ के जवानों ने बगैर समय गवाएं चौपर से ललिता देवी को देहरादून पहुंचाकर अस्पताल में भर्ती कराया। एसडीआरएफ ने ना केवल महिला की जान बचाई, बल्कि उनके होने वाले बच्चे की भी जान बचाई। प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ अब तक कई लोगों को राहत शिविरों तक पहुंचा चुकी है।
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आपदा से आराकोट क्षेत्र में 130 करोड़ का नुकसान, आपदा से 51 गांव प्रभावित

देहरादून: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तरकाशी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में दौरा किया ।इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों के लिए तत्काल रहने ,खाने और उनके इलाज की व्यवस्था की जाए ।उसके साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि बिजली पानी और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं का तत्काल उपलब्ध करवाई करवाई जाए ।सीएम ने कहा कि लगभग 52 गांव और तो प्रभावित हुए हैं लगभग 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हुआ है ।



मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक इस आपदा में 15 लोगों की मृत्यु हो चुकी है 6 व्यक्ति लापता है और 8 व्यक्ति घायल हुए हैं मुख्यमंत्री ने कहा कि मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख रुपए से राहत राशि दी गई है। उत्तरकाशी के मोरी तहसील में आई आपदा मैं राहत और बचाव कार्य में 300 कार्मिक खोज बचाव और राहत कार्य में लगे हैं इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन पुलिस एनडीआरएफ एनडीआरएफ आईटीबीपी और वन विभाग के साथ आपदा खोज और बचाव दल भी राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि इस आपदा में 130 करोड़ का नुकसान हुआ है
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VIDEO : लोगों के आंसू पोंछ रही एसडीआरएफ, जवान अपने हाथों से परोस रहे खाना

आराकोट (उत्तरकाशी) : उत्तराखंड की एसडीआरएफ टीम की मेहनत को, साहस को हमारा औऱ पूरे राज्य की जनता की ओर से सलाम है. उत्तरकाशी के मोरी तहसील के आराकोट में आई भयानक आपदा से हाहाकार मचा हुआ है. आराकोट, टिकोची, डोचांग, माकुड़ी, एवम चीवा में मंजर सहमा देने वाला है. अभी तक माकुड़ी से 5, आराकोट से 4 और सनेल व टिकोची से एक-एक शव बरामद हुआ है, जबकि इन गांवों से सात लोग अभी भी लापता चल हैं। एएनआई के अनुसार, मंगलवार को भी एक शव बरामद हुआ है। हालांकि अभी तक प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वहीं इस बीच एसडीआरएफ टीम आपदा पीड़ित लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

एसडीआरएफ ने लोगों के लिए राहत और बचाव कार्य जारी है. उत्तरकाशी के आपदा प्रभावित लोगों के लिए उत्तराखंड पुलिस की एसडीआरएफ टीम मसीहा बनकर आई. उत्तरकाशी में जहां-जहां आपदा का भयानक मंजर है वहां एसडीआरएफ की टीमें रवाना की गई. 2 सहस्त्रधारा हेलीपेड से हेली के माध्यम से, पीने का पानी, आवश्यक दवाइयां औऱ कम्बल एसडीआरएफ की टीम पीड़ितों तक पहुंचा रही है. हेली के माध्यम से कम्बल, मेडिसिन औऱ पानी लोगों तक पहुंचाया गया।

आपको बता दें कि एसडीआऱएफ द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्र आराकोट में भोजन शिविर का आयोजन किया गया. इस शिविर में एसडीआरएफ ने कल शाम 160 ग्रामीणों को भोजन कराया गया साथ ही चीवा में मार्ग अवरुद्ध होने से वैकल्पिक व्यवस्था के लिए वर्मा ब्रिज का निर्माण के लिए एसडीआऱएफ टीम को जवासन चीवा रवाना किया गया जहा रेस्क्यू जारी है.
वहीं आज भी एसडीआऱएफ की टीम ने अराकोट में 35 आपदा पीड़ित लोगों को और 140 अन्य विभाग के लोगों को को राहत शिविर में खाना खिलाया गया.


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आपदा से 13 गांवों में तबाही, 17 लोगों की मौत, 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान, 50 जहार से ज्यादा लोग प्रभावित, 3 गांवों को मदद की दरकार

देहरादून:  आपदा सचिव अमित नेगी ने उत्तरकाशी के आराकोट को लेकर कर पत्रकारों से वार्ता कर मौके हालात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राहत-बचाव के लिए टीमें पहुंच चुकी हैं। नेशनल हाइवे खोल दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी सड़कें खोलना बाकी है। साथ ही संचार सेवाएं भी बहाल की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की मदद के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे हैलीपैड बना रहे हैं।


उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीमों ने काम करना शुरू कर दिया है। आराकोट से 10-10 की रेस्क्यू टीम बनाकर गांवों में भेज रहे हैं। राहत राशन और दवाएं पहुंचायी जा रही हैं। त्यूनी के हेलीपैड को दुरस्त कर लिया गया है, अभी गंभीर रूप से घायल 4 लोगों को देहरादून लाया गया है। पेयजल और यूपीसीएल के अधिकारियों को भी व्यवस्थयें दुरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।  

आईजी पुलिस संजय गुंज्याल ने बताया कि अब तक 10 शवों को निकाल लिया गया है। साथ ही कहा कि अभी संख्या बढ़ सकती है। सीमावर्ती राज्य हिमाचल से भी मदद मांगी गई है। आपदा सचिव ने बताया कि 12 गांव पूर्ण रूप से प्रभावित है। आराकोट में 10 शव नुकाले जा चुके हैं। 6 लोग गायब बताये जा रहे हैं। 3 ऐसे गांव है, जहां मदद नही पहुंच पाई है। 

आपदा सचिव अमित नेगी ने बताया कि राज्यभर में बारिश और अतिवृष्टी से अब तक 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि 3 हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के लिए लगाये गए हैं। जरूरत पड़ने पर और हेलीकाॅप्टर भी मंगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राहत-बचाव कार्य पूरी तेजी से किया जा रहा है। लोगों को हर तरह की सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जिन गांवों मदद नहीं पहुंच पाई है। उन गांवों में लिए टीमें रवाना हो चुकी हैं।

आपदा से 13 गांवों में तबाही, 17 लोगों की मौत, 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान, 50 जहार से ज्यादा लोग प्रभावित, 3 गांवों को मदद की दरकार आपदा से 13 गांवों में तबाही, 17 लोगों की मौत, 100 करोड़ से ज्यादा का नुकसान,  50 जहार से ज्यादा लोग प्रभावित, 3 गांवों को मदद की दरकार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, August 19, 2019 Rating: 5

शर्मनाकः केदारनाथ आपदा में बहुगुणा, मोरी-आराकोट आपदा में त्रिवेंद्र ने भरी दिल्ली की उड़ान

17 लोगों की मौत। पूरा उत्तराखंड सदमें है। लोगों को केदारनाथ का मंजर याद आ रहा है। लोग डरे और सहमे हुए हैं। किसी के घर तबाह हो गए। किसी को पूरा परिवार उजड़ गया। किसी का जिगर का टुकड़े को आपदा ने लील लिया। हर तरफ बस रुदन ही रुदन सुनाई पड़ रहा है। लोगों में चीख-पुकार मची है। लोग इतने सहमे हुए हैं कि वो किसी भी वक्त चिल्ला पड़ रहे हैं। हर कोई उनकी मदद को तैयार है। दिल्ली से मदद उत्तराखंड के लिए रवाना होने को है और मुख्यमंत्री दिल्ली की ओर रवाना हो गए। इससे महान और पुण्य का कार्य भला और क्या हो सकता है कि राज्य में 17 लोगों की मौत हो गई। कई लापता हैं और मुख्यमंत्री दिल्ली यात्रा पर हैं। नंबर जो बढ़ाने हैं। 


ठीक है कि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की तबीयत नासाज है। उनको देखने जाना चाहिए, लेकिन क्या ये यही वक्त था ? राज्य आपदा की मार से कराह रहा है। आपदा से राज्य के 50 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं। हिमाचल से भी मदद मिल रही है। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी पहले कह चुके हैं कि केंद्र सरकार पूरी मदद करेगी। दूसरे राज्य के लोग भी मदद के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्रद सिंह रावत ने संवेदनहीनता की सारे हदें पार कर दी। मोरी, आराकोट, डगोली, टिकोची, दुचाणु, त्यूनी समेत कई जगहों आपदा ने भारी तबाही मचाई है। लेकिन, मुख्यमंत्री 17 लोगों की मौत भुलाकर दिल्ली रवाना हो गये।

हद होती है हर बात की। 17 लोगों की मौत की पुष्टी हो चुकी है। कई लोग अब भी लपता बताए जा रहे हैं। एक अनुमान के तहत मौत का मामला करीब 20 से 25 तक पहुंच सकता है। उन सबकी चिंता छोढ़कर सीएम दिल्ली रवाना हो गए। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली इसीएमओ पर हैं। उनको देखने के लिए भाजपा के कई बड़े नेता हैं। एम्स के बड़े डाॅक्टर हैं। सीएम साबह को अगर नंबा बढ़वाने ही थे, तो आपदा पीड़ितों के लिए अच्छा काम करके भी बढ़वा सकते थे। उन परिवारों का दुख बांटकर लोगों की संवेदनाएं तो मिलती ही। साथ ही कुछ दुवाएं भी मिलती।
शर्मनाकः केदारनाथ आपदा में बहुगुणा, मोरी-आराकोट आपदा में त्रिवेंद्र ने भरी दिल्ली की उड़ान शर्मनाकः केदारनाथ आपदा में बहुगुणा, मोरी-आराकोट आपदा में त्रिवेंद्र ने भरी दिल्ली की उड़ान Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, August 19, 2019 Rating: 5

17 लोगों को लील गई आपदा, कइयों के दबे होने की आशंका, एक दिन बाद पहुंची राहत

आराकोट: मोरी तहसील के आराकोट, डगोली, टिकोची, त्यूनी समेत अन्य क्षेत्रों में हुई भारी तबाही के बाद मौत का आंकड़ा सामने आ गया है। कल तक जो मौम का आंकड़ा 10 था। वो अब बढ़कर 17 हो गया है। राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। मेडीकल से लेकर खाने-रहने की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। घायलों को उपचार के लिए देहरादून लाया गया है। आपदा ने सरकार के क्वीक रिस्पांस सिस्टम की भी पोल खोल कर रख दी। 


आपदा की सूचना घटना की रात को ही जिला प्रशासन को मिल चुकी थी, लेकिन जिला प्रशासन चुप्पी साधे रहा। जब आपदा की भयावहता सोशल मीडिया पर सामने आई। उसके बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। जबकि सरकार को सक्रिय होने में उससे भी ज्यादा समय लगा। इससे सरकार की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। 

आपदा सचिव एसए मुरुगेशन ने बताया कि राहत-बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, वायुसेना, पुलिस और मेडिकल टीमों को बेस कैंप पहुंचा दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में जाने के लिए टीमें बना दी गई हैं। पुलिस के आला अधिकारी और उत्तरकाशी जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंच चुके हैं। 


उन्होंने बताया कि लोगों को मेडीकल सुविधाएं दी जा रही हैं। सबसे पहले घायलों को सही उपचार दिया जाएगा। जो लोग बेघर हो गए हैं। उनके लिए खाने-पीने की सारी सुविधाएं की जा रही हैं। राहत सामग्री मौकों पर पहुंचाई जा रही है। जिन जगहों पर पुल बह गए हैं। फिलहाल त्यूनी और आराकोर्ट के लिए दो वैली ब्रिज भेजे जा रहे हैं। पुल बनने के बाद लोगों को निकाला जाएगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में लोगों को एहतियाह बरतने के लिए कहा गया है।
17 लोगों को लील गई आपदा, कइयों के दबे होने की आशंका, एक दिन बाद पहुंची राहत 17 लोगों को लील गई आपदा, कइयों के दबे होने की आशंका, एक दिन बाद पहुंची राहत  Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, August 19, 2019 Rating: 5

आपदा के हालात पर अनिल बलूनी ने मुख्य सचिव से की बात, कहा : केंद्र सरकार से मिलेगी पूरी मदद

देहरादून : राज्य सभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने उत्तरकाशी और चमोली सहित राज्य के विभिन्न भागों से अतिवृष्टि के आ रहे समाचारों पर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह से राज्य में हो रही अतिवृष्टि और आपदा के संबंध में दूरभाष पर जानकारी मांगी।


उन्होंने कहा की प्रदेश सरकार से जो भी सहयोग केंद्र से मांगा जाएगा वह प्रदान किया जाएगा। सोशल मीडिया में चल रहे आपदा के समाचार और अपलोड वीडियो बेहद भयावह और डरावने हैं, ऐसी स्थिति में सबसे पहली प्राथमिकता जन धन और पशुधन की की रक्षा करना आवश्यक है। उत्तराखण्ड में बरसात के समय नालों का उफान नदियों का जलस्तर बढ़ना और बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।कुछ वर्षों से अनेक हृदय विदारक घटनाएं घट रही है।

बलूनी ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव से जानकारी मांगी है कि वर्तमान हालात में केंद्र सरकार की क्या सहायता राज्य को चाहिए। वह तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मौसम के आंकलन और नदियों के स्वभाव व जल स्तर के आधार पर अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि नदी और नालों के किनारे रहने वाली आबादी को समय समय पूर्व सूचित किया जा सके और महत्वपूर्ण जन जीवन की रक्षा हो सके।



आपदा के हालात पर अनिल बलूनी ने मुख्य सचिव से की बात, कहा : केंद्र सरकार से मिलेगी पूरी मदद आपदा के हालात पर अनिल बलूनी ने मुख्य सचिव से की बात, कहा : केंद्र सरकार से मिलेगी पूरी मदद Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, August 18, 2019 Rating: 5

1970 में भी आई थी भीषण आपदा, पूरे बंगाण क्षेत्र में हर तरफ तबाही का मंजर

त्यूनी: त्यूनी आराकोट में आज भयंकर बाढ़ से लोग सहमे हुए हैं। मोरी से लगे दुचाणु से लेकर आरोकोट, त्यूनी तक हर तरह तबाही का मंजर नजर आ रहा है। नदी इस तरह खतरनाक हो चुकी है कि नदी तल से कई फीट ऊपर बने पुल को बाढ़ का पानी छू रहा है। त्यूनी बाजार से 35 परिवारों को खाली करा दिया गया है। त्यूनी खेल मैदान और हेलीपैड तक पानी भर गया। इसके अलावा क्षेत्र में 15 घरों के बहने और कम से कम 10 लोगों के मरने की खबर सामने आ रही है। लोगों ने पूरी रात जागकर काटी। 


जानकारी के अनुसार 1970 में त्यूनी में इसी तरह की भीषण बाढ़ आई थी। तब भी बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। देर रात ये हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर खतरे के हर निशान को पार कर गया है। क्षेत्र में नदी पर बने कई पुलों को नदी अपने साथ बहा ले गई। जबकि मुख्य पुल को नदी का जलस्तर छू रहा है। 


देर रात से हुई बारिश के कारण आराकोट के टिकोची, दुचाणू समेत कई क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है। स्थानीय ग्रामीण एमएस रावत ने बताया कि क्षेत्र में भारी तबाही हुई है। लोगों को बहुत नुकसान हुआ है। कई लोग मलबे में दब गए, जबकि कई लोगों को अब तक पता ही नहीं चल पाया है। लोगों के घर भूस्खलन के कारण तबाह हो गए हैं। जिसके चलते जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। लोग डरे और सहमे हुए हैं।

1970 में भी आई थी भीषण आपदा, पूरे बंगाण क्षेत्र में हर तरफ तबाही का मंजर 1970 में भी आई थी भीषण आपदा, पूरे बंगाण क्षेत्र में हर तरफ तबाही का मंजर Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, August 18, 2019 Rating: 5

माकुड़ी में फटा बादल, पांच के मरने की खबर, यमुना और टौंस घाटी में बारिश का कहर

उत्तरकाशी: जिले के मोरी विकासखंड के आराकोट क्षेत्र में बारिश ने जमकर तांडव मचाया है। अब तक की जानकारी के अनुसार आराकोट और माकुड़ी गांव में भारी बारिश के दौरान बरसाती नाले उफान पर आ गए। माकुड़ी गांव में भूस्खलन में पांच लोगों दफन होने की खबर आ रही है। आधा दर्जन से अधिक गांव के लोग जंगल की ओर सुरक्षित स्थानों की तरफ गए। गावों में अब तक राहत दल नहीं पहुंच पाया।


उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लाक के आराकोट में बड़े पैमाने में नुकसान की खबर है। अभी तक तीन लोगों के मलबे में दफन होने की सूचना है। एक बच्चे के नाले में बहने की सूचना है। आराकोट में बारिश के दौरान नालों के उफान में एक बच्चा बह गया। हिमाचल से आने वाली और टौंस में भारी उफान से तबाही है। 

आरोकोट क्षेत्र के ग्राम माकुड़ी में बादल फटने से कुछ लोगों के दबे होने की सूचना, टीकोची का आधा बाजार बहने और कुछ लोगों के भी बहने की सूचना है। साथ ही आरोकोट बाजार से भी तीन लोगों के बहने की सूचना है। लगातार हो रही बारिश से पव्वर नदी और टौंस नदी अत्यधिक उफान पर हैं। अत्यधिक पानी बढ़ने से आरोकोट बाजार और त्युणी बाजार खाली करवा दिये गये हैं। दुचाणु में भी बादल फटने की सूचना है। बारिश अभी भी जारी है, जिस कारण बचाव दलों को वंहा पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

आज रात से लगातार भारी बारिश के कारण मुख्य मार्ग बड़कोट-यमुनोत्री लिंक रोड़ खरादी के रवाड़ा से नगांणगांव, मसालगांव, स्यालब, सुकण, कुर्सिल, गौल, फूलदार सहित पूरे धारमंडल क्षेत्र का तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है। रवाड़ा से मोटरमार्ग भारी बारिश के कारण पूरी तरह से बंद है।

लगातार बारिश से त्यूनी क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल लोगों ने जागकर रात काटी। कल से हो रही लगातार बारिश से पहले ही जौनसार-बावर के कई संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हैं। त्यूनी हैलीपैड और खेल मैदान भी जलमग्न हो गया है। बाजार को पूरी तरह खाली करा दिया गया है। दूसरी ओर उत्तरकाशी के जोशियाड़ा और मनेरा के बीच सड़क भागीरथी में समा गई। सड़क के नदी में समाने से लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
माकुड़ी में फटा बादल, पांच के मरने की खबर, यमुना और टौंस घाटी में बारिश का कहर माकुड़ी में फटा बादल, पांच के मरने की खबर, यमुना और टौंस घाटी में बारिश का कहर Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, August 18, 2019 Rating: 5

आराकोट क्षेत्र में भारी बारिश से तबाही, दहशत में लोग, त्यूणी बाजार पर भी खतरा

उत्तरकाशी (मोरी): पिछले दो दिनों हो रही भारी बारिश के कारण मोरी के आराकोट, डगोली, माकुड़ी गांव में नाले उफान पर हैं। बरसाती नाले में भारी उफान आने के बाद कई घरों को खतरा हो गया है। सेब के बगीचों को भी भारी नुकसान हुआ है। लोगों ने उफान को देखते हुए अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित जगहों पर शरण ली है। 


मोरी क्षेत्र में भारी बारिश ने कोहराम मचाया हुआ है। आराकोट से लगे डगोली गांव में दोनों तरफ नाले उफान पर हैं। गांव की नीचे की ओर भूधंसाव होने से मकानों को खतरा हो गया है। नालों के उफान पर आने से लोगों में दहशत का माहौल है। गांव में अफरा-तफरी का माहौल है। 




लोगों के खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। इधर, त्यूणी बाजार में भारी उफाने के कारण नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। जिससे बाजार को खतरा हो गया है। भारी बाड़ के कारण बाजार को खतरा हो गया है। हिमाचाल में भारी बारिश के कारण भी हिमाचल से लगे क्षेत्रों की नदियों और नालों को जलस्तर काफी बढ़ गया है। जिससे लोग दहशत में हैं।


आराकोट क्षेत्र में भारी बारिश से तबाही, दहशत में लोग, त्यूणी बाजार पर भी खतरा आराकोट क्षेत्र में भारी बारिश से तबाही, दहशत में लोग, त्यूणी बाजार पर भी खतरा  Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, August 18, 2019 Rating: 5

पाकिस्तान को मुहंतोड़ जवाब देते हुए उत्तराखंड का जवान शहीद

देहरादून: पाकिस्तान को मुहंतोड़ जवाब देते हुए उत्तराखंड के देहरादून का एक जवान शहीद हो गया। पाकिस्तान आज सुबह से ही सीमा पर फायर कर रहा था। पाकिस्तान सेना ने मोर्टार और बड़े हथियारों से भारत की अग्रिम चैकियों को निशाना बनाया है। इस दौरान पाकिस्तान की कायराना हरकत का जवाब देते हुए देहरादून का जवान लांस नायक संदीप थापा शहीद हो गया। शहीद संदीप का परिवार देहरादून जिले के विकासनगर में राजावाला में रहता है। उनके शहीद होने की खबर से पूरा परिवार सदमे में है।
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संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे पर मिली हार से बौखलाए पाकिस्तान ने एकबार फिर सीमा पर अपनी नापाक हरकत दिखाई है। पाकिस्तान यूएन में अपनी हार से बौखला उठा है और इसी बौखलाहट में पाकिस्तानी सेना ने शनिवार को राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एकबार फिर सीजफायर उल्लंघन किया है।

पाकिस्तानी सेना ने आज सुबह 6.30 बजे भारत की अग्रिम चैकियों और गांवों पर मोर्टार और छोटे हथियारों से गोलीबारी की है। भारतीय सेना ने इस गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया है। हालांकि इस गोलीबारी में सेना का एक जवान शहीद हो गया। लांस नायक संदीप थापा इस गोलीबारी में शहीद हो गए हैं।
पाकिस्तान को मुहंतोड़ जवाब देते हुए उत्तराखंड का जवान शहीद पाकिस्तान को मुहंतोड़ जवाब देते हुए उत्तराखंड का जवान शहीद Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, August 17, 2019 Rating: 5

पूर्व होने से पहले ही इंतजाम पूरे...धन्य हैं आप और आपकी दूरदृष्टि

भविष्य की चिंता हर किसीको होती है। सीएम साबह भी तो बेचारे इंसान ही हैं। वैसे जब से वो कुर्सी पर बैठे हैं। उन पर कुछ दैवीय शक्तियां भी अवतरित होती रहती हैं। जब किसी पर देवता आता है, तो उसकी बाॅडी में पहले कंपन होता है। आप समझ ही गए होंगे कि त्रिवेंद्र जी पर देवता आया रहता है। इसीलिये तो वो कांपते रहते हैं। यही वो दिव्य शक्तियां हैं, जो उनसे भयंकर-भयंकर काम कराती रहती है। इसमें उनका जरा भी दोष नहीं है...। समझ तो गए ही होंगे आप...।

खैरासैंण के सूरज से लोगों को रोशनी की उम्मीद थी। लोगों को क्या पता कि किताब लिखने वाले ने अपना सूरज चमकाने के चक्कर में खैरासैंण का सूरज रच दिया। लोगों को खतरनाक सपने दिखाने के लिए वो भी कम दोषी नहीं हैं। वैसे एक बात तो ये भी सही है कि सीएम बनने के बाद शपथ वाले दिन कहा था कि किसी को परेशान नहीं होने देंगे। अब अगर वो भूत, वर्तमान और भविष्य को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं, तो क्या बुरा है...? बेमतलब लोगों की खोपड़ी खराब है। 

 बेचारे पूर्व सीएम बेहद गरीबी में जिये। उनके पास अन्न का एक दाना नहीं। दाने-दाने को मोहताज हैं...। जब से नेता बने। चटाई पर सो रहे हैं। लोगों से मांग-मांग कर खा रहे हैं। किसी-किसी के पास तो दिल्ली, देहरादून, गोवा, मुंबई, नैनीताल, अल्मोड़ा...कहीं भी सिर छुपाने तक की जगह तक नहीं है। कार तो उनमें से किसी ने देखी ही नहीं। बस सरकारी कार का ही आनंद लिया है, जीवनभर। उनकी अपने खाने की तो आदत ही नहीं। सरकार का खाया है और सरकार का ही खाते रहेंगे। गाड़ी-घोड़ा भी सरकार का ही चलाते रहेंगे। भला वो सरकार के जमाई जो घोषित हैं। 

पर्सनल असिस्टेंट, जनसंपर्क अधिकारी, सारथी, गाड़ी-घोड़ा की टूट-फूट, मरम्मत, चैकीदार, माली, टेलीफोन उठाने के लिए क्रेन रूपी कर्मचारी, कोई मारपीट ना कर दे। उससे बचाने के लिए सुरक्षा गार्ड। कुल मिलाकर प्रथम से चतुर्थ श्रेणी तक सबकुछ फिटफोर। मकान टूटा-फूटा तो उसकी मरम्मत भी सरकार कराएगी। तुम्हारी जेब से थोड़े कुछ जा रहा है, जो तुम्हारे पेट में दर्द उठ रहा है। चुप रहो। कोई तुमसे छीनकर थोड़े ही दे रहा है। सब सरकार का है। 

सरकार भी बड़ी चालू चीज है। मतलब राजा और मंत्री ने जनता की जेब पर डाका डाल दिया और किसी को कानों-कान खबर भी नहीं लगी। जनता ने 15 अगस्त और 26 जनवरी को तिरंगे पर सलाम ठोकने लायक बनाया और उसी जनता को ठोकर मारने पर तुले हैं। भूल जातें हैं कि जिस दिन जनता अंगुली करेगी। ना सलाम ठोकने लायक बचेंगे और ना ठोकर मारने लायक। जब तक रहेंगे, ठोकरें ही खाते रहेंगे। काश सबका नसीब इन गरीब, असाह, निरीह पूर्व मुख्यमंत्रियों की तरह होता। पूर्व होने वालों की तो बात ही अलग है। जनता ने इनको अपना नसीब बनाने की ताकत दी। वो हैं कि अपना ही नसीब चमकाने पर तुले हैं। धन्य हैं...खैरासैंण का सूरज।

                                                                                ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
पूर्व होने से पहले ही इंतजाम पूरे...धन्य हैं आप और आपकी दूरदृष्टि पूर्व होने से पहले ही इंतजाम पूरे...धन्य हैं आप और आपकी दूरदृष्टि Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, August 17, 2019 Rating: 5

इंग्लैंड की "आत्मा" में बसती है इन निराश्रित और दिव्यांगों की "आत्मा"

नरेंद्रनगर: जब शरीर साथ छोड़ने लगता है। आत्मा मरने लगती है। उम्र दगा देने लगती है। ऐसे में अगर अपने भी छोड़ दें, तो जीने की सारी उम्मीदें भी दम तोड़ने लगती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा आशियाना आशा किरण में नजर आता है। इस आश्रम में ऐसे बुजुर्ग हैं, जिनको उनके अपनों त्याग दिया। जिनका कोई आश्रय नहीं है। कुछ दिव्यांग हैं। कहने को तो दिव्य अंगों को धारण करने वाले हैं, लेकिन उनको उनके अपनों ने ही दिव्य नहीं समझा। इन सभी निराश्रितों की आशा की किरण हैं सात समंदर पार बसी मैडम ‘‘आत्मा’’। इन सभी की आत्मा इन्हीं मैडम आत्मा में बसती है।

नरेंद्र नगर डिग्री काॅलेज की एनएसएस इकाई के स्वयंसेवकों ने इस आश्रम में जाकर आशियाना आशा किरण में निराश्रित और दिव्यागों के साथ समय बिताया। उनकी के दर्द को समझा। उनमें हौसलों से, मीठी बातों से उम्मीद जगाई। इस आश्रम का संचालन इंग्लैंड की मैडम आत्मा करती हैं। आश्रम में रहने वाले वृद्ध निराश्रित और दिव्यांगों की जुबां पर हर वक्त बस उनका ही नाम रहता है।
मैडम आत्मा उनके रोज-मर्रा की आवश्यकताओं को तो पूरा करती ही हैं। उनके खुद-दुख का भी पूरा ख्याल रखती हैं। उनको एहसास ही नहीं होने देती कि वो उनसे दूर हैं। अपने परिवार से दूर हैं। ये आश्रम अब इन निराश्रित और दिव्यांगों को अपना घर बना चुका है। धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर की एनएसएस यूनिट के स्वयंसेवक जब जनसंपर्क और स्वच्छता अभियान के अंतर्गत आश्रम भ्रमण पहुंचे, तो आश्रम वासियों ने उनको अपने दिल की बात बताई। उनसे अपना हर दर्द और हर खुशी बयां की।

भारत सरकार के युवा और खेल मामलों के मंत्रालय की ओर से 1 से पंद्रह 15 अगस्त तक स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत यह कार्यक्रम संचालित किया गया। इसके तहत छात्र-छात्राओं ने नरेंद्रनगर के आशा किरण आश्रम में निराश्रित लोगों से बात कर उनकी समस्याओं को जाना। आश्रम का कार्य देखने वाले पशुपति ने बताया कि आश्रम में बुजुर्ग और बीमार व्यक्तियों की देख भाल इंग्लैंड की महिला मैडम आत्मा ही देखती हैं। किडनी की बीमारी से ग्रसित बद्री प्रसाद मौर्या का कहना है कि हाल ही में ऋषिकेश के कोहली हाॅस्पिटल में उनकी किडनी का आॅपरेशन किया गया, जिसका पूरा खर्चा मैडम आत्मा ने ही किया। हाल ही में रीढ़ की हड्डी का आॅपरेशन करा चुके भारत सिंह भंडारी ने कहा कि हालांकि वे उत्तराखंड आंदोलन में सक्रिया भूमिका में रहे। लेकिन, आज शरीर ने उनको इस कदर घायल कर दिया कि व्हील चेयर ही अब जीवन साथी बन गई।
इस अभियान में एनएसएस प्रभारी सुधा रानी, डाॅ. संजय कुमार के अलावा प्राध्यापकों में डा. अनिल नैथानी, डा. विक्रम सिंह वर्तवाल, डा. मनोज सुंद्रियाल, विशाल त्यागी, रचना कठैत रावत, रंजना जोशी और छात्र छात्राओं में साक्षी, मीनाक्षी, सोनिया, अमित, जितेंद्र, गौरव, दीवान सिंह, सरिता, शीतल, आकाश आदि मौजूद रहे।
इंग्लैंड की "आत्मा" में बसती है इन निराश्रित और दिव्यांगों की "आत्मा" इंग्लैंड की "आत्मा" में बसती है इन निराश्रित और दिव्यांगों की "आत्मा" Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, August 13, 2019 Rating: 5

कड़ी सुरक्षा के बीच खतरों के खिलाड़ी...पीएम मोदी, अखबारों को शांत रामगंगा में दिखा उफान

भारत माता की जय...। शुरुआत सवालों से करते हैं। अगर आपके आसपास सुरक्षा के लिए दो-तीन पुलिस जवान तैनात कर दिए जाएं, तो क्या आपको डर लगेगा ? अगर आपके आस-पास सुरक्षा का एक पूरा चक्र बना दिया जाए, तो क्या आप डरेंगे ? अगर आपके आस-पास दुनिया के बेहतरीन कमांडो तैनात कर दिए जाएं, तो क्या आपको डर लगेगा ? अगर आपकी सुरक्षा के लिए पूरा इलाका ही सील कर दिया जाए या यूं कहें कि सुरक्षा ऐसी, जिसमें परिंदा भी पर नहीं मार पाए, तो क्या आपको डर लगेगा ? आप असहज होंगे ? जाहिर है, आपको बिल्कुल भी डर नहीं लगेगा। फिर पीएम मोदी कौन से खतरों के बीच सहज नजर आए ?
main verses wild pm modi के लिए इमेज परिणामयहां भी शुरूआत सवाल से ही। मैन वर्सेज वाइल्ड। बीयर ग्रील्स के साथ दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी के सबसे अधिक सुरक्षित व्यक्ति यानि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मैन वर्सेज वाइल्ड। पहली बार मुझे बीयर ग्रील्स का शो फीका लगा। बीयर के साथ हमारे प्रधानमंत्री थे, इसलिए शो को पूरा देख लिया। अखबारों और मीडिया ने पीएम के मैन वर्सेज वाल्ड शो के बहाने पीएम मोदी को एक बार फिर से महिमा मंडित किया, जैसे हर रोज किया जाता है।
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 मैन वर्सेज का पहला ऐसा शो, जिसमें वाइल्ड लाइफ नजर ही नहीं आई। अखबारों को पीएम मोदी का रूप अनोखा लगा। हमारे प्रधानमंत्री रूप धारण करने में बचपन से ही पारंगत हैं। यहां भी चाय ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। इतिहास के पन्नों में एक पन्ना और जुड़ गया। पीएम मोदी ने बीयर ग्रील्स को भी चाय पिला दी। वो भी तुलसी की गर्मा-गरम चाय, जिससे सारे रोग एक क्षण में दूर हो जाएं। बीयर ने भी पीएम मोदी को चाय पिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी...।

 
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बीयर ग्रील्स ने नाव बनाई। जैसी वो खुद के लिए हमेशा ही बनाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को खुद नदी पार कराई। अखबारों ने लिखा उफनती नदी। अगर आपने शो को गौर से देखा होगा, तो साफ है कि नदी को भी देखा होगा। नदी कितनी शांत थी। उसमें कहीं उफान नजर नहीं आ रहा था। उस नाव के आस-पास अदृश्य स्टीमर भी रेंग रही थी। हर तरफ दुनिया के सबसे बेहतरीन और तेज कमांडो। जो पलक झपकते ही किसी भी खतरे को ठाल सकते हैं। सवाल ये है क्या कोई ऐसी सुरक्षा के बीच खुद को असहज महसूस कर सकता है ?

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मैन वर्सेज वाइल्ड शो मोदी वर्सेज मोदी नजर आया। शो में ना तो पार्क नजर आया और ना बीयर ग्रील्स, जिसके लिए वो जाने जाते हैं। बीयर ने अमरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी अपने शो पर बुलाया था। बराक वाला शो भी देख लें। मोदी जी भले ही सुरक्षित खतरों के बीच सहज महसू कर रहे हों, लेकिन अब तो मैं भी बेहद सहज महसूस कर रहा हूं। क्योंकि इस पोस्ट के बाद कई लोग इसे सोशल मीडिया पर बैन कराने का मन बनाएंगे। उनके लिए विशेष जानकारी ये है कि मैं पहले से ही सोशल मीडिया पर असामाजिक करार दिये जाने के बाद बैन किया चुका हूं। इसलिए मुझे खतरे की कोई चिंता ही नहीं।

 
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ये शो टीवी चैनलों पर चलने वाले मोदी जी के आज तक के इंटव्यू जैसा ही था। इसमें नई जानकारी कुछ नहीं थी। मेरे पिताजी की मां के अलावा कुछ भी नया नहीं था। स्कूल ड्रैस, वर्तन में कोयला डालकर कपड़े प्रेस करना, रेलवे प्लेटफार्म पर चाय पिलाना, पिताजी की चिट्टियां, प्रकृति...। यानि फुलटू मोदी महिमा। वो हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं। हम दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी हैं। वैसे मोदी जी जैसा ब्रांड एंबेसडर दूसरा कोई नहीं हो सकता, वो भी खुद का ब्रांड एंबेसडर।

                                                ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
कड़ी सुरक्षा के बीच खतरों के खिलाड़ी...पीएम मोदी, अखबारों को शांत रामगंगा में दिखा उफान कड़ी सुरक्षा के बीच खतरों के खिलाड़ी...पीएम मोदी, अखबारों को शांत रामगंगा में दिखा उफान Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, August 13, 2019 Rating: 5

ईको सेंसेटिव जोन के दायरे से बाहर होंगे उत्तरकाशी के गांव...विस्तार से पढ़ें हर फैसला

देहरादून: राज्य कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के ईको सेंसेटिचव जोन में संशोधन कर उसकी सीमाओं को घटा दिया गया हैै। इसके तहत आने वाले गांवों को इसी सीमा से बाहर किया गया हैै। संशोधन के बाद खनन, पेड़ कटान जैसी 28 गतिविधियों को सरकार से अनुमति मिल जाएगी। राज्य के अंतर्गत शूगर मिल में पेराई सत्र 2019-20 के लिए खंडसारी को कैबिनेट की अनुमति मिल गई है। तय किया गया कि गुड़ बनाने वाली इकाइयों को अलग से खंडसारी का अलग लाइसेंस लेना होगा। 

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  • न्याय विभाग की नियमावली में भी बदलाव किया गया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सिविल न्यायालय अवर अधिष्ठान नियमावली के साथ ही उत्तराखंड वनक्षेत्राधिकारी सेवा नियमावली 2019 के नियम आठ में संशोधन किया है।

  • उत्तराखंड सीड एंड आॅर्गेनिक प्रोडक्शन सर्टिफिकेशन एजेंसी के ढांचे को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। ढांचे में 171 पद शामिल किए गए हैं। मोटरयान नियमावली के कई नियमो में बदलाव किया गया है।
  • प्रदेश में वीआई नम्बर लेना मंहगा हो गया है। वीआईपी नम्बर 0001, 0786 की बोली अब 10,000 से बढ़ाकर एक लाख से होगी शुरू होगी। अन्य नंबरों की निविदा राशि में भी इजाफा किया गया हैै। आरटीओ कार्यालस में नये वाहन को फिटनेस के लिए ले जाने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। परिवहन कर अधिकारी 2 की वर्दी में बदलाव किया गया है।

  • एनडीए, आईएमए में सलेक्ट होने वाले छात्रों के साथ ही अब नेवी और एयर फोर्स में सलेक्टर होने वाले छात्रों को 50 हजार की प्रोत्साहन राशि की जाएगी। उच्च शिक्षा में पुस्तकालय लिपिक की भर्ती में संशोधन किया गया हिल्ट्रोन बंद होने के बाद बेरोजगार हुए कर्मचारियों का दूसरे विभागों में समायोजित किया जाएगा। इसके लिए नियमावली बनाई जाएगी।

  • विश्व बैंक से पोषित पेरी अर्बन एरिया की नीति को भी मंजूरी दी गई है। अधीनस्थ वन सेवा नियमावली में संशोधन किया गया है। पहले फिलीकल टेस्ट होता था, लेकिन अब पहले लिखित परीक्षा होती है। पर्यावरण विभाग को लेकर फैसला किया गया है। 

  • नए विभाग में पर्यावरण मंत्रालय का गठन किया जाएगा। पाॅल्यूशन बोर्ड, वायो डायवर्सिटी बोर्ड समेत चार संस्थान एक साथ काम करेंगे। इसके लिए 17 पदों को ढांचा तैयार किया गया है। पुरुकल गांव से मसूरी रोपवे को लेकर कैबिनेट ने कार्यदाई संस्था को दो हिस्सो में भुगतान की अनुमति दी है। 
  • साथ ही राज्य की धरोहरों को संरक्षित करने के लिए भी थ्री पार्टी समझौता पत्र तैयार किया गया है।
ईको सेंसेटिव जोन के दायरे से बाहर होंगे उत्तरकाशी के गांव...विस्तार से पढ़ें हर फैसला ईको सेंसेटिव जोन के दायरे से बाहर होंगे उत्तरकाशी के गांव...विस्तार से पढ़ें हर फैसला Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, August 13, 2019 Rating: 5

इस "राखी" कुछ खास करें...गरीब, असहाय "राखी" को है मदद की दरकार

  • जन_अधिकार_मंच_की_मुहिम।
  • इस गरीब परिवार का घरौंदा बनाने के लिए आगे आएं।

  • दूसरे के आंसू पोंछना और होठों पर मुस्कान देना ही सच्ची खुशी।

  • असहाय राखी देवी को मदद की दरकार।
  • पौष्टिक आहार के अभाव में 15 साल की बेटी की दुखद मौत, 12 वर्ष पूर्व हुई थी पति की मौत।
  • तीन बच्चों के साथ झोपड़ी में दिन काट रही है महिला

रुद्रप्रयाग: रुद्रप्रयाग जिले के (जखोली विकासखण्ड) की राखी देवी पर पति की मौत के बाद दूसरी आफत पिछले माह आ गयी । इस महिला की 15 वर्षीय बेटी की मौत इसलिए हो गयी कि वह उसे पौष्टिक आहार नहीं दे सकी। भूख और बीमारी की स्थिति में आखिर वह जीती भी तो कैसे? अब उसके तीन बच्चों के जीवन पर भी संकट है। दलित समुदाय की राखी देवी को जब दिहाड़ी-मजदूरी मिल जाती है तो बच्चे खा लेते हैं। नही तो भूखे ही सो जाते हैं। जिस झोपड़ी में वो रह रही है उसकी छत भी टिन की है। अभी न बिजली है न रसोई गैस। कौन कहता है कि गरीबों की स्थिति सुधर रही है। 

कुछ समय पूर्व जन अधिकार मंच ने इस परिवार के पास सिर छुपाने के लिए घर न होने के मामले को उठाया था। इसका संज्ञान लेने के बाद जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल जी के विशेष प्रयासों से इस परिवार को घर बनाने के लिए आपदा मद से करीब एक लाख रुपए स्वीकृत हो गए हैं। जिलाधिकारी ने जन अधिकार मंच से अपेक्षा की है कि वे पीड़िता का मकान बनाने में सहायता करें, ताकि उसकी समस्या का सही ढंग से समाधान हो सके।

मंच ने बिजली तथा खाना पकाने की गैस के मुफ्त कनेक्शन के लिए भी संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित किया है और सवाल उठाया है कि दलितों-पिछड़ों को यह लाभ दिलाने में संबंधित विभाग अपनी भूमिका स्वतःस्फूर्त क्यों नहीं निभाते? मंच द्वारा जिलाधिकारी के संज्ञान में यह भी लाया गया कि इस परिवार के पास बिजली और रसोई गैस नहीं है। जिस पर उन्होंने शीघ्र सम्बंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश देते हुए बिजली की व्यवस्था करने और रसोई गैस उपलब्ध कराने को कहा है।  

जन अधिकार मंच ने महिला के लिए 2 कमरों के मकान के लिए अतिरिक्त धनराशि जुटाने का निर्णय लिया है। चूंकि एक लाख रुपए में दो कमरों का मकान बनना संभव नहीं है। इसलिए मंच आप सभी समर्थ लोगों से अनुरोध करता है कि पीड़ित परिवार की सहायता के लिए आर्थिक मदद जरूर करें। अगर हम सभी मिलकर सिर्फ एक-एक रुपए की भी मदद करेंगे, वह भी इस पीड़ित परिवार के लिए पर्याप्त होगी। हमारा लक्ष्य एक लाख रुपए की अतिरिक्त धनराशि एकत्रित करना है। कुल दो लाख रुपए की धनराशि से इस परिवार के लिए खुशियों का घरौंदा तैयार हो जाएगा। जन अधिकार मंच की देख-रेख में ही मकान का निर्माण किया जाएगा। 

अकाउंट होल्डर: राखी देवी
बैंक: यूनियन बैंक बुढ़ना लस्या, (रुद्रप्रयाग)
एकाउंट: 404302010060373 IFSC CODE: UBIN0540439

अधिक जानकारी के लिए आप मेरे मोबाइल नंबर 9897248163 पर भी संपर्क कर सकते हैं।  

इसके साथ ही आप क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता रामरतन पंवार जी (+919639078338) से भी संपर्क कर सकते हैं।

(मोहित डिमरी)
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मेहमान कोना : एयर एंबुलेंस के लिए हम लोगो से चंदा ले लो सीएम साब

  • नवल खाली
आपको याद होगा ,कुछ माह पूर्व ही सूबे के सीएम ने कहा था कि जल्द ही एयर एम्बुलेंस शुरू होगी, पर सैकड़ों दिन गुजर जाने के बाद भी आजतक एयर एम्बुलेंस शुरू न हो पाई ! पहाड़ों में सबसे ज्यादा आवश्यकता इसी एयर एम्बुलेंस की है, क्योंकि पहाड़ों में आये दिन दुर्घटनाये होती रहती हैं। अभी कुछ दिन पूर्व टिहरी में बच्चों के साथ हुए भीषण हादसे में भी बच्चों को 2 घण्टे का सफर तय करके बौराड़ी ले जाया गया ,तब जाकर एयर लिफ्ट किया गया !! जबकि सीएम पांच दिन बाद जब कल कंगसाली पहुंचे तो उनका ये हेलीकॉप्टर आसानी से सड़क पर ही उतर गया !! जब सीएम के लिए हेली सड़क पर उतारा जा सकता है तो घायलों के लिए क्यों नही ?
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पहली महत्वपूर्ण बात तो यह है कि अगर राज्य सरकार के पास एयर एंबुलेंस का हेली लेने के पैंसे नही हैं तो प्रदेश के लगभग 60 लाख वोटरों से 50 पचास रुपये ले लो ,और तीस करोड़ में फिलहाल मेरे हिसाब से 10 हेलीकॉप्टर रसिया से आराम से आ जाएंगे! दस हेलीकॉप्टर की भी जरुरत नही है ,सिर्फ 5 ही ले लो 15 करोड़ में, बाकी 15 करोड़ में पायलट, तेल-वेल का खर्चा रख लो, वैसे भी हेली का तेल बहुत सस्ता आता है ! मैं गरंटी के साथ कहता हूं एयर एंबुलेंस लेने के हेली को लेने के लिए गाँव के मनरेगा में काम कर रहा व्यक्ति भी खुशी खुशी पचास रुपये दे देगा !

पहाड़ के दस जिलों को पांच हेलीकॉप्टर आसानी से कवर कर सकते हैं । एक आइडिया और देता हूँ सीएम साब - उन हेली का प्रयोग आप खाली टाइम में केदारनाथ में भी कर सकते हो ,तेल पाणी ,पायलेट की तनखा वहीं से निकल जाएगी, जब प्राइवेट हेली वाले मात्र दो महीने की यात्रा में बोरा भरकर रुपये ले जा सकते हैं तो राज्य सरकार क्यों नही ? कई लोगो का ये भी तर्क होता है कि सरकारी चीजो की कोई कुछ वेल्यू ही नही समझता ,मेरा मानना है कि यदि ईमानदारी से मोनिटरिंग हो तो सब सम्भव है !

इस समय पहाड़ो के 10 जिलों के लिए मेरी चिंता है ,जहां डॉक्टर व अस्पतालों का अभाव है, जहां मरीज देहरादून ,ऋषिकेश ,हल्द्वानी के अस्पतालों तक पहुंचने से पहले ही सफर में जान गंवा देता है । काश ! टिहरी हादसे के दिन भी जिला मुख्यालय में एक हेली होता तो, बच्चो को समय से ट्रीटमेंट मिल जाता ! फिलहाल, आशा है आप तक ये सुझाव सोशियल मीडिया के जरिये जरूर पहुंचेगा !! जब भी पचास पचास रुपये चंदा हम लोगो को जमा करना होगा बता देना , सब लोग तैयार हैं । वैसे जब चंदे से आज पार्टियों के फंड में अरबों जमा हो सकता है ,ये तो फिर आम जनमानस के हितों के लिए चंदा है ,इसमें सारी पब्लिक खुलकर सपोर्ट करेगी साब ।

नवल खालीः भरतू की ब्वारी तो आप पढ़ते ही होंगे। जितनी मारक क्षमता से कटाक्ष लिखते हैं। उतनी मारकता से सपाट सीधी बात भी लिखते हैं। नवल कसौटी पर कसे और मंझे हैं। जो भी लिखते हैं। डंके की चोट पर  लिखते हैं। उनका ये लेख उनकी फेसबुक से साभार लिया है। इस पोस्ट को कई लोग शेयर कर चुके हैं। कई लोगों ने इस पर अपनी गंभीर प्रतिक्रियायें भी दी है।
मेहमान कोना : एयर एंबुलेंस के लिए हम लोगो से चंदा ले लो सीएम साब मेहमान कोना : एयर एंबुलेंस के लिए हम लोगो से चंदा ले लो सीएम साब Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, August 12, 2019 Rating: 5

बारिश का कहर: नदी में बहकर आ रहे सिलेंडर और पालतू पशु, चमोली में तीन की मौत

चमोली: प्रदेश के पहाड़ी जिलों खासकर चमोली, रुद्रयाग और टिहरी में बारिश लोगों पर कहर बनकर बरस रही है। सबसे ज्याद नुकसान चमोली जिले में हुआ है। रविवार देर रात से हो रही तेज बारिश के कारण चमोली के बांजबगड़ में मां-बेटी और आली में एक लड़की की भारी मलबा आने के कारण मकान में दबकर मौत हो गई। आसमानी आफत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अलकनंदा नदी में लोगों को सिलिंडर, पालतू पशु और अन्य सामान बहता हुआ नजर आ रहा है। इस खतरनाक नजारे को देखकर लोग सहमे और डरे हुए हैं। 2013 की केदारनाथ जलप्रलय जैसा नजारा आंखों के सामने फिर से उभरकर आ रहा है। 


रविवार रात से हो रही बारिश की वजह से चमोली जिले के घाट विकास खंड में भारी बारिश के कारण जनजीवन पटरी से उतर गया है। बांजबगड़ गांव में आवासीय मकान के पीछे हुए भूस्खलन के कारण रूपा देवी उनकी बेटी चंदा की मलबे में दबने से मौत हो गई। बांजबगड़ गांव के ही आली तोक में 21 की भी मलबे में दबने से मौत हो गई। जिले के कर्णप्रयाग, गौचर, आदिबदरी, गैरसैंण, नारायणबगड़, थराली और देवाल में रविवार से ही लगातार बारिश का दौर जारी है। दो दिन पहले भी क्षेत्र में बारिश ने तबाही मचाई थी। थराली के बज्वाड़ गांव में आवासीय मकानों में पहाड़ से आया बलबा घुस गया। लोगों को अपने घर छाड़ने पड़े। 

घाट बाजार में चुफलागाड़ और नंदाकिनी के उफान पर आने से तीन दुकानें बह गईं। घाट-बांजबगड़ मोटर मार्ग पर गरणी गांव में पहाड़ी से हुए भूस्खलन के कारण दो वाहन और एक मकान मलबे में दब गए हैं। गनीमत रही कि किसी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। मोख घाटी में मोक्ष नदी के उफान पर आने से कई आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने के चलते नदी किनारे के घरों और होटलों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है।
बारिश का कहर: नदी में बहकर आ रहे सिलेंडर और पालतू पशु, चमोली में तीन की मौत बारिश का कहर: नदी में बहकर आ रहे सिलेंडर और पालतू पशु, चमोली में तीन की मौत Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, August 12, 2019 Rating: 5

श्रद्धांजलि नहीं, दिखावा करने आए सीएम, मृतक मासूमों के परिजनों ने नहीं लिए एक-एक लाख के चेक

नई टिहरी: स्कूल वैन दुर्घटना से पीड़ित कंगसाली गांव के ग्रामीणों से मिलने गए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को ग्रामीणों के गुस्से को झेलना पड़ा। सीएम लोगों को एक-एक लाख की मदद के चेक दे रहे थे, लेकिन लोगों ने लेने से इंकार कर दिया। साथ पहले दिए गए चेक भी वानस लौटाने का फैसला किया है। लोगों ने कहा कि सीएम उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। बच्चों को श्रद्धांजलि देने का नाटक कर रहे हैं। 


दरअसल, आज सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत स्कूल वैन हादसे में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि देने गए थे। इस दौरान मृतक बच्चों के परिजन भी वहां मौजूद थे। सीएम रावत ने उनको एक-एक लाख रुपये के चेक वितरित किए, लेकिन मृतक बच्चों के परिजनों ने लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने 6 सूत्रीय मांग पत्र सीएम को दिया, लेकिन सीएम ने उनकी मांगों पर गौर नहीं किया। 

जिसके बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए। सीएम उस स्थान पर भी नही गए जंहा पर दुर्घटना हुई। मात्र आधा घंटे में कार्यक्रम को इतिश्री कर वह वापस लौट गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने सीएम के खिलाफ नारे लगाए। ग्रामीणों ने तय किया कि 13 अगस्त को विशाल धरना और प्रदर्शन किया जाएगा। हादसे से लोग अब तक उभर भी नहीं पाए हैं। हादसे के कई दिनों बाद सीएम को बच्चों की याद आई। लेकिन कार्यक्रम में रश्म आदायगी कर लौट आए।
श्रद्धांजलि नहीं, दिखावा करने आए सीएम, मृतक मासूमों के परिजनों ने नहीं लिए एक-एक लाख के चेक श्रद्धांजलि नहीं, दिखावा करने आए सीएम, मृतक मासूमों के परिजनों ने नहीं लिए एक-एक लाख के चेक Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, August 11, 2019 Rating: 5

पटलू राम उपशिक्षा अधिकारी, नामी स्कूलों से डरे, अपने ही आदेश से पलटे

कोटद्वार: उत्तराखंड में शिक्षा विभाग के अधिकारी अपने कारनामों से अक्सर चर्चाओं में रहते हैं। टिहरी में स्कूल बस की वैन के खाई में गिरने के बाद से प्रदेशभर में शिक्षा विभाग स्कूलों की मान्यता को लेकर अभियान चला रहा है। इसको लेकर कोटद्वार में उप शिक्षा अधिकारी अभिषेक शुक्ला ने भी 18 स्कूलों की एक लिस्ट जारी कर दी। जिसमें कहा गया था कि ये स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं हैं। लेकिन, जैसे ही उनकी लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। उसके कुछ देर बाद ही उप शिक्षा अधिकारी अपने आदेश से पलट गए और नया लेटर जारी कर दिया। 


उप शिक्षा अधिकारी कोटद्वार में संचालित हो रहे 18 विद्यालयों को बगैर मान्यता प्राप्त संचालित होना बताया गया। उन्होंने स्कूलों को तत्काल बंद करने के निर्देश जारी कर दिये। उप शिक्षा अधिकारी के आदेश के वायरल होते ही स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया। खबर सामने आते ही उपशिक्षा अधिकारी अभिषेक शुक्ला बैक फुट पर आ गए। कहा जा रहा है कि उन पर अपना आदेश वापस लेने का दबाव बनाया गया। लिस्ट में कई नामी स्कूलों का नाम भी था।  

उपशिक्षा अधिकारी अभिषेक शुक्ला ने संशोधित पत्र जारी करते कहा कि इन विद्यालयों के दस्तावेज खंड शिक्षा कार्यालय दुगड्डा में उपलब्ध नहीं है। इसलिए विद्यालयों को सूचित करने के लिए पत्र जारी किया गया था। लेकिन, जिस पत्र को वो सूचना बता रहे हैं। उसकी भाषा से साफ है कि वो जानकारी देने नहीं। बल्कि आदेश था। जिसे उन्होंने बाद में खुद ही बदल दिया। 

सवाल ये है कि विद्यालय अगर मानता प्राप्त ना माने जाएं। जैसा उप शिक्षा अधिकारी ने कहा भी है कि इन स्कूलों के दस्तावेज खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नहीं है। इससे साफ है कि स्कूलों को खंड शिक्षा कार्यालय से कोई फर्क ही नहीं पड़ता। स्कूलों का कहना है कि उनकी स्थाई मान्यता है और दस्तावेज जिला स्तर पर जता करा गए हैं।
पटलू राम उपशिक्षा अधिकारी, नामी स्कूलों से डरे, अपने ही आदेश से पलटे पटलू राम उपशिक्षा अधिकारी, नामी स्कूलों से डरे, अपने ही आदेश से पलटे Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, August 11, 2019 Rating: 5

बेशर्मी की सेल्फी: बिटिया के रेप पर भी सेल्फी एडवेंचर

कोटद्वार: कोटद्वार में मासूम के साथ दो नेपाली मूल के दरिंदों ने ऐसी दरिंदगी की, कि सुनकर हर किसी की रूह कांप गई। दरिंदे पहले गुड़िया को खिलौने के बहाने घर से रेलवे स्टेशन ले गए। वहां उसका मुंह दबाया। उसके साथ रेप किया। मुंह और गला दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया। फिर उस फूल सी बच्ची के शव को पन्नी में बंद कर झाड़ियों में फेंक दिया। जिसके बाद में टुकड़े-टुकड़े बरामद किये गये। दरिंदों को फांसी देने के लिए आंदोलन होना ठीक बात है। उनको फांसी से कम कुछ होना भी नहीं चाहिए, लेकिन कमसे कम राजनीत ना हो। राजनीति हो भी, तो बेशर्मी की हदों को पार ना करें। कोटद्वार की घटना के बाद कांग्रेस के प्रदर्शन में भी कुछ ऐसा ही शर्मसार करने वाला नजारा नजर आया...। देखकर आपका भी माथ ठनक जाएगा और बेशर्मी पर गुस्सा भी आएगा। 


पहला-
कोटद्वार में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में बच्ची को इंसाफ दिलाने और प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसमें कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता सेल्फी लेती नजर आ रही हैं। बेशर्मी की सेल्फी। किसी मां-बाप ने अपने बाग का एक सुंदर फूल खो दिया और कांग्रेसी बच्ची के रेप और हत्या के आंदोलन में भी सेल्फी एडवेंचर खोज रहे हैं। तस्वीर को गौर से देखिये, सेल्फी लेने वालों के चेहरे पर मुस्कान भी साफ नजर आएगी। बेशर्मी की सेल्फी...।

दूसरा-
बच्ची के हत्यारों को फांसी की सजा दिलाने के लिए कोटद्वार का झंडाचैक जाम रहा। महिलाओं से लेकर आम लोगों तक ने पूरी सड़क को जाम कर दिया। बाजार बंद कर दिए गए। लेकिन, जब बच्ची के अंतिम संस्कार की बारी आई तो कोई नजर नहीं आया। अंतिम संस्कार करते हुए बच्ची का परिवार और कुछ पुलिस के संवेदनशील जवान शामिल थे। संवेदनशील इसलिए कि एक पुलिस कर्मी को वहां बेहद भावुक हो गए थे। बच्ची को दफन करने से पहले उन्होंने कई बार हाथ जोड़े।

तीसरा-
कानून व्यवस्था के चाकचैबंद होने के दावे करने वाली सरकार और 13 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ रेप करने वालों को फांसी की सजा देने वाले सरकार को अब भी नहीं सूझ रही। बयान देकर अखबरों की सुर्खियां बने और वाहवाही लूटने के बाद अपना बयाल ही भूल गए। देश के दूसरे राज्यों में कानून बना है। अगर नहीं भी है, तब भी भारतीय कानून के हिसाब से अगर सरकार गंभीरता दिखाये तो इस तरह के मामलों के लिए फांसी का प्रावधान है। सरकार को सोचना चाहिए।

चौथा-
बच्ची के साथ हुये जघन्य अपराध को लेकर सरकार के मुखिया को बयान देने की याद आई हद है। और तो और सरकार ने इस पर अपना रुख साफ करने में तीन दिन लगा दिए। कोटद्वार में पूरा कोटद्वार जिस वक्त सड़कों पर था। कोटद्वार भाजप के जिला अध्यक्ष नदारद रहे। मुख्यमंत्री कह रहे है कि हम पीड़ित परिवार की मदद करेंगे। कब...? सजा दिलाएंगे। कब...? आरोपी उसी दिन पकड़े जा चुके थे। अपना गुनाह भी कबूल चुके हैं। सारे सुबूत पुलिस के पास हैं। फिर देर किस बात की है। क्यों नहीं फांसी की सजा दिलाने का रिकार्ड बना लेते...?

                          ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)

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नैरेटिव नेशनलिज़्म में फंसा नौजवान नौकरी के लिए व्हाट्सएप क्यों करता है...?

  • रविश कुमार
मेरे व्हाट्स एप के इनबॉक्स में बधाइयों के मेसेज के बीच नौकरियों के मेसेज आने लगे हैं। मैं फिर से उन मेसेज में लोकतंत्र में ख़त्म होती संख्या के महत्व को देखता जा रहा हूं। मेसेज भेजने वाला अपनी नौकरी की समस्या के साथ हज़ारों या लाखों की संख्या को ज़रूर जोड़ता है। मैं यही सोचता हूं कि जब उनके पीछे इतनी संख्या है तो फिर उनकी बात क्यों नहीं सुनी जा रही है। क्यों वे इतने परेशान है और महीनों बाद भी उनकी समस्या जस की तस है। बहुत दिनों से सी जी एल 2017 के पीड़ित छात्र लिखते रहते हैं। हज़ारों की संख्या में चुने जाने के बाद लिस्ट से बाहर कर दिए गए। इनकी कोई सुन नहीं रहा है।

आज पहले रेलवे के ग्रुप डी के बहुत सारे परीक्षार्थियों के फोन और मेसेज आए। फोटो या अन्य तकनीकि आधार पर उनके फार्म रिजेक्ट हो गए थे। दूसरा मेसेज आया बिहार से। 2019 में वहां असिस्टेंट प्रोफेसर और लेक्चरर के 1600 पदों का विज्ञापन निकला था। सारी प्रक्रिया पूरी हो गई। लेकिन हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। यह कह कर कि विज्ञापन में ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर इंजीनियरिंग यानि गेट को प्राथमिकता देना ग़लत है। नौजवान कह रहे हैं कि सारी प्रक्रिया पूरी हो गई तो उन्होंने पुरानी नौकरी से इस्तीफा दे दिया या नए जगह पर नामांकन नहीं किया। लेकिन जब तक फाइनल लिस्ट नहीं आता है तब तक कैसे मान सकते हैं कि हो ही गया है। वो भी तब जब सरकारी नौकरी की भर्ती की प्रक्रिया की कोई विश्वसनीयता नहीं है। मैंने नौकरी सीरीज़ बंद कर दी है। उसके कारण विस्तार से कई बार बता चुका हूं। यह समस्या विकराल है। मेरे पास अनगिनत परीक्षाओं को रिपोर्ट करने के लिए संसाधन नहीं हैं न ही कश्मीर जैसी समस्याओं के सामने यह संभव है कि इन परीक्षाओं पर चर्चा करें। ख़ुद पीड़ित युवाओ के परिवार वाले भी टीवी पर वही देख रहे होंगे जो उन्हें दिखाया जा रहा होगा। ऐसा ही वो करते आए हैं।

मेरा मानना है कि हर युवा अलग-अलग स्वार्थ समूह में बंटा हुआ है। सभी मिलकर ईमानदार परीक्षा व्यवस्था की मांग नहीं करते हैं। अगर हर परीक्षा के युवाओं का दावा सही है कि उनकी संख्या लाखों में है तो फिर यह लेख भी लाखों में पहुंच जाना चाहिए। पता चलेगा कि वे अपनी मांगों को लेकर कितने जागरूक हैं। अब इसे ऐसे देखिए। जम्मू कश्मीर और लद्दाख राज्य का पुनर्गठन जिन कारणों के आधार पर हुआ उसमें रोज़गार भी प्रमुख है। यूपी, बिहार, राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश में रोज़गार का हाल बुरा है। नौजवानों ने नागरिक होने की हैसियत गंवा दी है। उनकी संख्या चाहे पांच लाख की हो या 69,000 की हो, बेमानी हो चुकी है। इन सभी ने अनगित प्रदर्शन किए। ट्विटर पर मंत्रियों को जमकर लिखा। फिर भी इनकी मांग अनसुनी रह गई।

मैंने प्राइम टाइम में अनगिनत प्रदर्शनों को कवर कर हुए देखा है। तब शो में कई बार कहा करता था कि संख्या शून्य होती जा रही है। लोकतंत्र में संख्या की एक ताक़त होती है। शून्य करने की प्रक्रिया दोतरफा थी। राज्य उदासीन हो गया और जनता समर्थक में बदल गई। लोगों ने राजनीतिक पसंद और मीडिया में फर्क करना बंद कर दिया। मीडिया ने लोगों को कवर करना बंद कर दिया और नेताओं ने लोगों की परवाह छोड़ दी।

जनता लगातार विमर्श के घेरे में हैं। जिसे मैं नैरेटिव नेशनलिज़्म कहता हूं। इस वक्त कश्मीर का नैरेटिव चल रहा है। किसी वक्त कुछ और नैरेटिव चलता रहता है। सारे नैरेटिव का एक राजनीतिक स्वर है। इसके बाहर निकलना मुश्किल है। जो जनता लाठी भी खा रही होती है, नौकरी गंवा रही होती है, वो तक़लीफ़ में तो होगी लेकिन इस नैरेटिव नेशनलिज़्म से बाहर नहीं जा सकेगी। सरकार हमेशा निश्चिंत रहेगी और जनता हमेशा सरकार की रहेगी। जनता जनता नहीं रही। सरकार के लिए जनता एक स्थायी समर्थक है। भले ही यह बात सौ फीसदी जनता पर लागू नहीं है लेकिन जनता अब एक है। वह संख्या नहीं है। वो सौ है लेकिन है एक। बीस लाख होकर भी वह एक सोच, एक रंग की है। इसलिए संख्या शून्य है। कभी इस पर सोचिएगा। वर्ना इतनी बड़ी समस्या तो नहीं है ये सब। लेकिन इतने धरना प्रदर्शन और लाठी खाने के बाद या कोर्ट से जीतने के बाद भी उनकी हालत ऐसी क्यों हैं। सोचेंगे तो जवाब मिलेगा।
नैरेटिव नेशनलिज़्म में फंसा नौजवान नौकरी के लिए व्हाट्सएप क्यों करता है...? नैरेटिव नेशनलिज़्म में फंसा नौजवान नौकरी के लिए व्हाट्सएप क्यों करता है...? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, August 10, 2019 Rating: 5

उत्तराखंड में बादलों ने बरपाया कहर, गढ़वाल मंडल में 11 घर बहे, दो की मौत, कई घायल

देहरादून : उत्तराखंड में बादलों ने कहर बरपाया है। गढ़वाल मंडल बारिश से भारी नुकसान हुआ है। टिहरी और चमोली में दो जगह बादल फटने की घटना सामने आई है। बादल फटने के बाद आए उफान में 11 घर बह गए। अब तक की जानकारी के अनुसार दोनों घटनाओं में एक महिला औ एक बच्चे की मौत हो गई है। दो महिलाएं मलबे में दबी हैं। एक लापता है। कई लोग घायल हुए हैं। स्थानीय लोग इन घटना को बादल फटना बता रहे हैं।

Photo credit amar ujala

पहली घटना चमोली जिले में कर्णप्रयाग के देवाल क्षेत्र में हुआ। यहां फल्दिया गांव में गुरुवार देर रात करीब 10.30 बजे अतिवृष्टि होने से भारी तबाही मच गई। गांव में भारी मात्रा में मलबा आ गया है।

मलबे में फल्दिया गांव की दो महिलाओं के दबने की सूचना है। यहां बादलों ने ऐसी तबाही मचाई है कि गांव में 11 मकान बह गए हैं। गाय, भैंस सहित खाने-पीने का सामान भी बह गया है।
उत्तराखंड में बादलों ने बरपाया कहर, गढ़वाल मंडल में 11 घर बहे, दो की मौत, कई घायल  उत्तराखंड में बादलों ने बरपाया कहर, गढ़वाल मंडल में 11 घर बहे, दो की मौत, कई घायल Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, August 09, 2019 Rating: 5

नरेंद्रनगर डिग्री काॅलेज ने एनएसएस स्वयंसेवकों ने चलाया स्वच्छता अभियान

नरेंद्रनगर: धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर परिसर मार्ग में एनएसएस यूनिट ने  स्वच्छता अभियान चलाया। भारत सरकार के युवा और खेल मामलों के मंत्रालय द्वारा एक से पंद्रह अगस्त तक स्वच्छता पखवाडा के अंतर्गत संपूर्ण भारत में कई कार्यक्रमों के आयोजन की रूप रेखा तैयार की गई है। इसमें दो से पांच अगस्त के बीच कालेजों की एनएसएस यूनिटों के द्वारा कालेज परिसरों की सफाई एवं ग्रीन कैंपस योजना के तहत पौधरोपण के कार्यक्रम नियत किए गए हैं। 

इसके तहत धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर परिसर मार्ग पर झा़ड़ी कटाव एवं स्वच्छता कार्यक्रम चलाया गया। में सोमवार को स्वच्छता एवं पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर एनएसएस प्रभारी श्रीमती सुधा रानी, डाॅ0 संजय कुमार के अलावा कुलदीप सजवान, मनीष नौटियाल, सविता राज, प्रियंका, अभिषेक सोनी, अशीष व्यास, शिवानी, आरती पुण्डीर, अनीशा पुण्डीर, सचित भट्ट, समीर, आदि छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।



नरेंद्रनगर डिग्री काॅलेज ने एनएसएस स्वयंसेवकों ने चलाया स्वच्छता अभियान नरेंद्रनगर डिग्री काॅलेज ने एनएसएस स्वयंसेवकों ने चलाया स्वच्छता अभियान Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, August 08, 2019 Rating: 5

नहीं मिला एडमिशन, तो नरेंद्रनगर डिग्री काॅलेज में हैं सीटें, 10 अगस्त तक मौका

नरेंद्रनगर: कई स्टूडेंट अब भी ऐसे हैं, जिनको काॅलेजों में एडमिशन नहीं मिल पाया है। कई ऐसे भी हैं, जिनको पसंदीदा विषयों में प्रवेश नहीं मिल पाया है। अगर आपको भी पसंदीदा विषय में प्रवेश नहीं मिला है, तो आप नरेंद्र नगर डिग्री काॅलेज में 10 अगस्त तक अपना एडमिशन करा सकते हैं। काॅलेज में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में जिन विषयों में सीटें रिक्त रह गई हैं। उनमें काउंसलिंग और प्रवेश की तिथि दस अगस्त तक बिढ़ा दी गई है। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. जानकी पंवार ने कहा कि छात्र हित को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। 

 धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में बीए, बीएससी, बीकाॅम, बीए मास काॅम एव बीए टूरिज्म प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश एवं काउंसलिंग की अंतिम तिथि दस अगस्त तक बढने से प्रवेशार्थियों में अति उत्साह दिखाई देने लगा है। अधिकतर विषयों में जहां सीटें भर गई हैं वहीं कुछ ही विषयों में अब संभावनाएं बची हैं। धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर के बीए आर्टस में जहां अब तक कुल 74 सीटों पर काउंसलिंग हो चुकी है वहीं बीएससी (बायो ग्रुप) में 23 एवं बीएससी (पीसीएम) में 21 छात्र छात्राएं काउंसलिंग में शामिल हुए। बीए मास काॅम में प्रवेश पूर्ण हो चुका है मात्र आरक्षित सीटों पर ही कुछ सीटें खाली पड़ी हैं। 

बीकाॅम में अब तक जहां 43 छात्र छात्राओं के प्रवेश हो चुके हैं वहीं बीए टूरिज्म में 12 प्रवेशार्थियों की काउंसलिंग हो गई है। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो0 जानकी पंवार के अनुसार रिक्त सीटों पर अब 10 अगस्त तक ही प्रवेश दिए जाएंगे, इस तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां प्रवेश लेेने वालों में नरेंद्रनगर अलावा कांडा, फकोट, गजा, नीर, कुुंजापुरी, आगराखाल, ऋषिकेष, श्यामपुर, गुमानीवाला, हिंडोलाखाल आदि दूरस्थ क्षेत्रों से छात्र-छात्राएं पढने आ रहे हैं।

नहीं मिला एडमिशन, तो नरेंद्रनगर डिग्री काॅलेज में हैं सीटें, 10 अगस्त तक मौका नहीं मिला एडमिशन, तो नरेंद्रनगर डिग्री काॅलेज में हैं सीटें, 10 अगस्त तक मौका  Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, August 08, 2019 Rating: 5

भई वाह ! कप्तान समेत विदेश जाएगी सरकार

  • मेट्रो के नाम पर कब तक होगी सरकारी खजाने की लूट ?
खैरासैंण के सूरज की जय। तनख्वा देने के पैसे नहीं है और सरकार विदेश जाने को आतुर है। देश चांद की कक्षा में प्रवेश कर गया और यहां मेट्रो का ख्वाब पूरा नहीं हो पा रहा। करोड़ों रुपये एक साल पहले बबार्द किये। सरकार के विधायक, उनकी धर्म पत्नियां। अधिकारी और उनकी जीवन संगिनियों ने विदेश दौरा किया। खूब मौज लिया। बेचारों के मन में अब भी उस दौरे की यादें छलक कर बाहर गिरने को आतुर होंगी। बहरहाल...तब कुछ नहीं निकला। अब सीएम त्रिवेंद्र रावत खुद ही कप्तान बनकर पूरी टीम लेकर जा रहे हैं। इस बार भी कुछ हासिल कर पाएंगे। उसकी कोई गारंटी नहीं है। हां करोड़ों रुपये बबार्द होने की पूरी गारंटी है। 


 
उत्तराखंड में मेट्रो प्रोजेक्ट मिशन चांद से ज्यादा कठिन नजर आ रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों ने चंद्र यान अपनी तकनीक और अपने दम पर तैयार किया। पर देश में अब तक ऐसी तकनीक और वैज्ञनिक पैदा ही नहीं हुए, जो मायका लाल उत्तराखंड में मेट्रो चला दे...। सुनने में आया है कि उत्तराखंड में मेट्रो का राज उसी तरह विदेश जमीं पर छुपा है, जैसे रावण की मौत का राज उसकी नाभी में छुपा था। पहले बहुत योद्धाओं ने जोर लगाया, लेकिन सफलता नहीं मिली...।

बाद में उस जमाने में भगवान राम ने लंकापति रावण की नाभी का भेदन किया था। इस युग में ठीक उसी तरह देवभूमि की सरकार के कप्तान उत्तराखंड में मेट्रो नहीं लाइन नहीं बिछ पाने के राज को खोजने के लिए विदेश जाने को पूरी तैयारी में हैं। उन्होंने तय किया है कि इस बार तो मेट्रो का हल खोजकर ही लाएंगे। चाहे जो जाए। अगर फिर भी हल नहीं मिला, तो अगले साल फिर से दौरा हो पाए...इसका रास्ता भी इसी बार खोज आएंगे...। वेसे ये राज की बात थी, जो मैने आपको बता दी...।
                                        
                                                              ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)

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