पति को बस पति रहने दो, प्रधान पति मत बनने देना

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का एलान हो गया है। पुरुषों के साथ महिलाएं उनके लिए आरक्षित सीटों पर तो चुनाव लड़ ही रही हैं। साथ ही अनारक्षित सीटों पर भी ताल ठोक रही हैं। अच्छी बात है। महिलाओं को आगे आना चाहिए। आ भी रही हैं, लेकिन उनके पीछे चुनाव प्रचार में खड़े उनके पति चुनाव प्रचार तक तो पीछे रहते हैं, चुनाव जीतते ही प्रधान पति के रोल में अपनी पत्नी को पीछे धकलेते हुए खुद आगे निकल आते हैं...। 


 
महिलाओं को इस बार संकल्प लेना चाहिए कि उन्होंने अपने पति को पति ही रहने देना है। प्रधानपति कभी नहीं बनने देना। जो काम करेंगी, अपने बूते करेंगी। वो खुद फैसले लेंगी, उनके पति उनके हिस्से को फैसला नहीं लेंगे। तय करें कि प्रधान चुनी गई हैं, तो वहीं प्रधान रहेंगी। प्रधान बनने के बाद पति को आगे कर खुद पीछे नहीं रहेंगी। लीड करेंगी। अपने पति को भी और अपनी ग्राम पंचायत को भी। 


सीनियर जर्नलिस्ट और महिला चिंतक वर्षा सिंह ने 14 सितंबर को महिला उत्तरजन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अलग-अलग उदाहरण देकर बताया कि कैसे प्रधान पति अपनी प्रधान पत्नियों को पीछे धकेलकर खुद आगे आ जाते हैं। जबकि समाज में सामान्यतौर पर जब भी कोई बात करते हैं, तो खुद को महिलाओं का हिमायती बताते नहीं थकते। उनको मानना है कि महिलाओं को खुद के अधिकारों के लड़ना चाहिए। मजबूती से मुकाबला बरना चाहिए। पति इसलिए नहीं होते के वो अपनी पत्नी के अधिकारों पर अपना अधिकार समझे। किसी भी महिला के अधिकार सिर्फ उसके अधिकार हो सकते हैं। किसी और के नहीं।  

यह स्थिति केवल प्रधानपतियों की नहीं, महिला क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों से लेकर विधासभा तक हैं। जहां महिलाओं के पति ही तय करते हैं कि उनका फैसला क्या होना चाहिए। अगर कोई महिला चुनाव लड़ने जा रही है, तो पहले उनको ये तय करना होगा कि अगर वो चुनाव जीतती हैं, तो वही सारे फैसले खुद लेंगी। किसी फैसले या काम के लिए सुझाव अपने पति से ले सकती हैं, जिन लोगों को वो प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनावी मैदान में उतरी, उनका सुझाव अधिक महत्वपूर्ण होगा। तय महिलाओं को करना है कि पतियों के लिए चुनाव लड़ रही हैं या खुद के लिए...। अपने गांव, क्षेत्र और जिले के लिए या फिर विधानसभा के लिए...।
...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
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हिंदी को संयुक्त राष्ट्रसंघ की भाषा में शामिल करने की वकालत

नरेंद्रनगरः धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में हिंदी दिवस के अवसर पर पत्रकारिता एवं जनसंचार व हिंदी विभाग की ओर से में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर छात्र छात्राओं ने निबंध, वाद-विवाद प्रतियोगिता एवं कविता पाठ में बढ़ चढकर हिस्सा लिया। निबंध प्रतियोगिता में शिवानी चमोली एवं वाद विवाद प्रतियोगिता में अंकित रंजन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. जानकी पंवार ने हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर रहे छात्र छात्राओं को बधाई देते हुए हिंदी की समृद्धि के लिए कार्य करने को प्रेरित किया।


एक सितंबर से 14 सितंबर तक चले हिंदी पखवाडे़ के अंतर्गत महाविद्यालय में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। हिंदी पखवाड़े के अंतिम दिन, हिंदी दिवस पर महाविद्यालय में ‘शब्द, सत्ता और संघर्ष’ पर निबंध प्रतियोगिता आयाजित की गई जिसमें कालेज के सभी छात्र छात्राओं ने बढ़ चढकर भाग लिया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शिवानी चमोली ने प्राप्त किया जबकि सिमर ओझा द्वितीय और संदीप बिजल्वाण तीसरे स्थान पर रहे। 

वाद विवाद प्रतियोगिता के अंतर्गत ‘जनसंचार माध्यमों में अंग्रेजी का बढता दखल’ विषय पर छात्रों ने पक्ष एवं विपक्ष पर अपने विचार व्यक्त किए। इस प्रतियोगिता में अंकित रंजन प्रथम, आकाश राजपूत द्वितीय एवं अनिल खत्री तीसरे स्थान पर रहे। इस अवसर पर विचार हिंदी के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल नैथानी ने कहा कि हिंदी को अभिव्यक्ति की सरल भाषा बताया वहीं डॉ. सृचना सचदेवा ने हिंदी के विकास के ऐतिहासिक पहलू पर चर्चा की।

डॉ. विक्रम सिंह बर्तवाल ने हिंदी को संयुक्त राष्ट्रसंघ की भाषा में शामिल किए जाने की पुरजोर वकालत की। डॉ. सुधा रानी ने कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा है जिसे कहने में हमें किसी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए। इस अवसर पर कालेज के शिक्षकों में डॉ. आराधना सक्सेना, डॉ. नूपुर गर्ग, डॉ. हिमांशु जोशी, डॉ. मनोज सुंद्रियाल, डॉ. पूजा रानी, डॉ. चेतन भट्ट, विशाल त्यागी,  रचना कठैत रावत, अजय पुंडीर आदि शामिल रहे।
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बदल गई पंचायत चुनाव की तारीख, अब इस दिन होगा पहले चरण का मतदान

देहरादून: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तारीखों का एलान भी हो चुका था और प्रदेश में आचार संहिता भी लागूं हो चुकी है। लेकिन, इस बीच चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीख जुड़ा फैसला लिया है। आयोग ने पहले चरण के चुनाव के लिए होने वाली वोटिंग की तारीख बदल दी है। 


दरअसल, पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए 6 अक्टूबर को वोट डाले जाने थे। चुनाव के दौरान ही दशहरा पर्व भी पड़ रहा है। 6 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव के दिन ही अष्टमी भी भी पड़ रही है। इसको देखते हुए चुनाव आयोग ने पहले चरण के लिए वोटिंग की तिथि को बदलकर एक दिन पहले यानि 5 अक्टूबर कर दिया है।

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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बजा 20 सितंबर से नामांकन, चुनाव आचार संहिता लागू

देहरादून : त्रिस्तरीयपंचायत चुनाव का ऐलान हो चुका है।राज्य निर्वाचन आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है। 20 सितंबर से 24 सितंबर तक नामांकन किए जाएंगे और 25 से 27 सितंबर तक नामांकन पत्रों की जांच होगी।  28 सितंबर को नाम वापसी 29 सितंबर को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाएगा।


पहले चरण के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होगा। दूसरे के लिए चुनाव चिन्ह 9 और 11 अक्टूबर को आवंटित किए जाएंगे। जबकि दूसरे और तीसरे चरण के लिए 11 और 16 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रदेश में चुनाव आचार संहिता भी प्रभावी हो गई है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बजा 20 सितंबर से नामांकन, चुनाव आचार संहिता लागू त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बजा 20 सितंबर से नामांकन, चुनाव आचार संहिता लागू Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, September 13, 2019 Rating: 5

सड़क सुरक्षा निबन्ध प्रतियोगिता में आरती, रोहित और मानसी ने मारी बाजी

नरेंद्रनगर: शिक्षा विभाग उत्तराखण्ड की पहल पर धर्मानन्द उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में सड़क सुरक्षा जागरूकता विषयक निबन्ध प्रतियोगिता आयोजित की गई। निबंध प्रतियोगिता मे आरती उनियाल प्रथम, रोहित भारती द्वितीय तथा मानसी सेमवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को काॅलेज प्राचार्य जानकी पंवार ने बधाई एवं प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रतिस्पर्धाओं में आवश्यक तैयारियों के लिए प्रोत्साहित किया।


राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, देहरादून, उत्तराखण्ड के द्वारा राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों, विद्यालयों में सड़क सुरक्षा की जागरूकता के लिए रैली, स्लोगन, निबंध, वाद विवाद आदि कार्यक्रमों को आयोजित किए जाने को निर्देशित किया गया। इसी क्रम में महाविद्यालय स्तरीय निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया। 

निबंध प्रतियोगिता सड़क सुरक्षा के नोडल अधिकारी डाॅ0 संजय कुमार की देखरेख में सम्पन्न हुई। प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए निर्णायक मंडल में डाॅ. सपना कश्यप, डाॅ. शैलजा रावत व डाॅ. सृचना सचदेवा ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर डाॅ. अनिल कुमार नैथानी, डाॅ. यूसी मैठानी, डाॅ. सुधा रानी, डाॅ. सोनी तिलारा, डाॅ. पूजा रानी, डाॅ. विक्रम सिंह बत्र्वाल, डाॅ. हिमांशु जोशी, डाॅ. ईरा सिंह, डाॅ. चंदा नौटियाल, विशाल त्यागी, रचना कठैत रावत, रंजना जोशी, सुनील कुमार एवं काॅलेज के छात्र छात्राएं मौजूद रहे।
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धन्य हैं हरक और उनकी मल्टी स्पेशलिटी प्रतिभा...

हरक की प्रतिभा पर किसी को शक नहीं है...। उन्होंने आज तक जिन कारनामों को अंजाम दिया, उससे शक गुंजाइश बचती भी नहीं है...। बचनी भी नहीं चाहिए। एक वही तो हैं, जो बहुप्रतिभा और विलक्ष्ण प्रतिभा के धनी हैं। उनसे प्रदेश के दूसरे नेताओं को एक बार नहीं कई-कई बार जलन भी होती है कि आखिर हरक ये सब कैसे कर लेते हैं। मजाल है किसी कि जो उनसे किसी भी चीज में आगे निकल जाये...।

चलो छोड़िये से सब। बातों में उलझाने के बजाय आपको हरक की उल्झनों से बाहर निकालते हैं। जिनमें आज आप फंसे हैं। हरक ने आज दिल्ली में इसीएस यानि कर्मचारी बीमा निगम की बैठक में हिस्सा लिया...। ये भी खबर है और ये भी कि उन्होंने गौरवान्वित किया। इससे बड़ी और भयंकर खबर ये कि अब कोटद्वार में इसीएस का मल्टी स्पेशिलिटी अस्पताल बनेगा...। हरक के सलाहकारों ने सलाहें देकर हरक की महिमा गाती खबरें चलवा दीं...। हेडिंग पढ़कर एक बार हर किसी का सिर चकरा जाएगा। पढ़े बगैर आप भी नहीं रह पाएंगे। मैं भी नहीं रह पाया...। पर पढ़ने के बाद मेरा तो सिर चकराने लगा...। आपकी आप जानें...।
अब सिर चकराया तो गोल-गोल घूमते-घूमते वो सीधे कोटद्वार जा पहुंचा...। जहां इसी साल इसीएस अस्पताल का उस राजा ने आधारशिला रखी थी, जिस राज दरबार के हरक मंत्री हैं...। कोई ऐसे-वैसे मंत्री नहीं। ताकतवर मंत्री...। कारनामा देखिये...। जिस अस्पताल का हरक कोटद्वार में पहले शिलान्यास करवा चुके हैं। उसी अस्पताल को बनाने की घोषणा दिल्ली में फिर से करवा डाली...। खबरें भी खूब दौड़ रही हैं। मजे की बात देखिये उसी अस्पताल का पहले सुरेंद्र सिंह नेगी ने भी कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य मंत्री रहते मेडिकल काॅलेज के नाम से शिलान्यास किया था...बाद में सत्ता पलटी तो, वो मेडीकल काॅलेज सत्ता की महाप्रतापी शक्तियों से इसीएस का मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल हो गया...। हैं ना धन्य...?
                                                     ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)

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आरक्षण रोस्टर से क्यों भड़क रहे यशपाल आर्य, सामान्य वर्ग और ओबीसी से इतनी नफरत क्यों ?

भर्तियों के आरक्षण रोस्टर में बदलाव से यशपाल आर्य नाराज बताये जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि उन्होंने इस्तीफे की धमकी दी है। यशपाल आर्य कद्दावर नेता हैं। उन्होंने इस्तीफे की धमकी दी है, ये बड़ी बात है। लेकिन, क्या यशपाल आर्य ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए धमकी दी है या वो वास्तव में नाराज हैं। किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले इसके बैकग्राउंड को देखना जरूरी होगा।


दरअसल, आरक्षण रोस्टर के लिए एक समिति बनाई गई थी। समिति ने यशपाल आर्य की देख-रेख में ही काम किया। उन्होंने एक विस्तृत रिपोर्ट भी बनाई थी। उस रिपोर्ट को उन्होंने कैबिनेट को सौंपा था। रिपोर्ट सौंपने के बाद कैबिनेट ने आरक्षण रोस्टर में बदलाव कर दिया और उस पर कैबिनेट ने मुहर भी लगा दी। याशपाल आर्य भी उसी कैबिनेट में मौजूद थे। तब उन्होंने कोई विरोध नहीं किया, लेकिन कैबिनेट समाप्त होने के बाद उन्होंने आरक्षण रोस्टर में बदलाव किये जाने को लेकर कहा था कि बदलाव बर्दास्त नहीं किया जाएगा।

इसके बाद हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक संपन्न हुई। कहा जा रहा है कि यशपाल आर्य ने उस बैठक में आरक्षण रोस्टर पर आपत्ति जताई और बदलाव नहीं किये जाने पर इस्तीफा देने की धमकी दे डाली। लेकिन, सवाल ये है कि जब पहले कैबिनेट में आरक्षण रोस्टर के बदलाव को अंतिम रूप दिया गया था। उस पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई थी, तब उन्होंने इसका विरोध क्यों नहीं किया ? इससे सवाल खड़े हो रहे हैं कि कर्मचारी और अन्य संगठनों के नाराजगी के बाद याशपाल आर्य ने इस्तीफे की धमकी दी है। इसे राजनीति समझा जाये या फिर सोची-समझी रणनीति।


आरक्षण रोस्टर पर कैबिनेट की मुहर लगने के बाद और यशपाल आर्य के इस्तीफे की धमकी देने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लिए ये फैसला गले की घंटी बन गया है। एक ऐसी घंटी जो बजती ही रहेगी। अगर एससी/एसटी के पक्ष में फिर से आरक्षण को बदला जाता है, तो सामान्य और ओबीसी का विरोध झेलना पड़ेगा। अगर कैबिनेट के फैसले पर अडिग रहते हैं, तो आरक्षित वर्ग और यशपाल आर्य की नाराजगी सहनी पड़ेगी। हालांकि उन्होंने अपने विकल्प खुले रखे हैं, जिसकी जानकारी उन्होंने ट्वीट कर दे दी थी। उन्होंने कहा था कि सभी से मिलकर बात की जाएगी, जो जरूरी होगा किया जाएगा।
 
यशपाल आर्य की इस्तीफे की धमकी की खबर सामने आने के बाद उनके खिलाफ सामान्य वर्ग और ओबीसी वर्ग के विभन्न संगठनों का गुस्सा साफ दिख रहा है। सोशल मीडिया में दोनों ही वर्गों ने यशपाल आर्य पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। लोगों का आरोप है कि उनका विरोध किसी जाति/वर्ग से नहीं है। उनका सवाल ये है कि पहली बार सामान्य और ओबीसी को पहले पायदान पर लाया गया है। इसमें बुरा क्या है ? यह भी सवाल किया है कि क्यों समाज को संविधान की शपथ लेने वाला नेता बांटने का प्रयास कर रहा है ? यशपाल आर्य पर प्रदेश को जातियों में बांटने का आरोप भी लगाया गया है।


आरक्षण रोस्टर की लड़ाई लंबी चल सकती है। सूत्रों की मानें तो यशपाल आर्य ने इस पर कुछ संगठनों और अपने सलाहकारों के कहने पर इस मामले का विरोध किया है। उनको अगर विरोध करना होता, तो उसी कैबिनेट में कर देते, जिसमें इस निर्णय पर मुहर लगाई थी। बहरहाल आरक्षण रोस्टर की लड़ाई लंबी चल सकती है। एक तरफ जहां यशपाल आर्य ने एससी/एसटी वर्ग को अपने इस्तीफे की धमकी देकर इशारा कर दिया है। वहीं, दूसरी और सामान्य वर्ग और ओबीसी वर्ग के संगठन भी सरकार को रोस्टर में बदलाव को लेकर आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं। इससे लगता है कि ये लड़ाई लंबी खिंच सकती है।
-प्रदीप रावत (रवांल्टा)
आरक्षण रोस्टर से क्यों भड़क रहे यशपाल आर्य, सामान्य वर्ग और ओबीसी से इतनी नफरत क्यों ? आरक्षण रोस्टर से क्यों भड़क रहे यशपाल आर्य, सामान्य वर्ग और ओबीसी से इतनी नफरत क्यों ? Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Friday, September 13, 2019 Rating: 5

6, 11 और 16 अक्टूबर को तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, 20 सितंबर को हो सकता है एलान

देहरादून: सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों की मानें तो पंचायत चुनाव तीन चरणों में 6, 11 और 16 अक्टूबर को हो सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को चुनाव कार्यक्रम भेज दिया है। मुख्यमंत्री एक-दो दिनों में चुनाव कार्यक्रम का अनुमोदन कर वापस चुनाव आयोग को भेज सकते हैं, जिसके बाद 18 से 20 सितंबर के बीच चुनाव कार्यक्रम का एलान किया जा सकता है। सरकार के सामने आपदाग्रस्त उत्तरकाशी और चमोली सहित दूसरे जिलों में चुनाव कराना किसी चुनौती से कम नहीं है।

 पंचायत चुनाव के प्रस्तावित कार्यक्रम को दो-तीन दिन में मुख्यमंत्री की झंडी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद आयोग 18 से 20 सितंबर के बीच पंचायत चुनाव के कार्यक्रम का ऐलान कर देगा। इसके साथ ही प्रदेश में पंचायत चुनाव की आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी जाएगी।

हाईकोर्ट ने हरिद्वार को छोड़ प्रदेश के 12 जिलों में 30 नवंबर तक हर हाल में पंचायत चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिये हैं। प्रदेश के 12 जिलों में त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए 66 हजार 246 पदों के निर्वाचन के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव का प्रस्तावित कार्यक्रम सरकार को पहले भेज दिया है।

सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग से भेजे गए कार्यक्रम को सीएम त्रिवेंद्र रावत की हरी झंडी मिलते ही पंचायत चुनाव की प्रक्रिया  भी नामांकन दाखिल करने के साथ शुरू हो जाएगी। 29 सितंबर को प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे और 6, 11 और 16 अक्टूबर को तीन चरणों में चुनाव संपन्न कराये जाएंगे।
6, 11 और 16 अक्टूबर को तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, 20 सितंबर को हो सकता है एलान 6, 11 और 16 अक्टूबर को तीन चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, 20 सितंबर को हो सकता है एलान Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, September 12, 2019 Rating: 5

क्या मुख्यमंत्री पांडवों से बड़े हो गए...? डूब मरो पांडवों को नीलाम करने वालों

संस्कृति और परंपरा क्या बिकाऊ है...? क्या देवभूमि कहलाने वाले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को इतना भी ज्ञान नहीं कि देवताओं से मनुष्य का स्वागत नहीं कराया जाता...? क्या उन आयोजकों और देवताओं को बुलाने वालों को भी पता नहीं था कि वो देवताओं से हैं, देवता उनसे नहीं हैं...? कौन है जो हमारी संस्कृति को नीलाम कर देना चाहता है...? कौन है जो हमारी परंपरा को तबाह कर देना चाहता है...? कौन है जो हमारी विरासत को डुबो देना चाहता है...? क्या बेशर्मी की भी कोई हद होती होगी...? मुझे नहीं लगता कि बेशर्मी की कोई हद होती होगी। बेशर्मी तो बेशर्मी ही होती है। चाहे कम हो या ज्यादा...। बेशर्मी में चोरी और डकैती जैसा फर्क भी नहीं कर सकते...। आपको बताते हैं कि असल में हुआ क्या...?



पांडवों की धरती

पांच पांडवों का नाम लेते ही मन श्रद्धा से भर जाता है। कहा जाता है कि प्रथम पूज्य श्री गणेश हैं। लेकिन, जौनसार से लेकर रंवाई तक जब भी लोग कोई शुभ कार्य करते हैं, तो बससे पहले पांच पांडवों को याद करते हैं। उनसे किसी भी काम को शुरू करने की इजाजत मांगते हैं। अपनी मेहतन से जो भी कमाते-खाते हैं। उसका सबसे पहला हिस्सा पांच पांडवों को चढ़ाया जाता है। ऐसा शायद ही कोई गांव होगा, जहां पांडवों की पूजा ना होती हो। हां कुछ अपवाद जरूर हो सकते हैं। जिस केदारनाथ भगवान पर सीएम श्रद्धा रखते हैं। वो भगवान केदारनाथ भी पांडवों के लिए ही केदारनाथ बने। उनको इस बात की शायद जानकारी नहीं कि केदारनाथ जी और भगवान पशुपति नाथ की लीला भी भगवान भोले नाथ ने पांडवों के लिए ही रची थी...।

सीएम बड़ा, देवता छोटे

देहरादून के मधुवन होटल में जो हुआ वो पांडवों का अपमान ही नहीं, हमारी समृद्ध संस्कृति और विरासत का घोर अपमान है। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए पांडवों को बुलाया गया। सोचिये क्या मुख्यमंत्री देवता हो गए...? क्या उनको इस बात की जानकारी नहीं कि देवताओं के आगे झुका जाता है...? देवता उनके आगे क्यों झुकें...? सोचिए सीएम देवताओं के आगे सिर झुकाना तो दूर, अपनी कुर्सी तक से खड़े नहीं हुए। कुर्सी का खेल बहुत बुरा होता है खैरासैंण के सूरज। कहीं पांडव रूठ गए, तो सूरज अस्त होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। जिसने आयोजन कराया और जिसने पांडवों के पाश्वाओं को ऐसा करने पर मजबूर किया, उनको कतई माफ नहीं किया जाना चाहिए। सांस्कृतिक आयोजनों, खुली जगहों पर पांडवों के जाने में कोई ऐतराज नहीं, लेकिन किसी होटल में मंच पर पांडवों को स्वागत के लिए लाना परंपरा रौंदने जैसा है।

परंपरा और संस्कृति को बाजार बना दिया
 
सरनौल की जिस संस्कृति पर पूरी रवांई घाटी को नाज है। उसे उसी गांव के कुछ लोगों ने कमाने का साधन बना दिया। बाजार में उतार दिया। खुले बाजार में। ना संस्कृति का ख्याल, ना परंपरा का ध्यान और ना पांच पांडवों के उन पाश्वाओं का मान, जिनको गांव में लोग पांडवों के अवतारों के नाम से ही पुकारते हैं। जब वो कहीं से लौटकर आते हैं, तो उन्हीं को पांच पांडव समझकर आशीष लेते हैं। उनके लिए रास्ते में गौ-मूत्र और गंगा जल छिड़कते हैं। उस मान-सम्मान को अपने निजी स्वार्थ के लिए बाजरू बना दिया। क्यों...?

गांव के लोग भी दुखी

देवताओं के अपमान और देवताओं को इस तरह खुले बाजार की चीज बनाने वालों से हर कोई नाराज है। शिक्षक और साहित्यकार ध्यान सिंह रावत ‘‘ध्यानी’’ इस बात को लेकर बहुत दुखी हैं। उनका कहना है कि ये संस्कृति का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा को बर्बाद करना है। इसे अगर हम ये समझें की संस्कृति का विस्तार होगा, तो पूरी तरह गलत है। इस तरह से हमने अपनी संस्कृति को हाटलों में लेजाकर ना केवल पांच पांडवों का अपमान किया, बल्कि अपने बुजुर्गों, अपने गांव, अपने समाज और पूरी यमुनाघाटी का अपमान किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी होटल में मंच पर तीन फीट ही हाइट पर गेस्ट बैठे हों और उनके नीचे पांडव नृत्य करें वो भी ये कहकर कि पांडव मुख्यमंत्री का स्वागत कर रहे हैं। केवल ध्यान सिंह रावत ही नहीं। दूसरे लोग भी खासे नाराज हैं। इस पर जरूर चिंता की जानी चाहिए। मंथन किया जाना चाहिए। एक दायरा तो कम से कम हमको सेट करना ही पड़ेगा कि हमें करना क्या है...?
                                                                           ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
क्या मुख्यमंत्री पांडवों से बड़े हो गए...? डूब मरो पांडवों को नीलाम करने वालों क्या मुख्यमंत्री पांडवों से बड़े हो गए...? डूब मरो पांडवों को नीलाम करने वालों Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, September 11, 2019 Rating: 5

एक्सक्लूसिव: फ्रांस की "माउंट ब्लांक" को फतह करेगी निम की टीम


देहरादून: नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी अपने एक और बड़े मिशन पर जाने वाला है। ये मिशन देश के बाहर पूरा किया जाएगा। फ्रांस और भारत सरकार के बीच साझा कार्यक्रम के इस मिशन को अंजाम दिया जाएगा। निम का पांच सदस्यीय दल 14 सितंबर को फ्रांस के लिए रवाना होगा। 


माउंट ब्लांक फ्रांस की सबसे कठिन चोटियों में से एक है। इस चोटी को फतह करने के लिए फ्रांस के पर्वतारोहण संस्थान सीएनआइएसइटी के 25 साल पूरा होने पर एक खास कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उसके उपलक्ष्य में फ्रांस और निम की टीमें मिलकर माउंट ब्लांक को फतह कर सिलवर जुबली मनाएंगे। 

इससे पहले फ्रांस की टीम ने भी निम में आकर इस तरह का एक इवेंट किया था। उस इवेंट के बाद अब निम फ्रांस में जाकर एक संयुक्त अभियान के जरिये माउंट ब्लांक जैसे खतरनाक और कठिन पीक को फतह कर नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

एक्सक्लूसिव: फ्रांस की "माउंट ब्लांक" को फतह करेगी निम की टीम एक्सक्लूसिव: फ्रांस की "माउंट ब्लांक" को फतह करेगी निम की टीम Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, September 11, 2019 Rating: 5

साकार होगा फोटो बाबा का 71 साल पुराना सपना, गंगोत्री में दिखेंगी 1948 से अब तक की अद्भृत तस्वीरें

गंगोत्रीः फोटो बाबा स्वामी सुंदरानंद उर्फ फोटो बाबा का 71 साल का सपना साकार होने जा रहा है। इस गैलरी में हिमालय में 71 साल में आए बदलावों को 1000 तस्वीरों को पेश किए जाएगा। यह गैलरी ई-कोफ्रेंडली है। आंध्र प्रदेश के रहने वाले 94 साल के स्वामी सुंदरानंद 1948 से गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में साधना कर रहे हैं। वे उत्तरकाशी के नेहरू पर्वतारोहण संस्था के पहले छात्र है। 2002 में उनकी तस्वीरें सिंगापुर से हिमालय-रू द लैंस ऑफ साधु में प्रकाशित हो चुकी हैं।



1948 से अब तक सिर्फ तस्वीरों में
 
गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में दशकों से तप साधना के साथ हिमालय में आ रहे बदलावों को अपने कैमरे में कैद करने वाले फोटो बाबा स्वामी सुंदरानंद की साधना साकार होने जा रही है। स्वामी तपोवन महाराज के शिष्य फोटो बाबा स्वामी सुंदरानंद 1948 से गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में तप साधना कर रहे हैं।

71 साल का हर हिमालयी बदलाव की तस्वीर
 
पिछले सात दशकों में बाबा हिमालय का चप्पा-चप्पा छान चूके हंै। विशेष बात इस अवधि में यह रही कि हिमालय में आये तमाम बदलाव को उन्होंने बड़ी खूबसूरती के साथ अपने कैमरे में कैद किया है। गंगोत्री के गंगोत्री धाम में बीते एक दशक से बन रही तपोवनम् हिरण्यगर्भ आर्ट गैलरी (हिमालय तीर्थ) तैयार हो चुकी है। ढाई करोड़ की लागत से आर्ट गैलरी तैयार की गई है। इस गैलरी में स्वामी सुंदरानंद की खींची हजारों दुर्लभ तस्वीरों को लेमिनेट कर सजाया गया है।

तैयारियां पूरी 13 सितंबर को उद्घाटन

 
गंगोत्री में तैयार हो चुकी पांच मंजिला आर्ट गैलरी में तीन मंजिल ऐसी हैं, जिनमें मुख्य द्वार से लेकर सीढ़ियों और दीवारों पर हर जगह हिमालय की कंदराएं, चोटियां, घाटियां, लोक संस्कृति और पौराणिक लोक जीवन को जीवंत करती हजारों तस्वीरें लगी हैं। गंगोत्री में तीन करोड़ रुपए की लागत से बनी तपोवनम हिरण्यगर्भ आर्ट गैलरी का यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, आरएसएस के सह कार्यवाहक सुरेश सोनी 13 सितंबर को उद्घाटन करेंगे। जिसकी तैयारी जोरों पर है।

1000 हजार दुर्लभ तस्वीरें

गैलरी में हिमालय की 1000 हजार दुर्लभ तस्वीरों के अलावा करीब एक लाख फोटो डिजिटल फॉर्मेट में हैं। ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के शौकीन बाबा ने सिर्फ गंगोत्री और गोमुख ग्लेशियर की ही 50 हजार से ज्यादा तस्वीरें और ओम पर्वत समेत एक दर्जन से अधिक चोटियों, ट्रैक रूट, ताल, बुग्याल, वन्य जीव, वनस्पति व पहाड़ की संस्कृति को दर्शाती तस्वीरें कैमरे में कैद की हैं।

2002 में इन तस्वीरों का संकलन

2002 में इन तस्वीरों का संकलन अपनी पुस्तक थ्रो दी लांस को साधु का सिंगापुर में प्रकाशित किया था। जिसके बाद से बाबा को फोटो बाबा के नाम से जाने जाना लगा। गंगोत्री के पास तैयार हुई आकर्षण आर्ट गैलरी में जंहा हिमालय की खूबसूरती पर्यावरण पहाड़ की आर्थिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी।इसके अलावा गंगा हिमालय का सामाजिक धार्मिक महत्व से लोग रूबरू होंगे।

साकार होगा फोटो बाबा का 71 साल पुराना सपना, गंगोत्री में दिखेंगी 1948 से अब तक की अद्भृत तस्वीरें साकार होगा फोटो बाबा का 71 साल पुराना सपना, गंगोत्री में दिखेंगी 1948 से अब तक की अद्भृत तस्वीरें Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, September 10, 2019 Rating: 5

नरेंद्र नगर में मानवेन्द्र भंडारी बने अध्यक्ष, प्राचार्य प्रो.जानकी पंवार ने दिलाई शपथ

नरेंद्र नगर: धर्मानंद राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर के छात्रसंघ चुनाव पर अध्यक्ष पद पर मानवेन्द्र भंडारी को 254 और संदीप पेटवाल को 229 मत प्राप्त हुए। सहसचिव पर अतुल सिंह को 303 और दीपक सिंह को 149 मत मिले। छात्र संघ प्रतिनिधि पर राहुल जायसवाल को 219 मत मिले जबकि अभिषेक कपूर को कुल 138 वोट पड़े।  

 
सोमवार को कुल तीन पदों के लिए मतदान हुआ। मतदान प्रक्रिया सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली। उपाध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष पद पर एक-एक प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद एक-एक प्रत्याशी शेष रह गए थे। उपाध्यक्ष पद पर जहां सागर निर्विरोध चुनाव जीते, वहीं महासचिव पद पर अरविंद निर्विरोध रहे। कोषाध्यक्ष पद महिला आरक्षित होने के कारण सिर्फ एक प्रत्याशी विद्या ने ही नामांकन दाखिल किया जिस कारण विद्या इस पद पर निर्विरोध विजेता रही। 

मतगणना का कार्य 3 बजे शुरू होकर 5 बजे तक चला। चुनाव अधिकारी डॉ. हिमांशु जोशी ने परिणामों के बाद विजेताओं को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर जानकी पंवार ने विजेताओं को बधाई देते हुए उनसे कालेज की गतिविधियों में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की। प्रोफेसर जानकी पंवार ने निर्वाचन में भागीदारी निभाने वाले सभी शिक्षक और कर्मचारियों को सफल चुनाव सम्पन्न करवाने पर बधाई दी। 

शासन की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक एस. पी. सेमवाल ने महाविद्यालय परिवार के सफल चुनाव पर महाविद्यालय की प्रशंसा की। सोमवार को हुए मतदान में अध्यक्ष पद पर मानवेन्द्र भंडारी और संदीप पेटवाल के बीच चुनाव हुआ जबकि सहसचिव पर अतुल सिंह और दीपक सिंह के बीच मुकाबला था। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के पद पर अभिषेक कपूर और राहुल जायसवाल के बीच चुनाव हुआ। मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. हिमांशु जोशी के अनुसार कुल 549 वोटर में से अध्यक्ष और सहसचिव पर कुल 491 छात्रों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस अवसर पर डा. सपना कश्यप, डा. चंदा नौटियाल, डा. अनिल नैथानी, डा. शैलजा रावत, डा. सृचना सचदेव, डा. संजय महर, डा. संजय कुमार, डा. विक्रम वर्तवल और डा. मनोज सुंद्रीयाल के अलावा अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे।
नरेंद्र नगर में मानवेन्द्र भंडारी बने अध्यक्ष, प्राचार्य प्रो.जानकी पंवार ने दिलाई शपथ नरेंद्र नगर में मानवेन्द्र भंडारी बने अध्यक्ष, प्राचार्य प्रो.जानकी पंवार ने दिलाई शपथ Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Monday, September 09, 2019 Rating: 5

"अपना वोट-अपने गांव" के बाद अनिल बलूनी की नई मुहिम, गांव में मनाएंगे बग्वाल

देहरादून: उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने कहा कि वे इस बार की ईगास बग्वाल अपने पैतृक गांव में मनायेंगे। ईगास बग्वाल या इकाशी बग्वाल उत्तराखंड के सभी अंचलों का प्रमुख लोकपर्व है, जो दीपावली के 11 दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह 8 नवंबर अर्थात कार्तिक माह की 22 गते को मनाया जायेगा।
   
     
सांसद बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड के महत्वपूर्ण और वरिष्ठ पदों पर आसीन महानुभावों से भी ईगास बग्वाल अपने गांव में मनाने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में देशभर में उत्तराखंड की प्रवासी संस्थाओं, विदेशों में रहने वाले उत्तराखंडी बंधुओं से भी इस संबंध में अनुरोध किया है।

"अपना वोट-अपने गांव" अभियान के तहत बलूनी लंबे समय से पलायन के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, जिसके लिए वह अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सेना प्रमुख विपिन रावत, गीतकार और लेखक प्रसून जोशी, अंडमान निकोबार के लेफ्टिनेंट गवर्नर और पूर्व नौसेना प्रमुख डीके जोशी सहित अनेक प्रमुख उत्तराखंडियों से भेंट कर चुके हैं। सभी महानुभावों ने इस अभियान की प्रशंसा की है और वर्तमान परिस्थितियों में उत्तराखंड के लिए बहुत आवश्यक बताया है।

बलूनी ने कहा कि प्रमुखतः शिक्षा, रोजगार के लिये उत्तराखंड से पलायन हुआ है । तेजी से उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की आबादी घटी है जिस कारण वहां विधानसभा सीटों की संख्या घटी है और अगले परिसीमन में और घट जाएंगी। पलायन के कारण अनेक गांव निर्जन (घोस्ट विलेज) घोषित हो चुके हैं, यह भयावह स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह राज्य जनता ने बड़े त्याग और बलिदान के बाद प्राप्त किया है। शहीदों के सपनों का राज्य बनाने के लिए हमें निजी तौर पर भी इन अभियानों से जुड़ना होगा, ताकि हम अपनी जड़ों, संस्कृति और पूर्वजों की विरासत को सहेज कर रख सकें।


"अपना वोट-अपने गांव" के बाद अनिल बलूनी की नई मुहिम, गांव में मनाएंगे बग्वाल "अपना वोट-अपने गांव" के बाद अनिल बलूनी की नई मुहिम, गांव में मनाएंगे बग्वाल Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, September 08, 2019 Rating: 5

चंद्रयान-2 की तरह मुख्यमंत्री का बेरोजगारों से संपर्क टूटा

सोशल मीडिया भी कमाल है। इसकी गजब की क्रिएटिविटी है इसमें। अब इसे ही लें...जिस तरह से चंद्रयान-2 का संपर्क टूट गया। उसी तरह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का संपर्क भी बेरोजगारों से टूट गया है। सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं। बेरोजगारों के लिए हवाई घोषणाओं के निकली विज्ञत्यिों की लैंडिंग अब तक नहीं हो पाई है। बेरोजगारों को भी चिंता सता रही है कि कहीं सीएम साब का उनसे हमेशा के लिए संपर्क टूट गया...तो पता नहीं फिर कब चंद्रयान-2 के बाद चंद्रयान-3 आयेगा...। बेचारों की चिंता वाजिब भी है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है। वैसे-वैस नौकरी की उम्मीद साथ छोड़ते जा रही है...। अब तो बस देवभूमि के देवताओं का ही सहारा बचा है...। 
 


सोशल मीडिया भी कमाल है...। ये सब सोशल मीडिया का कमाल है। सरकार तो बगैर मतलब हमारे पीछे पड़ी रहती है...। जब से साइब बंद कराई है...। आज तक नहीं खुली। हमने खुलने की आस भी छोड़ दी है...। ब्लाॅग से ही काम चला लेते हैं...। अब लिखता तो है ही...। आज तक पेन कलम ही लिखती थी...। अब तो मुंह भी लिखने लगा है...। सोशल मीडिया पर बेरोजगारों ने सवाल उठाया है...। मुख्यमंत्री से कुछ सवाल पूछे हैं कि हवा में तैरती भर्ती घोषणाओं की जो लंबी फेहरिस्त है...उनकी लैंडिंग कब होगी...? होगी भी या ये भी क्रैश हो जाएंगे। साथ में ये भी लिखा है कि चंद्रयान-2 जितनी ही सफलता हासिल कर लो...। हमारा काम कुछ तो चल जाएगा...बल। हमें देश के वैज्ञानिकों पर गर्व है...। उन्होंने अपना 95 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया...आप कितना कर पाएं हैं...कमसे कम इतना ही बता देते...।

इन सवालों के जवाब मांग रहे हैं, मिलेंग या नहीं
पहला- कहां गई 1000 पटवारी भर्ती, जो स्वयं मुख्यमंत्री ने अपने श्रीमुख से कही थी।
दूसरा- कहां गए 1500 कॉन्स्टेबल भर्ती जो घोषणा हुई थी।
तीसरा- कहां गया उपनल का स्थायीकरण का वादा।
चैथा- कहां गये गेस्ट टीचर और समायोजन।
पांचवां- कहां है वन दरोगा भर्ती, पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती और उद्यान अधिकारी भर्ती।
छठा- कहां गये प्राइमरी शिक्षक भर्ती।
आठवां- कहां गयी 1350 एलटी भर्ती।
नौवां- कहां गयी 572 प्रवक्ता भर्ती।
दसवां- कहां गयी पीसीएस, लोवर पीसीएस भर्ती।
ग्यारहवां- कहां गयी वीडिओ, वीपीडीओ भर्ती।
बारहवां-कहां गयी वनक्षेत्राधिकारी भर्ती।
तेरहवां-कहां गयी ग्रुप सी की भर्ती।
                                                        ...प्रदीप रावत (रवांल्टा)
चंद्रयान-2 की तरह मुख्यमंत्री का बेरोजगारों से संपर्क टूटा चंद्रयान-2 की तरह मुख्यमंत्री का बेरोजगारों से संपर्क टूटा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Sunday, September 08, 2019 Rating: 5

ऑल वेदर रोड जल्द होंगे बड़े खुलासे: जेएसपी कंपनी का कारनामा, बगैर बुनियाद बना दी दीवार

बड़कोट: जेएसपी प्रोजेक्टस लिमिटेड ऑल वेदर रोड का निर्माण कार्य कर रही है। कंपनी जिस तरह से काम कर रही है। उससे पर्यावरण को नुकसान हो ही रहा है। लोगों की जान और घरों पर भी खतरा मंडराने लगा है। जेएसपी ने कई ऐसे कारनामे किये हैं, जिनसे लोगों को भारी नुकसान हुआ है। कुछ ऐसी तस्वीर सामने आई है। जिसने कंपनी के निर्माण की पोल खोल कर रख दी। 

दरअसल, बड़कोट-यमुनोत्री हाईवे पर छटांग गांव में घरों के नीचे से कंपनी ने सड़क कटिंग करने के बाद पक्की दीवार लगाई। जिस वक्त दीवार लगाई थी। बाहर से मिट्टी का ढेर लगा था। लेकिन, आजकल बारिश के बाद जैसे ही मिट्टी के ढेर बहा। दीवार की हकीकत सामने आ गई।

तस्वीर में साफ नजर आ रहा है कि दीवार की बुनियाद ही नहीं बनाई गई है। दिखावे के लिए दीवार को चेकडैम की तरह तार और पत्थरों से बनाया गया है, लेकिन मिट्टी हटने के बाद तार भी पत्थरों को छोड़ने लगी है। तारों को जो जाल बनाया गया था, वो भी झुकने लगा है।

इससे लोगों के घरों को खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत डीएम से की है। कंपनी के अधिकारियों को भी जानकारी दी, लेकिन किसी ने भी संज्ञान नहीं लिया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो कंपनी के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।

बहुत जल्द होंगे बड़े खुलासे
बड़कोट-गंगोत्री रोड पर भी अनियमितता।
स्टोन क्रेशर को लेकर डीएम के आदेशों को ठेंगा।
टनल निर्माण में पर्यावण को भारी नुकसान।
पहाड़ी को कमजोर कर रही जेएसपी कंपनी।
बेतरतीबी ढंग से हो रहा पहाड़ों का कटान।

ऑल वेदर रोड जल्द होंगे बड़े खुलासे: जेएसपी कंपनी का कारनामा, बगैर बुनियाद बना दी दीवार ऑल वेदर रोड जल्द होंगे बड़े खुलासे: जेएसपी कंपनी का कारनामा, बगैर बुनियाद बना दी दीवार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, September 05, 2019 Rating: 5

EXCLUSIVE : इस गांव में प्रधान चुनने का संकट, एक भी योग्य उम्मीदवार नहीं

  • प्रदीप रावत (रवांल्टा)
उत्तरकाशी: सरकार पंचायत चुनाव के अधिसूचना जारी करने की तैयारी पूरी कर चुकी है। सरकार ने अपनी तैयारियों से चुनाव आयोग को सूचित कर दिया है। माना जा रहा है कि 15 सितंबर से प्रदेश में चुनाव आचार सहिंता लागू हो जाएगी। सरकार ने भले ही चुनाव आयोग को सूचित कर दिया हो, लेकिन जिस तरह की खबरें सामने आ रही हैं। उससे लगता है कि प्रदेश कुछ सीटें खाली रह जाएंगी। अगर सरकार ने उन पर ध्यान नहीं दिया। 


दरअसल, उत्तरकाशी में भटवाड़ी के मल्ला गांव में एक भी परिवार आरक्षित वर्ग का नहीं है। फिर भी ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत की सीटें आरक्षित कर दी गई। आपत्तियों पर भी कोई विचार नहीं किया गया। ऐसा ही एक और मामला सामने आया है। इस गांव में अनुसूचित जाती का परिवार तो है, लेकिन परिवार में मात्र तीन सदस्य हैं। उनमें से भी एक महिला की उम्र करीबी 78 साल है। बेटा सरकार नौकरी में है। गांव में आरक्षण के अनुसार जो एक मात्र योग्य उम्मीदवार है। वो लोक निर्माण विभाग में संविदा पर कार्यरत हैं। इस हिसाब से वो भी चुनाव नहीं लड़ पाएगा।

डुंडा ब्लाक के वाण गांव में करीब 76 परिवार हैं। उनमें से एक ही परिवार अनुसूचित जाति का है। महिला का एक बेटा है, वो लोक निर्माण विभाग में मेट है। सरकार नौकरी है। जानकारी के अनुसार तीन बेटे हैं, लेकिन तीनों अभी छोटे हैं। पंचायत चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया और वोटों के अनुपात के हिसाब से भी इस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित नहीं किया जा सकता है। ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति भी लगाई थी। बावजूद इसके ग्रामीणों की आपत्ति पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
EXCLUSIVE : इस गांव में प्रधान चुनने का संकट, एक भी योग्य उम्मीदवार नहीं EXCLUSIVE : इस गांव में प्रधान चुनने का संकट, एक भी योग्य उम्मीदवार नहीं Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Thursday, September 05, 2019 Rating: 5

नरेंद्र नगर डिग्री कॉलेज में 9 सितंबर को होगा छात्र संघ चुनाव, 19 नामांकन पत्र बिके

नरेंद्र नगर : धर्मानन्द उनियाल राजकीय महाविद्यालय नरेन्द्रनगर छात्र संघ चुनाव सत्र 2019-20 के लिए विभिन्न पदों के लिए 14 और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि के पांच नामांकन पत्रों की बिक्री हुई। मुख्य चुनाव अधिकारी डाॅ. हिमांशु जोशी ने छात्र संघ चुनाव की अधिसूचना जारी करते हुए चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया।

उन्होंने कहा कि गुरूवार  5 सितम्बर को सुबह 11 बजे से 3 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किये जाएगें। शुक्रवार को नामांकन पत्रों की जांच के बाद स्वीकृत प्रत्याशियों की सूची का प्रकाशन सुबह 11 बजे किया जाएगा। उसी दिन सुबह साढे ग्यारह बजे से लेकर साढें बारह बजे तक नामांकन वापसी का समय रखा गया है। एक बजे प्रत्याशियों की अन्तिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा। 

उन्होंने यह भी कहा कि सात सितम्बर को साढें बारह बजे से प्रत्याशियों की आम सभा आयोजित की जाएगी। नौ सितम्बर को मतदान अपराहन दो बजे तक होगा जिसके बाद तीन बजे से मतगणना होगी और उसी दिन परिणामों की घोषणा के बाद शपथ ग्रहण समारोह किया जाएगा। 

मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि चुनाव के मद्देनज़र काॅलेज में व्यवस्थाऐं कर ली गई है और अनुशासनहीनता को सहन नहीं किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य चुनाव अधिकारी के साथ उप निर्वाचन अधिकारी डाॅ. मनोज सुन्द्रियाल, डाॅ. शैलजा रावत व डाॅ. नताशा उपस्थित रहे।
नरेंद्र नगर डिग्री कॉलेज में 9 सितंबर को होगा छात्र संघ चुनाव, 19 नामांकन पत्र बिके नरेंद्र नगर डिग्री कॉलेज में  9 सितंबर को होगा छात्र संघ चुनाव, 19 नामांकन पत्र बिके Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, September 04, 2019 Rating: 5

नितिन गडकरी से मिले अनिल बलूनी, धनगढ़ी में जल्द बनेगा पुल

देहरादून: राज्यसभा सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने आज केंद्रीय राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से भेंट कर उत्तराखंड के रामनगर बुवाखाल हाईवे पर मोहान के निकट धनगढ़ी स्थित नाले के ऊपर पुल बनाने की मांग की। गडकरी ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई का निर्देश दिया। सांसद बलूनी ने माननीय मंत्री जी को गत सरकार में रामनगर और ऋषिकेश में अत्याधुनिक बस पोर्ट के निर्माण की सहमति भी याद दिलायी जिस पर मंत्री जी ने शीघ्र कार्रवाई कर अवगत कराने को कहा।


बलूनी ने कहा कि रामनगर-मोहान के मध्य धनगढ़ी नामक स्थान पर हर साल बरसात के समय दुर्घटनाएं होती है। इस वर्ष भी बरसात में अनेक वाहन बह गये व तीन व्यक्तियों की मौत हो गई। एनएच 309 पर स्थित यह नाला गढ़वाल- कुमाऊं को रामनगर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। बरसात के दौरान यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उत्तराखण्ड एनएच से भी प्राप्त इस प्रस्ताव को वार्षिक योजना में शामिल किया गया है।

उन्होंने ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया कि इस महत्वपूर्ण समस्या का उन्होंने तत्काल समाधान कर एक पुल की स्वीकृति का आश्वासन दिया है। अपेक्षा है शीघ्र ही इस पुल के निर्माण से संबंधित प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएंगी।



नितिन गडकरी से मिले अनिल बलूनी, धनगढ़ी में जल्द बनेगा पुल नितिन गडकरी से मिले अनिल बलूनी, धनगढ़ी में जल्द बनेगा पुल Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, September 04, 2019 Rating: 5

गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जाति का नहीं, फिर भी प्रधान और क्षेत्र पंचायत सीटें आरक्षित

उत्तरकाशी: आरक्षण जब से तय हुआ है। उसके बाद से ही लगातार कई तरह के मामले सामने आ रहे हैं। अभी नैनीताल का ही एक मामला सामने आया था, जिसमें गांव में ग्राम प्रधान के लिए कोई उम्मीदवार ही नहीं मिला। मजबूरी में दिल्ली में रह रही महिला को चुनाव लड़ने के लिए कहा गया। गांव में वही एक मात्र ऐसी महिला हैं, जो प्रधान पद का चुनाव लड़ने के योग्य हैं। वहीं, उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लाक का मल्ला गांव ऐसा है, जहां एक भी अनुसूचित जाति का परिवार नहीं है। बावजूद सीट प्रधान और क्षेत्र पंचायत के लिए आरक्षित कर दी गई। 


भटवाड़ी प्रखंड के मल्ला गांव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान और क्षेत्र पंचायत पद के लिए जिला प्रशासन की ओर से ऐसा अरक्षण तय किया गया, जिसको देखकर लगता है कि कहीं न कहीं गोलमाल है। दरअसल, उत्तरकाशी विकासखंड भटवाड़ी के मल्ला गांव में 2011 की जनगणना में गलती से 114 अनुसूचित जनजाति के लोग दर्शाये गये हैं, जो पूरी गलत है। वास्तव में मल्ला ग्राम सभा में एक भी परिवार अनुसूचित जनजाति का नहीं है। गांव में दो महिलाएं ही अनुसूचित जनजाति की हैं और इनका भी किसी दस्तावेज में कोई रिकार्ड नहीं है।

उत्तरकाशी के पीयूष टाइम्स ने रिपोर्ट पेश की है। उसमें कहा गया है कि 2014 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में 2011 की जनगणना में 114 अनुसूचित जनजाति के लोगों के अनुसार मल्ला गंाव में प्रधान पद अनुसूचित जनजाति और क्षेत्र पंचायत समान्य पुरूष था। प्रधान पद पर मल्ला गांव के ग्रामीणों ने तत्कालीन जिलाधिकारी के पास आपति दर्ज कराई थी। नियमानुसार इस सीट को आरक्षित नहीं किया जा सकता है। उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीधरबाबू अद्दांकी ने मजिस्ट्रेटी जांच की गई और पाया गया कि वास्तव में मल्ला गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जनजाति का नहीं है। तब सीट बदली गई थी, लेकिन अब फिर से पहले जैसी ही स्थिति सामने आ गई है। 

इस बार होने नवाले पंचायत चुनाव में फिर से 2011 की जनगणना के अनुसार ही मल्ला गांव में 114 अनुसूचित जनजाति के लोग दर्शाये गए हैं। प्रशासन को इन सब बातों की जानकारी थी, फिर भी सीटों के आरक्षण में इसका ध्यान नहीं रखा गया है। मल्ला गांव के ग्रामीणों ने आपत्ति भी दर्ज की। इसके बाद भी आरक्षण को नहीं बदला गया।
गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जाति का नहीं, फिर भी प्रधान और क्षेत्र पंचायत सीटें आरक्षित गांव में एक भी परिवार अनुसूचित जाति का नहीं, फिर भी प्रधान और क्षेत्र पंचायत सीटें आरक्षित Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Wednesday, September 04, 2019 Rating: 5

दिल्ली में चुनी जाएगी उत्तराखंड की इस ग्रामसभा की प्रधान, लोगों ने भेजा बुलावा

नैनीताल: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। आरक्षण तय हो चुका है। देरी बस इस बात की है कि चुनाव का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। हालांकि दूसरी ओर हाईकोर्ट की ओर भी कई प्रत्याशियों की नजर है कि वहां से क्या फैसला आता है। बहरहाल वहां से जो फैसला आये, लेकिन बेतालघाट ब्लॉक के कफूल्टा गांव का प्रधान तय हो चुका है। प्रधान पद महिला के लिए आरक्षित है। जिनका प्रधान बनना है। वो दिल्ली में अपने गांव से पूरे 250 किलोमीटर दूर बैठी हैं। 

पंचायत चुनाव : 250 किमी दूर से आएंगी नई ग्राम प्रधान
अपने गांव से करीब 250 किमी दूर देश की राजधानी दिल्ली में बैठी महिला कफूल्टा गांव की प्रधान बनने वाली हैं। उनकी राह में कोई रोड़ा ना तो है और ना कोई अटका सकता है। कफूल्टा गांव गांव में करीब 453 वोटर हैं। परिवार रजिस्टर के अनुसार 167 परिवार गांव में रहते हैं, जिसमें महज दो परिवार ही अनुसूचित जाति के हैं। इनमें से एक काश्तकार किशन राम का परिवार है, जिनके परिवार में कोई महिला के नहीं है। दूसरा परिवार उनके भाई गणेश राम को है, जो दिल्ली में रहते हैं।

गणेश की पत्नी ग्राम प्रधान बनने के लिए योग्यता भी रखती हैं। वो फिलहाल पति के साथ दिल्ली में रहती हैं। इस बार अनुसूचित जाति महिला आरक्षित सीट है। गांव में सुनीता ही एकमात्र योग्य उम्मीदवार हैं। उनको गांव आकर मुखिया बनने का बुलावा भेजा गया है। ग्रामीणों को भी कोई आपत्ति नहीं है।
दिल्ली में चुनी जाएगी उत्तराखंड की इस ग्रामसभा की प्रधान, लोगों ने भेजा बुलावा दिल्ली में चुनी जाएगी उत्तराखंड की इस ग्रामसभा की प्रधान, लोगों ने भेजा बुलावा Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, September 03, 2019 Rating: 5

जीवन अमुल्य है, इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी : प्रो. जानकी पंवार

नरेंद्र नगर: शिक्षा विभाग उत्तराखण्ड की पहल पर धर्मानन्द राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में सड़क सुरक्षा जागरूकता रैली निकाली गई। यह रैली महाविद्यालय के परिसर कांडा से ऋषिकेश-टिहरी मुख्य मार्ग के तिराहे तक आयोजित की गई। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों, विद्यालयों में सड़क सुरक्षा की जागरूकता के लिए रैली, स्लोगन, निबंध, वाद-विवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसीके तहत कालेज छात्रों ने सड़क जागरूकता रैली, स्लोगन और निबंध प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।

जागरूकता रैली और अन्य कार्यक्रमों का शुभारम्भ महाविद्यालय प्राचार्या प्रो. जानकी पंवार ने किया। छात्रों को संबोधित करते हुए प्रो. पंवार ने कहा कि वाहन चलाते हुए हेलमेट का प्रयोग अनिवार्य रूप से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग ना करे। उन्होंने कहा कि जीवन अमुल्य है, इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। सड़क सुरक्षा के नोडल अधिकारी डा. संजय कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें सड़क सुरक्षा के नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। साथ ही औरों को भी इन्हें अपनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

कालेज प्रांगण से प्रारम्भ इस रैली में कालेज छात्रों ने सड़क सुरक्षा के लिए जागरूक करने वाले स्लोगन और संदेशों के जरिए लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर डा. अनिल कुमार नैथानी, डा. सपना कश्यप, डा. विक्रम सिंह बत्र्वाल, डा. मनोज सुंद्रीयाल, डा. हिमांशु जोशी, डा. ईरा सिंह, डा. चंदा नौटियाल, विशाल त्यागी, रचना कठैत रावत, रंजना जोशी, अजय पुंडीर, सुनील कुमार शामिल रहे।
जीवन अमुल्य है, इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी : प्रो. जानकी पंवार जीवन अमुल्य है, इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी : प्रो. जानकी पंवार Reviewed by पहाड़ समाचार www.pahadsamachar.com on Tuesday, September 03, 2019 Rating: 5
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