खास पहल : बीज बम से बचेंगे जंगल और जंगली जानवरों से लोग

...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
उत्तरकाशी से निकला बीज बम अभियान अब देशभर में पहुंच चुका है। लोग जंगलों में बस की तरह बीज से भरे बम गोले फेंकते हैं और पौधे उग आते हैं। दरअसल, यह एक पर्यावरण संरक्षण का अभियान है। इसके जरिये जंगलों में फलदार, छायादार और अन्य तरह के औषधीय पौधों को कम खर्च में उगाये जाने का सफल प्रयास किया जा रहा है। 100 से अधिक जगहों पर अब तक इस अभियान को चलाया गया और ज्यादात्तर जगहों पर इसे सफलता मिली है। आज से बीज बम अभियान उत्तराखंड में भी सरकार के सहयोग से चालये जाने की शुरूआत हो गई है। पहली बार इस अभियान को सरकार ने आधिकारिक रूप से हरेला कार्यक्रम में शामिल किया है।


वन्यजीवों से बचाएगा
बीज बम ऐसा अभियान है, जिससे जंगलों में पौधे तो उगेंगे ही। लोगों को जगली जानवारों खासकर बंदर और लंगूरों से मुक्मि मिलेगी। बंदर अब गांवों में आकर घरों से सामान उठा ले जाते हैं। इतना ही नहीं लोगों पर भी हमला करते हैं। बीज बम के जरिये जंगली जानवारों को जगहल में ही खाना उपलब्ध कराना है। उसके लिए बीज बम के जरिए जंगलों में फलदार बीजों को एक मिट्टी और गोबर के गोले के भीतर अलग-अलग तरह के बीज रखकर फेंका जाता है। जिसके बाद वही बीज पौधे बनते हैं। प्राकृतिकतौर पर उगने वाले पौधे काफी तेजी से बढ़ते हैं।

देशभर में बीज बम अभियान
बीज बम अभियान 25 से 31 जुलाई तक पूरे देश में चलेगा। कुछ राज्यों में इस ‘बीज बम सप्ताह‘ नाम भी दिया गया है। हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) से जुड़े 40 युवा इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 500 से ज्यादा लोग अभियान से जुड़ चुके हैं। बीज बम अभियान के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल कहते हैं कि यह कोई नई बात नहीं है। जापान और दूसरे देशों में ये तकनीकी सीड बॉल के नाम प्रचलित है और वहां यह एक परंपरा बन चुकी है।

कम खर्च, ज्यादा फायदा
पौधारोपण में काफी खर्च होता है। जबकि बीज बम अभियान शून्य बजट अभियान है। द्वारिका सेमवाल का कहना है कि इसमें मिट्टी और गोबर को पानी के साथ मिलाकर एक गोला बनाते हैं। जलवायु और मौसम के अनुसार उस गोले में कुछ बीज डाल दिये जाते हैं। इस बम को जंगल में कहीं भी छोड़ देते हैं। सबसे पहले इसका प्रयोग उत्तरकाशी जिले के कमद से की। उनका पहला प्रयास सफल रहा। उन्होंने पहले बेल वाली सब्जियों के बीजों पर प्रयोग किया।

वैज्ञानिक भी देते हैं सलाव
फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक भी इस तकनीक को अपनाने की सलाह देते हैं। इसके तहत अगर जंगलों में खाद्य श्रृंखला तैयार की जाए तो परंपरागत फसलों को भी वन्य जीवों से बचाया जा सकता है। बीज बम में अल्पकालीन और दीर्घकालीन दोनों तरह के बीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अल्पकालीन बीजों में कद्दू, मटर, लौकी, मक्का जैसी मौसमी सब्जियों और अनाजों के बीज शामिल हैं, जो एक या दो महीने में खाने के लिए तैयार हो जाते हैं। दीर्घकालीन बीजों में स्थानीय जलवायु के अनुसार आम, आड़ू, शहतूत, सेब, नाशपाती जैसे फलों के बीज बम के डालकर फेंके जा रहे हैं।

फैलता जा रहा है अभियान
बीज बम अभियान काफी तेजी से फैल रहा है। ये अभियान अब बड़ा रूप लेने लगा है। अभियान से जुड़ने के लिए लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। अब तक तीन सौ से ज्यादा ग्राम पंचायतें और दो स्कूलों ने अभियान में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है। अधिकांश की सहमति भी मिल चुकी है।
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सुना है CM साबह गुस्से में हैं...पर चैंपियन को देखते ही गुस्सा ठंडा हो जाता है

चैंपियन ने उत्तराखंड की मां-बहिन की। ये सरकारी गुंडा खुलेआम उत्तराखंड के जनमानस की भावनाओं का बलात्कार करता है। बार-बार करता है। सरकार चुप है। पार्टी चुप है। तर्क ये कि हम लोकतांत्रिक हैं। किस बात के लोकतांत्रिक ? क्या आपकी पुलिस भी लोकतांत्रिक हो गई ? कानून को तो अपना करना चाहिए। करना चाहिए या नहीं ? या आप करने नहीं दे रहे हैं ? और हां सीएम साहब आपकी बहादुरी को सलाम। चैंपियन की गालियों और हथियारों ने आपको आहत नहीं किया, लेकिन खुद पर अभद्र टिप्पणी हुई तो आप बौखला गए। उत्तराखंड आपसे नहीं, हम और आप उत्तराखंड से हैं...। 

 source...www.travelerbase.com
ये ठीक है कि राजपाल रावत ने अभद्रता की। उनको ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, ये भी उतना ही सच है कि आपकी सरकार ने भी उनके परिवार के साथ अभद्रता की है। क्या राजपाल कोई आतंकी था, जो पुलिस उसके घर में जबरन घुस गई ? क्योंकि वो चैंपियन नहीं था, उसने उत्तराखंड को भी गाली नहीं दी। उसने आपको गाली दी तो आप भड़क गए। जिस उत्तराखंड के बूते आप मुख्यमंत्री हैं, उसका अपमान आपके लिए अपमान नहीं। उसके लिए बस एक बयान दे दिया। क्यों नहीं पुलिस को आदेश देते हैं कि चैंपियन को सलाखों के पीछे डाल दो। डरते हो...कहीं आपकी कुर्सी खतरे में ना पड़ जाए...।

उत्तराखंड भी खुदको धिक्कारता होगा कि उसके नाम पर जो सत्ता की मलाई चाट रहे हैं। उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि उसे गोली देने वाले को सबक सिखा सके। उत्तराखंड रोता होगा कि खुद पर आई, तो तिलमिला गए और मेरी अस्मिता को गाली देने वाले, मेरी प्रजा को गाली देने वाले को खुली छूट। 108 के कर्मचारियों की मौत पर बन आई है। सरकार पता नहीं किस घमंड में है। सुनिए जनाब सत्ता आज है, कल होगी या नहीं। इतना तय मानिये कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो सत्ता 2022 में दूसरे छोर पर आपसे दूर खड़ी नजर आएगी। 

अभद्रता किसी को भी नहीं करनी चाहिए। आपकी सरकार तो हर रोज अभद्रता करती है। बेरोजगारों के साथ हर रोज खेल खेलती है। जब से आप सरकार में आए, बेरोजगारों को रोजगार मिलना तो दूर, जो नौकरी कर भी रहे थे, उनको आपकी सरकार ने सड़क पर ला खड़ा किया। कितने ही परिवारों की आपकी सरकार ने रोजी-रोटी छीन ली। कितने ही बच्चों से उनके अच्छे स्कूल छीन लिए। आपके कृषि मंत्री खुलेआम कहते हैं कि वो जनता के नौकर नहीं हैं। 
 
नौकरी के नाम पर आपने अखबारों को केवल खबरें और खबरों की हेडिंगें दी। रोजगार के नाम पर अब तक केवल घोषणाएं ही हुई हैं। आपके मंत्री हर दिन जनता के साथ के भरोसे को तोड़ते हैं। आप कुछ करते हैं क्या ? एक नहीं आपकी सरकार के मंत्रियों की अभद्रता के कई उदाहरण हैं। संभलिये...वैसे भी आप बहुत दूर निकल चुके हैं। पीछे मुड़कर फिर से मंजिल हासिल करना अब आपके लिए उतना आसान नहीं रहा। 
....प्रदीप रावत (रवांल्टा)


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उत्तरकाशी : यमुनाघाटी में भूकंप के झटके, घरों से बाहर निकले लोग

बड़कोट: उत्तरकाशी के यमुनाघाटी में भूकंप के तेज झटके महसूसी किए गए। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। कुछ घरों के सीसे चटकने की बातें भी सामने आई हैं। जबकि एक दो घरों में लोगों सोशल मीडिया में दरारें पड़ने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। डीएम आशीष चैहान ने एसडीआरएफ और अन्य विभागों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। उत्तरकाशी जिले में पिछले एक माह भूकंप का ये दूसरा झटका है। इससे पहले भी लगातार भूकंप के झटके आते रहते हैं। 


भूकंप के लिहाज से उत्तरकाशी जोन-5 में आता है। हालांकि अब तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। भवनों को भी किसी तरह के नुक्सान से फिलहाल प्रशासन ने इंकार किया है।
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हरदा के नाम कॉमरेड इंद्रेश मैखुरी का खुला पत्र....

आदरणीय हरीश रावत जी,

    उम्मीद है कि आप कुशल होंगे. आपकी कुशलता की खैरखबर इसलिए लेनी पड़ रही है क्यूंकि कल आपने जो विराट गिरफ्तारी दी,उससे खैर खबर लेना लाज़मी हो गया ! 

गिरफ्तारी का क्या नज़ारा था ! खुद ही एक-दूसरे के गले में माला डाल कर गाजे-बाजे के साथ तमाम कांग्रेस जन, आपकी अगुवाई में गैरसैण तहसील पहुंचे. वहाँ गिरफ्तार होने के लिए आपने तहसील की सीढ़ियाँ भर दी. जेल भरो आंदोलन तो सुनते आए थे पर जेल भेजे गए आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी के विरोध में “तहसील की सीढ़ियाँ भरो” आंदोलन,आपके नेतृत्व में पहली बार देखा. क्या नजारा था-आपके संगी-साथियों ने एस.डी.एम से कहा,हमें गिरफ्तार करो क्यूंकि हमारे 35  साथी जेल भेज दिये गए हैं. स्मित मुस्कान के साथ एस.डी.एम ने कहा-हमने आपको गिरफ्तार किया और अब हम आपको रिहा करते हैं. फर्जी मुकदमें में जेल भेजे गए आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी के ऐसे “प्रचंड” प्रतिवाद की अन्यत्र मिसाल मिलना लगभग नामुमकिन है ! एक पूर्व मुख्यमंत्री,विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान विधायक, उप नेता प्रतिपक्ष,पूर्व डिप्टी स्पीकर, पूर्व कैबिनेट मंत्री आदि-आदि अदने से एस.डी.एम को ज्ञापन दे कर गैरसैंंण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने की मांग कर रहे थे और ऐसा न होने की दशा में प्रचंड आंदोलन की चेतावनी दे रहे थे ! आंदोलन के ऐसे प्रहसन का दृश्य आपके अतिरिक्त इस प्रदेश को और कौन दिखा सकता है !


इस प्रचंड प्रतिवाद प्रहसन से पूर्व आपने कांग्रेस जनों के साथ गैरसैण नगर में जुलूस निकाला. होने को जुलूस गैरसैण को राजधानी बनाए जाने के समर्थन में था पर जुलूस में नारे लग रहे थे कि हरीश रावत नहीं आँधी है,ये तो दूसरा गांधी है. जाहिर सी बात है कि नाम भले ही गैरसैण का था,पर प्रदर्शन आपके द्वारा,आपके निमित्त था.आपके निमित्त यह सब न होना होता तो जिन आंदोलनकारियों की 3 दिन बाद जमानत हुई,वह बिना उनके जेल गए ही हो जाती. पर तब आप यह गिरफ्तारी प्रहसन कैसे कर पाते ? और हाँ आँधी क्या बवंडर हैं आप ! वो बवंडर जो पानी में या रेगिस्तान में जब उठता है तो सबसे पहले अपने आसपास वालों को ही अपने में विलीन कर देता है,वे आपमें समा जाते हैं और रह जाते हैं सिर्फ आप. जहां तक गांधी होने का सवाल है तो गांधी तो एक ही था, एक ही है,एक ही रहेगा.  गांधी के बंदर तीन भले ही बताए गए थे पर इतने सालों में वे कई कई हो गए हैं. इन बंदरों पर बाबा नागार्जुन की कविता आज भी बड़ी प्रासंगिक है. नागार्जुन कहते हैं :

बापू के भी ताऊ निकले तीनों बन्दर बापू के!
सरल सूत्र उलझाऊ निकले तीनों बन्दर बापू के!
सचमुच जीवनदानी निकले तीनों बन्दर बापू के!
ग्यानी निकले, ध्यानी निकले तीनों बन्दर बापू के!
जल-थल-गगन-बिहारी निकले तीनों बन्दर बापू के!
लीला के गिरधारी निकले तीनों बन्दर बापू के!
लम्बी उमर मिली है, ख़ुश हैं तीनों बन्दर बापू के!
दिल की कली खिली है, ख़ुश हैं तीनों बन्दर बापू के!
बूढ़े हैं फिर भी जवान हैं, तीनों बन्दर बापू के!
परम चतुर हैं, अति सुजान हैं  तीनों बन्दर बापू के! 
सौवीं बरसी मना रहे हैं  तीनों बन्दर बापू के!
बापू को हीबना रहे हैं  तीनों बन्दर बापू के!
करें रात-दिन टूर हवाई तीनों बन्दर बापू के! 
बदल-बदल कर चखें मलाई तीनों बन्दर बापू के!
असली हैं, सर्कस वाले हैं तीनों बन्दर बापू के!
हमें अँगूठा दिखा रहे हैं तीनों बन्दर बापू के!
कैसी हिकमत सिखा रहे हैं तीनों बन्दर बापू के!
प्रेम-पगे हैं, शहद-सने हैं तीनों बन्दर बापू के!
गुरुओं के भी गुरु बने हैं तीनों बन्दर बापू के! 

नागार्जुन की कविता की बात इसलिए ताकि “प्रेम पगे,शहद सने,परम चतुर,अति सुजानों” को यह भान रहे है कि  कहीं पे निगाहें,कहीं पे निशाना की तर्ज पर गैरसैण पर निगाहों वालों का निशाना किधर है,यह बखूबी समझा जा रहा है !

वैसे एक प्रश्न तो आप से सीधा पूछना बनता ही है हरदा कि आपके मन में गैरसैण कुर्सी छूट जाने के बाद ही क्यूँ हिलोरें मार रहा है ?आखिर जब आप मुख्यमंत्री थे तब आपको गैरसैण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने की घोषणा करने से किसने रोका था ? आप घोषणा कर देते तो जिन साथियों को चक्काजाम करने की आड़ में जेल भेजा गया, न वे चक्काजाम करते,न मुकदमा होता,न उन्हें जेल जाना पड़ता. पर आपके राज में तो मुझे ही अपने साथियों के साथ गैरसैण के विधानसभा सत्र के दौरान स्थायी राजधानी की मांग करने के लिए पदयात्रा करने पर जंगल चट्टी से आपकी पुलिस ने कभी आगे नहीं बढ़ने दिया. अर्द्ध रात्रि में एस.डी.एम और पुलिस भेजी आपने,हमें धमकाने को ! ऐसा आदमी अचानक गैरसैण राजधानी की मांग का पैरोकार होने का दम भरता है तो संदेह होना लाज़मी है. साफ लगता है कि यह सत्ता,विधायकी,सांसदी गंवा चुके व्यक्ति की स्टंटबाजी है. 

राजनीति में ऊंचे कद वाले राजनेता अपनी स्टेट्समैनशिप के लिए जाने जाते हैं. पर आपको देख कर लगता है कि आपके पास केवल स्टंटमैनशिप है. आपकी स्टंटमैनशिप कायम रहे,आप सलामत रहें. 
  

भवदीय 
इन्द्रेश मैखुरी
हरदा के नाम कॉमरेड इंद्रेश मैखुरी का खुला पत्र.... हरदा के नाम कॉमरेड इंद्रेश मैखुरी का खुला पत्र.... Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, July 14, 2019 Rating: 5

BJP बहुत चतुराई से कव्वे को भी तीतर बताकर खा जाती है...

माननीय मुख्यमंत्री,
Trivendra Singh Rawat जी 
मेरा यह प्यारा-प्यारा ई-पत्र आपको समर्पित है..

आपने बहुत ठीक कहा पौधा मैंने लगाया, अवश्य मैंने लगाया। मेरा लगाया पौधा, पानी व फ्रूटी बॉटलिंग प्लांट का था, आपने बहुत ही कुशल माली के तौर पर उसपर #हिलटॉप की कलम लगा दी है। तो यदि कुछ गुण मुझमें हैं तो कुछ बड़े गुण आपमें भी हैं, आप बड़े कलमकार हैं।

मेरे कार्यकाल में केवल लाइसेंस दिया गया जिसपर आगे की कार्रवाई आपकी पार्टी सहित स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए रोक दी गई। यदि आप व्हिस्की बनाने का लाइसेंस नहीं देना चाहते तो आपकी सरकार लाइसेंस का रिनुअल नहीं करती। आपकी सरकार ने लाइसेंस का रिन्यूअल ही नहीं किया बल्कि दो बार इस व्हिस्की प्लांट को निरापत्ति प्रमाण पत्र भी दिया क्योंकि ऐसी प्रशासनिक अनुमति के बिना ना तो निर्माण कार्य हो सकता है और ना व्हिस्की की ब्लेंडिंग व बॉटलिंग हो सकती है तो निरापत्ति प्रमाण पत्र भी कहीं ना कहीं सरकार की सहमति से ही दिया गया है। 

BJP Uttarakhand बहुत चतुराई से कव्वे को भी तीतर बताकर खा जाती है। आज आपने भांग व व्हिस्की के बॉटलिंग प्लांट में रोजगार व पहाड़ी फलों की खपत देखी है, धन्यवाद। भाजपा प्रवक्ता हिमाचल में लगी डिस्टलरीज का भी उदाहरण दे रहे हैं, जब मैंने #उत्तराखंड में बिकने वाले ब्रांड्स जो अपनी व्हिस्की में या बियर में 20% उत्तराखंडी फलों व सब्जियों के रस की ब्लेंडिंग करेंगे उन्हें राज्य में 20% मार्केटिंग राइट्स दिये, आपकी पार्टी ने इस नीति का घोर विरोध किया। ये आपकी ही पार्टी थी जिसने वाणिज्यिक भांग की खेती के हमारे कदम का भी विरोध किया और जब हम वाणिज्यिक भांग की खेती संबंधी विधेयक #गैरसैंण में लेकर के आये तो आपकी पार्टी ने उसका भी विरोध किया। हमारे द्वारा किये गये संशोधनों का, जो आबकारी नीति में किये गये और जिसके माध्यम से हमने मंडी को वायनरीज लगाने का निर्देश दिया, आपकी पार्टी ने उसका भी विरोध किया। 

आप मीठा-मीठा गप-गप और कड़वा-कड़वा थू-थू नहीं कर सकते। ये आपकी पार्टी के आंदोलन का प्रभाव था, जिसके चलते #देवप्रयाग क्षेत्र के तत्कालीन विधायक ने मुझे बाध्य किया कि मैं प्रदत लाइसेंस पर कार्रवाई को तत्काल रोक दूं, मैंने कार्यवाही रोकी। अब आपने भी भांग की खेती की बात की है, मैंने स्वागत किया। मगर आप हिलटॉप के नाम पर रोजगारदाता बनें, फलों को खपाने वाले बनें और लाइसेंस देने की नीति के लिये मुझे दोष दें, दोनों एक साथ नहीं चल सकते हैं। 

हमने मैदानों में डिस्टलरीज, फूटहिल्स में वाईनरीज व रागी बीयर प्लांट तथा मध्य हिमालय में फ्रूट वाइन्स व वाटर तथा ऑयल बॉटलिंग प्लांट लगाने की नीति पर काम किया, समय कम मिला, हम इन नीतियों को पूर्णत: धरातल पर नहीं उतार पाये। आपकी पार्टी को भी अब हमारी ही इस नीति का अनुसरण करना पड़ेगा और इसके लिये सत्यता को खुलकर स्वीकार करें। साहस दिखाएं, आपकी पार्टी तो उत्तराखंड में डेनिस व स्टिंग-स्टिंग के गर्भ से पैदा हुई है, जैसा बोया अब आप वैसा काटने को तैयार रहें। हर बात के लिये हमें दोष देना छोड़िए, हमने जो अच्छा किया है उसे स्वीकारते हुए आगे बढ़िये। हमारा कोई निर्णय अच्छा नहीं है तो उसे समाप्त करने के लिये ही तो जनता ने आपको चुना है।
भवनिष्ठ 
हरीश रावत


BJP बहुत चतुराई से कव्वे को भी तीतर बताकर खा जाती है... BJP बहुत चतुराई से कव्वे को भी तीतर बताकर खा जाती है... Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, July 13, 2019 Rating: 5

दुर्गम में शिक्षा को सुगम बनाने की साधना में जुटे हैं दिनेश रावत

गडोली (उत्तरकाशी): नौगांव ब्लाक के कोटी गांव (बनाल) निवासी दिनेश रावत पिथौरागढ़ के मेतली विद्यालय में तैनात हैं। स्कूल तक पहुंचने के लिए उनको सड़क से 8 से 10 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। इतना ही नहीं उत्तरकाशी के रवांई से दिनेश को अपने तैनाती स्थल तक पहुंचने में करीब दो-तीन दिन लग जाते हैं। अति दुर्गम के विद्यालय में तैनाती के बावजूद वो अपने स्कूल में तो शिक्षा की राह आसान कर ही रहे हैं। अपने शोध कार्यों के जरिए प्रदेशभर के बच्चों की शिक्षा की राह भी आसान कर रहे हैं। उनको हाल ही में उत्तकृष्ट शिक्षक सम्मान से भी नवाजा गया। 


राष्ट्रीय युवा पुरस्कार समेत कई हासिल कर चुके दिनेश रावत स्कूल के अलावा भी प्रदेशभर के विद्यालयों के लिए तैयार किए जाने वाले शैक्षिक गतिविधियों के लिए भी समय देते हैं। साथ ही शिक्षक ट्रेनिंग प्रोग्राम बनाने में भी शिक्षा विभाग में योगदान देते रहते हैं। इसके लिए वो कई बार पिथौरागढ़ से देहरादून और दूसरी जगहों की दौड़ लगाते रहते हैं। बच्चों को नवाचारी शिक्षा को लेकर दिनेश रावत कई तरह से बच्चों को पढ़ाते हैं। 

नई राहें के जरिए उन्होंने अपने अति दुर्गम के विद्यालय के बच्चों में लेखन का रुचि की जगाई। उनके विद्यालय की पहली बार पत्रिका प्रकाशित हुई। पत्रिका में बच्चों के लेखों के अलावा कई प्रसिद्ध लेखकों और विचारकों के लेख भी शामिल किए गए थे। स्कूल को सजाने से लेकर बच्चों को अपनी संस्कृति के प्रति भी जागरूक करते रहते हैं। उन्होंने विद्यालय में नए बच्चों के प्रवेश के लिए अभियान भी चलाया। इतना ही नहीं। बच्चों के स्वागत के लिए भव्य कार्यक्रम तक आयोजित किए।

अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं। वो टीम रवांई लोक महोत्सव के भी अहम अंग हैं। महोत्सव के लिए पिथौरागढ़ से आकर संचालन का पूरा जिम्मा संभालना संस्कृति के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। दिनेश रावत की अब तक चार पुस्तकें भी सामने आ चुकी हैं, जिनमें तीन कविता संग्रह और एक रवांई के लोक के इतिहास पर आधारितर है। इसके अलावा देश की कई बड़ी पत्रिकाओं में उनके लेख छपते रहते हैं।

दुर्गम में शिक्षा को सुगम बनाने की साधना में जुटे हैं दिनेश रावत दुर्गम में शिक्षा को सुगम बनाने की साधना में जुटे हैं दिनेश रावत Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, July 13, 2019 Rating: 5

लोकु नि बोली तु बल कि यू ठीक मनखी, पर यु त...?

लोगों ने कहा था ठीक आमदी है, पर ये तो...?
  ब्वाडा चिट्ठी भी कल ही आई और बोडी ने भी कल ही फोन किया था। दोनों बहुत क्रोधित हैं। अभी ब्वाडा की चिट्ठी में लिखी गहरी बातें पढ़कर समझने का गंभीर प्रसास कर ही रहा था कि बोडी का भी फोन घनघना गया। उनके लिए मैंने अलग ही टोन लगा रखी है। किसी का फोन उठे ना उठे बोडी को तो उठाना ही उठाना है। ब्वाडा की चिट्ठी जैसा गुस्सा बोडी के फोन से सीधे मेरे कान के पर्दों पर पड़ रहा था। किसी तरह उनको शांत किया...फिर अपनी बात कही। पर उन्होंने सुनी ही नहीं। अपनी ही सुना दी। उनकी बातें बड़ी खतरनाक होती हैं...। बातें कम घात-जैंकार ज्यादा। 

ब्वाडा जी के लिए इमेज परिणाम108 वालों की हड़ताल के बारे में ब्वाडा और बोडी को सबकुछ पता है। ब्वाडा ने चिट्ठी से लानत भेजी है और बोडी ने फोन से मेरे कानों के जरिए निंदा सेंड की है। खैरासैंण के सूरज की तो इस बार खैर नहीं थी। वैसे तो पहले भी दोनों ने घात-जैंकार पूजी रखी है, पर इस बार तो...हरे राम-राम...। ऐसी-ऐसी घात कि बताने से भी लगता है। 

बोडी ने सीधे कह डाला गैरसैंण नहीं तो अगली बार खैरासैंण भी नहीं। ब्वाडा की चिट्ठी का मजमून भी कुछ ऐसा ही है कि बेटा रुकजा अगली बार तो लट्ठ से लठियाएंगे। अगर वोट मांगने आए तो। ब्वाडा को फोन लगाया वापस तो मुझे ही पूज दिया ढंग से। मेरी गलती बस इतनी थी कि...उस बिचारे की क्या गलती है। अक्ल ही उतनी है, तो वो भी क्या करेंगे। फिर कुछ नरम हुए...। वरना मेरा पहाड़ से हमेशा के लिए पलायन समझो। 

जमीन वाले मसले पर ब्वाडा ने चिट्ठी नहीं लिखी...उस चिट्ठी को ग्रंथ भी घोषित किया जा सकता है। उनका गुस्सा इस बात पर भी था कि टीवी में बयान आ रहा था बल कि स्थानीय लोगों ने कहा बल की हमको जमीन बेचनी और खरीदनी है। माफिया राज की जय हो...और फुल स्टाॅप लगा दिया। फिर थोड़ा डाॅट-डाॅट...करके आखिर में गजब लिख दिया। झूठ बोलना भी सीख गया बल ये लाटा अब। धन हो राजनीति। पहले तो ऐसा नहीं था बल। लोकु नि बोली तु बल कि यू ठीक मनखी, पर यु त...? और बहुत सारी बातें हैं...जो बोली हैं। उनका कल-परसों में फुरसत लगी तो फिर से लिख भेजूंगा...आपके मोबाइल में...।
...प्रदीप रावत (रवांल्टा) 
लोकु नि बोली तु बल कि यू ठीक मनखी, पर यु त...? लोकु नि बोली तु बल कि यू ठीक मनखी, पर यु त...? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, July 13, 2019 Rating: 5

धर्मानंद राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर में जल्द शुरू होंगी स्नात्कोत्तर कक्षाएं

नरेंद्र नगर: कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि धर्मानंद राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर को आदर्श और राज्य का सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय बनाना उनका लक्ष्य है। उन्होंने काॅलेज के नए भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इसके विकास के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। कार्यक्रम के दौरान सुबोध उनियाल ने काॅलेज के विकास के लिए कई योजनाओं की घोषणा भी की।
 
सुबोध उनियाल ने कहा कि जल्द महाविद्यालय में स्नात्कोत्तर कक्षाएं शुरू की जाएंगी। नवनिर्मित परिसर तक पहुंचने के लिए धौड़ा पानी से परिसर तक पैदल मार्ग बनाए जाने की घोषणा की। महाविद्यालय में कक्षाओं के संचालन के लिए अस्थाई पर टीन सेड के निर्माण, की घोषण भी की। सुबोध उनियाल ने कहा कि महाविद्यालय में मेघावी छात्रों के प्रोत्साहन के लिए उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता की स्मृति में छात्रवृति योजना के तहत दो लाख देने की बात कही। इसके अलावा महाविद्यालय में पुस्तकों के लिए 3 लाख, फर्नीचर के लिए दो लाख और  कालेज में अतिरिक्त भवन निर्माण के लिए 20 लाख देने की घोषणा की। 

महाविद्यालय परिसर के लोकार्पण के बाद कालेज परिसर में पौधरोपण किया गया। इस अवसर पर कालेज के नवनिर्मित बहुउद्देशीय हाॅल मंे छात्रसंघ वार्षिकोत्सव में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. जानकी पंवार ने सभी का आभार जताते हुए कालेज की प्रगति रिपार्ट भी प्रस्तुत की।


धर्मानंद राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर में जल्द शुरू होंगी स्नात्कोत्तर कक्षाएं धर्मानंद राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर में जल्द शुरू होंगी स्नात्कोत्तर कक्षाएं Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, July 12, 2019 Rating: 5

संसद में गढ़वाली में बोले अनिल बलूनी : दान-सयांणु कु बल बोलियूं अर औंलु कु स्वाद...बाद मा औंदु याद

नई दिल्ली : राज्यसभा सांसद और भाजपा राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने आज संसद में अपने संबोधन की शुरुआत गढ़वाली में की। उन्होंने एक गढ़वाली कहावत "दाना सयांणु कु बल बोल, औंलु कु स्वाद, बाद मां औंदु याद।" से नोटबंदी और जीएसटी के फायदे गिनाए। 

उन्होंने इस कहावत के जरिए मोदी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी के फैसलों के दूरगामी परिणामों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग लोगों की कही हुई बातें और आंवले का स्वाद बाद में ही पता चलते हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी निर्णय। से दीर्घकालिक प्रभाव पढ़ेंगे।


अनिल बलूनी के गढ़वाली में संबोधन से गढ़वाली को लाभ होगा। उम्मीद करते हैं कि अपनी भाषा के प्रति उनका समर्पण और प्रतिबद्धता आगे भी जारी रहेगी। अनिल बलूनी ने पिछले कुछ समय में विकास कार्यों और उत्तराखंड को लेकर अपनी सोच को साफ किया है कि वह किसी भी हाल में उत्तराखंड से जुड़े रहना चाहते हैं।

पलायन को लेकर मेरा वोट मेरे गांव अभियान न खासी सुर्खियां बटोर रहा है। और इस अभियान से लोग बड़ी संख्या में जुड़ भी रहे हैं। सोशल मीडिया पर अनिल बलूनी की इस मुहिम को लोग खूब पसंद  रहे हैं और उससे जुड़ रहे हैं
संसद में गढ़वाली में बोले अनिल बलूनी : दान-सयांणु कु बल बोलियूं अर औंलु कु स्वाद...बाद मा औंदु याद संसद में गढ़वाली में बोले अनिल बलूनी : दान-सयांणु कु बल बोलियूं अर औंलु कु स्वाद...बाद मा औंदु याद Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, July 11, 2019 Rating: 5

30 साल से लकड़ी के पुल को संवार रहे हैं ग्रामीण, नेताओं ने वादे किए, निभाए नहीं

बिगराड़ी (बड़कोट): 30 सालों में बहुत कुछ बदल गया। गांव खाली हो गए। शहर कंकरीट की इमारतों में दब्दील हो गये। लेकिन, उत्तरकाशी जिले के नौगांव ब्लाक में बिगराड़ी ग्रामसभा और करनाली ग्रामसभा को दुनकेश्वर महादेव मंदिर के पास जोड़ने वाला पुल पिछले 30 सलों में आज तक नहीं बना। खास बात यह है कि ये पुल पिछले 30 सालों से सामुहिक प्रयास और जिम्मेदारियों पर टिका है। हैरानी इस बात की है कि चाहे लोकसभा से लेकर विधानसभा, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तक हर चुनाव में नेता आते हैं। वादे करते हैं लेकिन, फिर अगले पांच साल तक लौटकर नहीं आते। इस पुल के साथ भी ऐसा ही हुआ, जो भी नेता आया। सबने वादे किए, लेकिन उनको निभाया किसीने भी नहीं। 

दो ग्राम सभाओं को जोड़ने वाला पुल

दो ग्राम सभाओं और गांव को जोड़ने वाला पुल करीब 30 साल पहले बनाया गया था। पुल करनाली और बिगराड़ी गांवों के लोगों के लिए खासा महत्वपूर्ण है। दोनों गांवों की खेती साझा है। बगीचों तक पहुंचने का भी यह पुल एक मात्र जरिया है। लकड़ी से बना ये पुल अब जर्जर हो गया है। इसकी हातल बदहाल है। लोगों ने इस बार भी सामुहिक प्रयासों से एक बार फिर से इसकी मरम्मत की है।

सामुहिक प्रयायों से मरम्मत

इतना ही नहीं पिछले 30 सालों से लोग सामुहिक प्रयायों से इसकी मरम्मत कर रहे हैं। लोगों ने पुल को चलने लायक बनाए रखने के लिए वन विभाग से छपान में मिलने वाली लकड़ी को पुल के लिए दान कर दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुल लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

जर्जर है लकड़ी से बना पुल 

पुल की जर्जर हालत के कारण इस पर जाने से भी डर लगता है, लेकिन लोगों की मजबूरी है कि लकड़ी के इसी जर्जर पुल से उनको अपने रोजमर्रा के कामों के लिए जाना है। विकास के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन किसीने इस पुल की सुध नहीं ली। विधायक से लेकर क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तक कोई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन कहीं से भी इसके लिए बजट नहीं मिला।
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भाजपा से बिगड़ैल चैंपियन आउट!

देहरादून : भाजपा विधायक चैंपियन को तमंचे पर डिस्को भारी पड़ गया है। केंद्रीय नेतृत्व उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की संस्ततुति कर दी है। भाजपा प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू ने केंद्रीय नेतृत्व को चैंपियन के निष्कासन की सिफारिश कर दी है। चैंपियन पर कार्रवाई को लेकर जाजू ने कहा कि चैंपियन अभी से पार्टी से निष्कासित माने जाएं।


अनुशासन तोड़ने के मामले में चैंपियन पहले से ही तीन माह के लिए पार्टी से निलंबित हैं। पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में उनके भाग लेने पर प्रतिबंध है। बुधवार को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो को लेकर चैंपियन फिर विवादों में आ गए हैं। इस वीडियो में वे उत्तराखंड राज्य को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं। 


राज्य सभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने भाजपा विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के आचरण पर बेहद नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने भी चैंपियन के खिलाफ  सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। बलूनी ने कहा कि विधायक का आचरण अशोभनीय और आदर्श मर्यादा के विपरीत है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। पार्टी विधायक के इस व्यवहार की निंदा करती है और इस पर शीघ्र ही कड़ा निर्णय लिया जाएगा। बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य लंबे संघर्ष और बलिदानों के बाद मिला है।

                                                   


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अनिल बलूनी ने कहाः चैंपियन पर एक्शन लेगी भाजपा, राज्य का अपमान

नई दिल्ली: विवादों में रहने वाले विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन के वायरल हो रहे वीडियो पर राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख भाजपा अनिल बलूनी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा की विधायक का व्यवहार अशोभनीय और आदर्श मर्यादा के विपरीत है, इससे स्वीकार नहीं किया जा सकता। पार्टी विधायक के इस व्यवहार की निंदा करती है और इस पर शीघ्र ही कड़ा निर्णय लेगी।

 


 वीडियो में विधायक असली लहराते हुए उत्तराखंड को गाली देते हुए दिखाई दे रहे हैं। सांसद बलूनी ने कहा उत्तराखंड राज्य लंबे संघर्ष और बलिदानों के बाद मिला है, चैंपियन उस मर्म को नहीं जानते हैं, और न ही उनके मन में राज्य के प्रति कोई सम्मान और आदर प्रतीत होता है। उनका राज्य को गाली देना असहनीय है। पार्टी ने उनके बयान को गंभीरता से लिया है और समय आने पर पार्टी प्रभावी प्रतिक्रिया देगी।

 
निरंतर विवादों में रहने वाले प्रणव चैंपियन कभी तमंचे लहरा कर, कभी साथी विधायक पर अभद्र टिप्पणियां करके चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने एक चैनल के पत्रकार के साथ उत्तराखंड सदन दिल्ली में अभद्रता की थी। सांसद बलूनी ने कहा है की पार्टी ऐसी गुंडागर्दी की संस्कृति बर्दाश्त नहीं करती है और अपने जनप्रतिनिधियों से सभ्य शालीन और उच्च आदर्शों की अपेक्षा करती है।
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झा के जादू से बाहर झांको, लाटा चचा, जुल्म न करो

  • गुणानंद झखमोला
उत्तराखंड सूचना आयोग के मुख्य आयुक्त का ड्राईवर तदर्थ नौकरी पर है। उसकी बेटी प्राची ने अपने पिता के सपनों को रंग देने की कोशिश की है। उसने हाल में नीट क्वालीफाई किया है। नीट तो पास हो गयी पर अब चार लाख रुपये सालाना फीस कहां से लाएगी? चार साल, चार लाख फीस, ऊपर के खर्चे अलग। हास्टल की फीस, रहना-खाना आदि अलग।
त्रिवेंद्र चचा सोचो, आप भी तो दो बेटियों के पिता हो। चचा बुरा न मानना, आपके स्वास्थ्य सचिव नीतिश झा का दिमाग सातवें आसमान पर है। चचा आपने इस बिहारी दंपति को इतना सिर चढ़ा दिया है कि वह अपने को खुदा समझने लगे हैं और उत्तराखंडी उन्हें कीड़े-मकोड़े नजर आ रहे हैं। चचा कुछ सोचो, आप तो अच्छे इंसान गिने जाते थे। आप पर काले जादू का असर है। आपको पता है, बिहार के पटना के आईजीआईएमएस मेडिकल कालेज की सालाना फीस 36 हजार है।

 

दरभंगा मेडिकल कालेज की 9000, चम्पारन की 13000, दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कालेज की 2445 और लेडी हार्डिंग की मात्र 1355 रुपये सालाना फीस है। लखनऊ केजीएमआई की 80 हजार है। तो चचा आप बताओ, हल्द्वानी और दून मेडिकल की फीस चार लाख क्यों? क्या हम पहाड़ियों को अपने ही राज्य में डाक्टर बनने का अधिकार नहीं? बोलो चचा, क्या तुम्हारा दिल नहीं पसीजता? क्या बेटियों को डाक्टर बनते नहीं देख सकते? प्लीज, कुछ करो चचा, ऐसा जुल्म न करो। बेटियों के सपनों का सवाल है।

गुस्ताखी माफी...आपकी ये पोस्ट फेसबुक पर काफी वायरल हो रही है। हमने सोचा कि अपने पाठकों के लिए भी पेश कर दी जाए।

नोट: लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। जनपक्षीय मसलों पर हमेशा से ही बेबाक लिखते आए हैं। और हां बेबाकी से बोलते भी हैं।


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बीरोंखाल से कोटद्वार आ रही बस गिरी, 4 लोगों की मौत

पौड़ी : बीरोंखाल से कोटद्वार आ रही जीएमओ की बस सतपुली-रीठाखाल मार्ग पर सांग्लाकोटी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें मौके पर ही 4 लोगों की मौत हो गई।जबकि करीब 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटीसैंण भेजा गया है। गंभीर घायलों को हायर सेंटर भेजा गया है। 


बताया जा रहा है कि बस बीरोंखाल से कोटद्वार की ओर आ रही थी, जिसमें करीब 20-22 लोग सवार बताए जा रहे हैं। हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 16 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। हादसे की सूचना मिलने के बाद गुमखाल और सतपुली पुलिस मौके पर पहुंच गई है। साथ ही पौड़ी डीएम धीराज गर्राब्याल घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं।
बीरोंखाल से कोटद्वार आ रही बस गिरी, 4 लोगों की मौत बीरोंखाल से कोटद्वार आ रही बस गिरी, 4 लोगों की मौत Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, July 09, 2019 Rating: 5

उत्तरकाशी : बौन गांव में घुसा उफनाए नाले का मलबा और पानी, घरों से बाहर निकले लोग

उत्तरकाशी।  मंगलवार सुबह से ही प्रदेश भर में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। उत्तरकाशी के सांसद आदर्श ग्राम बौन में अचानक गांव के बीच बहने वाला नाला उफान पर आ गया, जिससे भारी मलबा लोगों के घरों के आंगन में घुस गया।


मलबा आने से घबराए लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। बड़ेति के पास गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद हो गया। इस कारण वाहनों को बाईपास किया गया है। इधर, यमुना घाटी में भी नौगांव-राजगढ़ी मोटर मार्ग भी भारी मलबा आने से बंद हो गया है। कई अन्य जगहों पर भी बारिश के कारण भूस्खलन होने की खबरें सामने आ रही हैं। 

देहरादून में भी सुबह से ही लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है। पहाड़ी जिलों में आपदा के लिहाज से संवेदनशील जगहों पर सतर्क रहने के लिए कहा गया है। दरअसल, मौसम विभाग ने आज से प्रदेश के 8 जिलों में भारी से भारी बारिश होने की आशंका पहले ही जता दी थी, जिसको लेकर अलर्ट भी जारी किया गया था। हालांकि अलर्ट के हिसाब से ज्यादातर जगहों पर व्यवस्थाएं नजर नहीं आई।
उत्तरकाशी : बौन गांव में घुसा उफनाए नाले का मलबा और पानी, घरों से बाहर निकले लोग उत्तरकाशी : बौन गांव में घुसा उफनाए नाले का मलबा और पानी, घरों से बाहर निकले लोग Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, July 09, 2019 Rating: 5

जीतने के बाद कह देगा कि मैं देहरादून वाला हूं...तब क्या करोगे ?

  • प्रदीप रावत (रवांल्टा)
पंचायत चुनाव आने वाले हैं। तैयारियां जोरों पर हैं। सरकार ने इस बार कई उम्मीदवारों को पहले ही मैदान छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। जो मैदान में उतरने लायक हैं, वो घनघोर तैयारी में हैं। दारू की बातलें अभी से खोली जाने लगी हैं। पहले 40-50 रुपये की कच्ची में काम चल जाता था। अब 250-300 रुपये कम वाली को कोई पूछता ही नहीं। ये पीड़ा उनकी है, जो तैयारियों में लगे हैं। सुनो गांव वालों...सुना है, फलां देहरादून से चुनाव लड़ने वापस वा रहा है। संभलकर रहना। कहीं आपने जीता दिया और बाद में वो कहने लगे कि मैं तो देहरादून वालों हूं, फिर पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं लगने वाला...।


पंचायत चुनाव में इस बार कुछ ज्यादा ही युवा कूदने का मन बना रहे हैं। केवल मन ही नहीं बना रहे। सरकार ने उनको मजबूर कर दिया है। अब कहेंगे कि मजबूर कैसे किया, तो मैं बताता हूं। मजबूर ऐसा किया कि पहले वालों ने मतलब पिताजी ने तो चार बच्चों से कम पैदा किए ही नहीं। किसी-किसी पूर्व प्रधान जी के तो पांच-पांच, छह-छह तक बच्चे हैं। वो तो हो गए आउट। अब उनके बेटे, अगर गांव में होंगे, तो नये जमाने के हिसाब से उनके एक या दो बेटी या बेटा होगा। इस हिसाब तो चुनाव लड़ने के लिए वही एलिजबल हुए ना। अगर वो भी ना लड़े तो अपनी हुकमत बनी रहे। बंदा किसी दुश्मन को भी दोस्त बना सकता है। ऐसा होना सामान्य बात है...चौंकिएगा मत।

अब बात उन बाजीगरों की जो बाजी पलटने के लिए देहरादून में जमीनें बेचकर मोटा पैसा दबाये बैठे हैं। प्रधानी से लेकर जिला पंचायत तक बंदों ने नजर गड़ाई हुई है। कई तो ऐसे भी हैं, जो सरकार से अपने मुताबित सीट का जुगाड़ करने में जुटे हैं। सरकार भी उनकी बात सुनने को तत्पर है। उसका कारण है रुपया-पैसा। सरकार को भी फिर से सरकार में आने के लिए कुछ जुगाड़-उगाड़ तो चाहिए ना...। मेरा मतलब तो आप समझ ही गए होंगे। इसिलिए कहता हूं, संभलकर रहिए। ये जो प्राॅपर्टी बेचने वाले हैं। लोगों को खरीदने के लिए भी तैयार हैं। आप बिकिएगा मत। ये ठग भी तगड़े होते हैं। आप ठगने से बचिएगा। ये थोड़ा दूसरे टाइप के होते हैं। इनसे बचिएगा। ये कुछ भी कर सकते हैं। ये तो पक्का है कि जीतने के बाद ऐसा कहेंगे ही कि मैं तो देहरादून वाला हूं। फिर मत कहना बताया नहीं...।

जीतने के बाद कह देगा कि मैं देहरादून वाला हूं...तब क्या करोगे ? जीतने के बाद कह देगा कि मैं देहरादून वाला हूं...तब क्या करोगे ? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, July 08, 2019 Rating: 5

देश में चला नया भजन, ट्रिलियन-ट्रिलियन, ठन-ठन

  • रविश कुमार
5 से तुकंबदी बिठानी थी। इसलिए वाक्य से 70 हटा दिया गया। 2014-19 के बीच चला कि 70 साल में कुछ नहीं हुआ 2019 में बजट में कहा गया कि 55 साल में जो नहीं हुआ वो 5 साल में हो गया। 2 साल बाद जब मोदी सरकार के सात साल हो जाएंगे तो 70 साल बनाम 7 साल का जुमला फिट बैठेगा। 55 साल में भारत की अर्थव्यवस्था 1 ट्रिलियन डॉलर हो सकी, हमने 5 साल में ही इसके आकार में 1 ट्रिलियन डॉलर जोड़ दिया। पचपन साल बनाम पांच साल। अगले पांस साल में पांच ट्रिलियन। चार बार प से पांच आता है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 1964 में दुनिया की अर्थव्यवस्था का आकार ही 1.8 ट्रिलियन था। तब इस साइज़ में दुनिया की सारी अर्थव्यवस्था समा गई थी। आज यानी 2019 में दुनिया की अर्थव्यवस्था का आकार 87 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। 2014 में 79.29 ट्रिलियन डॉलर था। 2014 से 2019 के बीच दुनिया की अर्थव्यवस्था का आकार कोई 9 ट्रिलियन बढ़ा है। पूरी दुनिया का हिसाब है ये।
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क्या हम 55 साल के नारे की सहुलियत के लिए इस तरह का पैमान चुन सकते हैं?
1964 में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था का आकार 1.8 ट्रिलियन था तब भारत की अर्थव्यवस्था का आकार था 56.48 बिलियन डॉलर था। तब भारत की अर्थव्वस्था सातवीं बड़ी अर्थव्यवस्था मानी जाती थी। आज भारत का रैंक छठा है। 55 साल पहले 1964 में हम सातवीं बड़ी अर्थव्यवस्था थे। 1962 में चीन से युद्ध भी लड़ा गया था। इस हिसाब से देखें तो कौन सा बड़ा तीर मार लिया हमने। लेकिन क्या इस तरह से देखना चाहिए, यह सवाल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार ही पिछले पांच साल में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 1.85 ट्रिलियन से बढ़कर 2.75 ट्रिलियन डॉलर हुआ। पांच साल में हम 1 ट्रिलियन डॉलर नही जोड़ सके।

क्या अगले पांच साल में ढाई ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकते हैं?
अर्थशास्त्री कहते हैं कि 5 साल में डबल होने के लिए जीडीपी को 12 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर हासिल करनी होगी। सरकार कहती है कि अगर पांच साल में 8 प्रतिशत ही जी डी पी वृद्धि दर रहे तो लक्ष्य हासिल कर सकती है। जवाब मिलता है स्लोगन से। आशा, विश्वास और आकांझा से। हम अर्थव्यवस्था के आकार को क्यों जोड़ने लगे हैं क्या ही श्रेष्ठ और मान्य अवधारणा है? प्रति व्यक्ति आय की नज़र से देख सकते हैं। 2018 में प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत दुनिया के 187 देशों में 147 वें नंबर पर था। 2014 में 169 नंबर पर था। सुधार हुआ फिर भी हम नाइजीरिया, कांगो जैसे देशों से पीछे रह गए। प्रति व्यक्ति आय के मामले में श्री लंका भी हमसे आगे हैं। ये अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का आंकड़ा है।

मोदी सरकार अपने पांच साल का हिसाब नहीं देती। सवाल पूछो तो जनता का वोट सामने रख देती है। जनता का वोट ही तर्क है तो फिर बात ही बेकार है जो इस बजट के भाषण से सरकार ने साबित ही कर दिया। हम न आंकड़ा बताएंगे न ख़र्चा बताएंगे। न रास्ता बताएंगे। बजट के नाम पर सवा दो घंटे भाषण सुनाएंगे। हम ट्रिलियन डॉलर का जाप करेंगे और बाकी मीडिया भी जाप करेगा और फिर सारा देश करेगा। 1947 में भारत आज़ाद हुआ था। उसके चार साल पहले 1943 में बंगाल में अकाल पड़ा था जिसमें 20-30 लाख लोग मर गए थे। विभाजन का दर्द अलग झेलना पड़ा। अंग्रेज़ों ने इस देश की अर्थव्यवस्था को लूटा और ख़ज़ाना ले गए। आज़ादी से पहले भारत की जीडीपी निगेटिव हुआ करती थी। आज़ादी के बाद भारत ने लोकतांत्रिक देश के रूप में प्रतिष्ठा हासिल की। उन संस्थाओं को बनाया जिनकी बुनियाद पर आगे चलकर देश लहलहाने वाला था। वैसे आज इन्हीं संस्थाओं की दीवारें दरक चुकी हैं। कोई संस्था नहीं बन सकी जिसकी अपनी विश्वसनीयता हो। उस समय जो भी बुनियाद पड़ी उसके भरोसे श यहां तक आया है।

“आज़ादी के बाद कई दशकों तक भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर हांलाकि ख़ासी सुस्त थी, सालाना करीब 3.5 प्रतिशत, फिर भी औपनिवेशिक दौर की करीब शून्य दर की तुलना में यह बड़ी छलांग थी। “यह पंक्ति मेरी नहीं है। अमर्त्य सेन और ज़्यां द्रेज़ की है। किताब का नाम है भारत और उसके विरोधाभास। राजकमल प्रकाशन ने हिन्दी में छापा है। इसमें भारत के जीडीपी की तालिका दी गई है। 1950-51 से 1960-61 के बीच भारत की जीडीपी 3.7 रही। 1951 में भारतीय जन की जीवन प्रत्याशा 31 साल थी आज करीब 66 साल है। यह क्या बग़ैर किसी आर्थिक तरक्की के हासिल किया गया होगा? महिला साक्षरता 9 प्रतिशत से 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

क्या कल ऐसा भी होगा कि आधार न बनाने के कारण हम नेहरू या गुलजारी लाल नंदा को कसूरवार ठहराएंगे। आधार की कल्पना तो थी नहीं उस वक्त। जब मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने, उसके ही पहले ही भारत के 95 प्रतिशत हिस्से में बिजली पहुंच गई थी। 6 लाख गांवों में बिजली पहुंच गई थी। सिर्फ 18000 से कुछ अधिक गांवों में रह गई थी। हर सरकार नए मानक जोड़ती है। यह सरकार आपको सुदूर अतीत में इसलिए ले जाती है क्योंकि इसे पता है कि किसी के पास वक्त नहीं है, इतना इतिहास छानने की। हर बात को जांचने की। वित्त मंत्री को 5 साल और 5 ट्रिलियन डॉलर की तुकबंदी मिलानी थी तो 55 साल से आईं।


आज उनके पास अपने विचार क्या है? क्या इस बजट में लाल रंग के कपड़े में लिपटे बहीखाते के अलावा कोई भारतीय विचार है? नीतियों की पूरी अवधारणा शिकागो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड थेलर और कैस संस्टीन की थ्योरी पर टिकी है। यही कि लोगों को पता नहीं होता कि क्या करना है। बस उन्हें अपने हिसाब से हांकते रहो। प्रचार प्रसार का इस्तमाल करते हो। अच्छे शब्दों में इसे प्रेरणा और नैतिक शिक्षा कहते हैं।









(लेखक NDTV वरिष्ठ पत्रकार हैं।)   
देश में चला नया भजन, ट्रिलियन-ट्रिलियन, ठन-ठन देश में चला नया भजन, ट्रिलियन-ट्रिलियन, ठन-ठन Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, July 06, 2019 Rating: 5

अगले चार दिन पड़ सकतें हैं भारी, प्रदेशभर के लिए भारी से भारी बारिश का अलर्ट

देहरादून: अगले चार दिनों में प्रदेश के ज्यादतर हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। आठ जुलाई को लेकर मौसम विभाग ने एडवाजरी भी जारी कर दी है। इस दिन अधिकांश क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किरने के साथ सरकार को आवश्यक सावधानी बरतने को कहा हैं। सरकार ने सभी जिलों को अलर्ट पर रखा है। 


मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 9 जुलाई तक प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। राजधानी देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में बहुत भारी बारिश हो सकती है।

8 जुलाई तक बहुत ज्यादा बारिश होने का अनुमान है। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि ज्यादातर स्थानों पर अच्छी बारिश हो सकती है। राज्य आपदा परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मौसम अधिक खराब होने की स्थिति में उच्च हिमालयी क्षेत्रों यात्रियो के आने-जाने पर रोक लगाने को भी कहा गया है। साथ ही सड़कों के बंद होनी की स्थिति में सूचना तत्काल मुख्यालय को देन के निर्देश दिए गए हैं।
अगले चार दिन पड़ सकतें हैं भारी, प्रदेशभर के लिए भारी से भारी बारिश का अलर्ट अगले चार दिन पड़ सकतें हैं भारी, प्रदेशभर के लिए भारी से भारी बारिश का अलर्ट Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Saturday, July 06, 2019 Rating: 5

ब्रेकिंग: उत्तराखंड में जारी हुआ मौसम का रेड अलर्ट, SDRF की छुट्टियां रद्द

देहरादून: उत्तराखंड में मौसम का रेड अलर्ट जारी हो चुका है। प्रदेश में आज से मानसून दस्तक दे चुका है। इसको देखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन और प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। साथ ही एडवाइजरी भी जारी की है। जिस पर एक्शन लेते हुए एसडीआरएफ के आईजी ने प्रदेश में एसडीआरएफ छुट्टियां की रद्द कर दी हैं। 


एसडीआरएफ के जवानों को अगले 3 महीनों तक मानसून और बारिश को देखते हुए रुटीन छुट्टियां नहीं दी जाएंगी। आपातकालीन परिस्थियों को छोड़कर किसीको भी अवकाश नहीं दिया जाएगा। कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक एसडीआरएफ की सभी टीमें आपदा ग्रस्त और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में तैनात कर दी गईं हैं। 

कैलाश मानसरोवर यात्रा में अतिरिक्त एसडीआरएफ टीमों को भेजा गया है। आपदा ग्रस्त क्षेत्रों के लिए जरूरत पड़ने पर हेली सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। पहली बार एसडीआरएफ की मेडिकल टीमों को एंटी वेनम भी उपलब्ध कराए गए हैं। सांप के काटने के दौरान लोगों को एंटी वेनम दिए जाने को कहा गया है।
ब्रेकिंग: उत्तराखंड में जारी हुआ मौसम का रेड अलर्ट, SDRF की छुट्टियां रद्द ब्रेकिंग: उत्तराखंड में जारी हुआ मौसम का रेड अलर्ट, SDRF की छुट्टियां रद्द Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, July 04, 2019 Rating: 5

क, ख, ग भी नहीं जानते एक चैथाई दिव्यांग बच्चे, सही व्यवहार नहीं करते शिक्षक

देहरदून: स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया (चिल्ड्रेन विद डिसेबिलिटी) 2019 की रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। उसमें एक बड़ा खुलासा ये है कि देश में पांच से 19 साल तक की उम्र के बीच के एक चैथाई दिव्यांग बच्चे क, ख, ग तक भी नहीं पहचानते हैं। छोटी कक्षाओं में लड़कियों के दाखिले कम हो रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि मोदी सरकार में भले ही सुविधाओं में सुधार हुआ हो, लेकिन दिव्यांग बच्चों के साथ शिक्षकों का व्यवहार ठीक नहीं है। देेश में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की शिक्षा से जुड़ने का आंकड़ा सबसे कम है। यह खुलासा ताजा रिपोर्ट में किया गया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने 2017-2018 के बीच देश के सभी राज्यों में दिव्यांगों को लेकर शोध किए हैं। यूनेस्को और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने दिल्ली में रिपोर्ट जारी की है। उत्तराखंड में नौवीं 574, दसवीं में 472, ग्यारहवीं में 311 और बारहवीं में 330 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। 

रिपोर्ट में दिए गए सुझाव
  • ऐसे बच्चों को शिक्षा की विशिष्ट समस्याओं को शामिल करते हुए आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के साथ बेहतर मिलान करने के लिए आरटीई अधिनियम में संशोधन किया जाना चाहिए। राज्यों के लिए जोर देकर कहा गया है कि राज्य अनिवार्य रूप से संशाधन करें। 

  • दूसरा ये कि बच्चों तक शिक्षा कार्यक्रम पहुंचाने के लिए एक ऐसा तंत्र स्थातपित करना होगा, जो सही ढंग से शिक्षा कार्यक्रमों को ऐसे बच्चों तक पहुंचा सकें। राज्य के सभी विभाग संयुक्त रूप से मिलकर उन्हें शिक्षा से जोड़ने और योजनाओं को लागू करने पर काम करें।  

  • शिक्षा बजट में अलग से फंड का प्रावधान अनिवार्य करना चाहिए। इनोवेशन, तकनीक से विशेष बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा जाना चाहिए। दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग का व्यापक विस्तार करने पर भी जोर दिया गया है। 

  • साथ ही ऐसे बच्चों के लाभ के लिए सरकार, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और स्थानीय समुदायों को शामिल करने वाली प्रभावी भागीदारी को प्रोत्साहित करना चाहिए।

क, ख, ग भी नहीं जानते एक चैथाई दिव्यांग बच्चे, सही व्यवहार नहीं करते शिक्षक क, ख, ग भी नहीं जानते एक चैथाई दिव्यांग बच्चे, सही व्यवहार नहीं करते शिक्षक Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, July 04, 2019 Rating: 5
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